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कोविंद के भाई बोले- झींझक नाम पूरे देश में किया रोशन

झींझक में रहते हैं रामनाथ कोविंद के भाई प्यारेलाल।


बिहार के राज्यपाल व एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के नए मुकाम पर उनके भाई प्यारेलाल की खुशी का ठिकाना नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद परौंख और झींझक क्या पूरे जिले का नाम देशभर में फैलेगा। बोले-बड़ों का सम्मान करने से कई बार मूक आशीर्वाद मिलता है। कोविंद की कामयाबी ऐसे ही आशीर्वाद का फल है।
कस्बे के ओमनगर मोहल्ले में रहने वाले प्यारेलाल को यह खबर लोगों और शुभचिंतकों के बधाई वाले फोन से हुई। कपड़ों के व्यवसाय से जुड़े प्यारेलाल ने घर पर रामनाथ कोविंद के बिहार का गवर्नर होने की पट्टिका लगा रखी है। उन्होंने बताया कि कोविंद के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद से ही भरोसा था कि वह एक न एक दिन नाम रोशन करेंगे। कहा कि सांसद रहते रामनाथ कोविंद ने गांव के विकास के लिए सबकुछ दिया। अपने पैतृक आवास को जहां मिलन केंद्र बना दिया। वहीं सड़क, पानी और बैंक, कॉलेज आदि सारी सुविधाएं देने की कोशिश भी की।
प्यारेलाल का कहना है कि रामनाथ कोविंद जूनियर की पढ़ाई के बाद भले ही गांव छोड़कर कानपुर पढ़ने के लिए चले गए हों लेकिन गांव से उनका लगाव सदा बना रहा। गांव की तरक्की के लिए वे बराबर सहयोग करते रहे हैं। उन्होंने पूरे गांव में आरसीसी सड़कों का जाल बिछा दिया है। वहीं कई वर्ष पहले उन्होंने अपने पैतृक घर की जगह पर सांसद निधि से मिलन केंद्र बनवा दिया है। करीब दो माह पहले गांव के लोगों के आग्रह पर उन्होंने प्रयास करके बैंक भी खुलवा दिया। किसानों की सिंचाई की समस्या को खत्म करने के लिए हाल ही में उन्होंने चार ट्यूबवेल स्वीकृत करवाए हैं। इन पर काम भी चल रहा है। डेरापुर-मंगलपुर मार्ग से गांव को जाने वाले लिंक मार्ग पर डामरीकरण उनके ही प्रयास से हुआ है। गांव में शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए उन्होंने प्राइवेट इंटर कॉलेज खुलवाया, जो सरकार से मान्यता प्राप्त है। अब गांव के लोगों में बाकी कमी भी पूरी हो जाने की आस जगी है। 
बचपन में उठा मां का साया
बचपन में मां का साया उठ जाने के बावजूद कोविंद ने मेहनत और ईमानदारी से समाज में जो जगह बनाई, उसका फल उन्हे देश के सर्वोच्च पद पर बैठने का मौका मिलने से मिल रहा है। परौंख के ग्रामीण बताते हैं कि जब कोविंद ढाई वर्ष के थे तभी गांव के दूसरी तरफ आग लग गई थी। उसी दौरान कई घरों को छोड़ते हुए चिनगारी उनके घर में रखे छप्पर में  गिर गई। इससे घर में आग लग गई। जब तक गांव के लोग कुछ समझ पाते पूरा घर राख हो गया था। आग से उनकी माता की जलकर मौत हो गई थी। बचपन में मां का साया उठ जाने से घर में सबसे छोटे कोविंद की परवरिश उनके पिता ने की। उन्होंने कभी भी मां की कमी महसूस नहीं होने दी। पढ़ाई में अव्वल रहने के साथ वे अपने साथियों की पढाई में मदद भी करते थे। इसे आज भी उनके सहपाठी याद करते हैं।  
गांव की हर गली में जश्न
रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति पद के लिए नाम की घोषणा होते ही उनके पैतृक गांव परौंख के लोग बाबा के नाम से जश्न मना रहे हैं। गांव के सभी लोग उन्हें बाबा की पदवी से पुकारते हैं। गांव के युवा, बुजुर्ग, बच्चे व महिलाएं बाबा के राष्ट्रपति पद के लिए नाम की घोषणा से फूले नहीं समा रहे हैं। गांव की गलियों में उत्सव जैसा नजारा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाबा ने गांव का नाम देश में रोशन कर दिया है। समान उम्र के लोग भी उन्हें बाबा शब्द से नवाज उनकी सफलता के लिए ईश्वर से कामना कर रहे हैं।
परौंख में कराए काफी काम
कोविंद ने परौंख गांव में काफी काम कराए। इंटरलॉकिंग रोड के अलावा उन्होंने अंबेडकर पार्क बनवाया तथा चार सरकारी नलकूप लगवाए। गांव में झलकारी बाई इंटर कॉलेज की स्थापना कराई। साथ ही गांव से रोड तक डामरीकरण कराया व रोड पर गांव के नाम से गेट बनवाया है। बिहार का राज्यपाल बनने के बाद उनका गांव में ग्रामीणों व आसपास के लोगों द्वारा स्वागत किया गया था।

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