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दुनिया में सुख और शांति का स्थाई मार्ग योग: महंत शिवनाथ

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गोरखपुर, मुख्य संवाददाता

कटक उड़ीसा से आए महंत शिवनाथ महराज ने कहा कि योग ही मनुष्य को सुख और शांति का मार्ग दिखा सकता है। इस विचार को दुनिया के 200 से ज्यादा मुल्क स्वीकार करने लगे हैं। इसलिए जरूरी है कि योग की धरती गोरखपुर से योग को जनान्दोलन बना कर प्रचारित प्रसारित किया जाए।
महंत शिवनाथ महराज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बुधवार की सुबह 5.30 बजे से गोरखनाथ मंदिर के स्मृति भवन में योगाभ्यासियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 21वीं शताब्दी में भारत के जगत्गुरु बनने की यात्रा का यह एक कदम है। भारत की सनातन परम्परा और योग ही मानव सभ्यता को बचा सकती है। मनुष्य को सुख और शान्ति का स्थायी मार्ग दिखा सकती है। योग भारतीय मनीषियों की आध्यात्मिक चेतना का एक ऐसा प्रतिबिम्ब है जिसे प्रत्येक मानव उपासना पद्धतियों के बिना किसी विरोध के स्वीकार कर रहा है। यह शारीरिक, मानसिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक अनुशासन की ऐसी पद्धति है जिसके द्वारा मन और शरीर पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महायोगी गुरु गोरक्षनाथ की परम्परा के वाहक है। महायोगी गोरखनाथ योग संस्थान के प्रभारी योगाचार्य डॉ. चन्द्रजीत यादव कार्यक्रम में आए योगाभ्याशियों को योग का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए 21 जून तिथि इसलिए चुनी गई क्योंकि इस तिथि पर सूर्य की उपस्थिति पृथ्वी पर सबसे लम्बी अवधि तक रहती है। इस तिथि पर सूर्य की ऊर्जा पृथ्वी पर सबसे प्रखर रूप से होती है। डॉ. चन्द्रजीत यादव ने योगासन, प्राणायाम एवं अन्य यौगिक क्रियाओं का अभ्यास कराया। 8 बजे योगाभ्यास का यह आयोजन सम्पन्न हुआ। योगाभ्यासी एवं भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।  

‘‘ मै पिछले 5 वर्षो से मंदिर में योगाभ्यास के लिए आता हूं लेकिन पहली बार साप्ताहिक शिविर में शामिल हुआ। मैने तय किया है कि घर के सदस्यों के अलावा आस पड़ोस के लोगों को भी योग के लिए प्रेरित करूंगा। उन्हें शिक्षित करूंगा। ’’
सुभाष चंद्र जयसवाल, गोरखनाथ

‘‘मै 6 वर्षो से गोरखनाथ मंदिर में योग संबंधी कार्यक्रमों में शामिल होता रहा हूं। इस बार कुछ ज्यादा ही जानकारियां साप्ताहिक योग प्रशिक्षण के दौरान मिली। तकनीकी बारिकियां भी समझ में आई।’’
योगी मातानाथ, ढाका की ढाणी पीसांगन अजमेर

‘‘योग को हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। मैने इस शिविर में शामिल होकर अपना काफी ज्ञानवर्धन किया है। ऐसे कार्यक्रम साल में कई बार आयोजित किए जाने चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जागरूक हो।’’
डा. ममता आयुर्वेद चिकित्साधिकारी आयुष विभाग, निवासी सूरजकुंड
 

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  • Web Title:The permanent path of happiness and peace in the world Yoga: Mahant Shivnath
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