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Alert:सांप के डसने से रोज हो रही मौतें,सर्पदंश में ध्यान रखें ये बातें

प्रतीकात्मक तस्वीर

बारिश की वजह से गोरखपुर-बस्ती मंडल की नदियों में उफान आया है और गांवों से लेकर कस्बों तक जगह-जगह पानी जमा है। इस मौसम में अचानक से सांपों का आतंक फैल गया है। सांप के डसने की वजह से रोज जानें जा रही हैं। सोमवार को भी कुशीनगर के नेबुआ नौरंगिया के 12 साल के विक्की और गोरखपुर के झगहां क्षेत्र की आठ साल की काजल की मौत हो गई।

गनीमत है कि इस साल चार महीने पहले से स्वास्थ्य विभाग सतर्क था तो दोनों मंडलों के किसी जिले में एंटी स्नेक वेनम की कमी नहीं पड़ी है लेकिन सिस्टम की लापरवाही और हमारे दिमाग में सदियों से बैठा अंधविश्वास वैसा ही ही। नतीजतन सांप के डसने के बाद जो जानें बचाई जा सकती थीं वो भी नहीं बचाई जा सकीं। पेश है गोरखपुर-बस्ती मंडल के इन जिलों से हमारी खास रिपोर्ट-

गोरखपुर-

इस सीजन में सांप डसने (सर्पदंश) के खूब मामले आ रहे हैं। बीते एक पखवारे में सिर्फ गोरखपुर जिला अस्पताल में 80 लोग भर्ती हुए।  चार की मौत हो गई। जिन मरीजों को समय से एंटी स्नैक वेनम मिल गया उनमें से ज्यादातर की जान बच गई। मंडल में दो दर्जन लोगों की सांप डसने से मौत हो गई।

बरसात के सीजन में इन दिनों सर्पदंश के मामले बढ़ गए हैं। सोमवार को सहजनवां निवासी 35 वर्षीय धनमति देवी को सांप ने काट लिया। परिवारीजन उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। भतीजी बबिता ने बताया कि सुबह 10 बजे चाची खेत में घास काटने पहुंची। खेत में ही काले रंग का सांप था। उसने डस लिया। इसके बाद सीएचसी पर ले जाया गया जहां सांप काटने वाला इंजेक्शन खत्म था। सीएचसी से जिला अस्पताल लाया गया।

जिला अस्पताल में भर्ती हुए 80 मरीज

जुलाई में पहली तारीख से शुरू हुई बारिश के साथ ही सांप काटने के मामले बढ़ने लगे। रोजाना पांच से छह मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। ज्यादातर मरीज सीएचसी-पीएचसी से रेफर होकर आ रहे हैं। इस महीने अब तक 80 से अधिक मरीज इलाज करान आ चुके हैं। जिनमें चार की मौत हो गई। तीन मरीज तो मृत हालत में ही अस्पताल लाए गए।

झाड़फूंक के फेर में जा रही जान

सांप डसने पर पीड़ति को जल्द से जल्द नजदीक के अस्पताल लेजाना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। अंधविश्वास और अज्ञानता के फेर में कुछ लोग सांप काटने के बाद पीडि़त के इलाज के लिए झाड़फूंक का सहारा ले रहे हैं। ऐसे ज्यादातर मामलों में मरीज की जान खतरे में पड़ रही है। जिला अस्पताल के डा. बीके सुमन ने बताया कि झाड़फूंक से सांप काटने का इलाज नहीं हो सकता। यह कोरा अंधविश्वास है। इसमें पीड़ति की जान जाने का खतरा होता है।

सांप की 13 प्रजातियां हैं जानलेवा

सांप डसने से दुनियाभर में होने वाली मौतों की संख्या में भारत सबसे आगे है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर साल 83,000 लोग सांप के दंश का शिकार होते हैं और उनमें से 11,000 की मौत हो जाती है। मौत का सबसे बड़ा कारण है तुरंत प्राथमिक उपचार न होना। भारत में सांपों की लगभग 236 प्रजातियां हैं। इनमें से ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते। देश में जहरीले सांपों की 13 प्रजातियां हैं, जिनमें से चार बेहद जहरीले होते हैं- कोबरा (नाग), रस्सेल वाइपर, स्केल्ड वाइपर और करैत। देश में सबसे ज्यादा मौतें नाग या गेहुंवन व करैत के काटने से होती हैं।

सांप डस ले तो इन बातों को हमेशा रखें याद-

-पीडि़त की घबराहट दूर करने में उसकी मदद करें

-सांप के काटने वाली जगह पर कोई गहना पहने हों तो उसे उतार दें

-मरीज जूते पहना हो तो उतार दें, कपड़े सुविधाजनक हों तो न उतारें

-जख्म को धुल कर उसपर पट्टी बांध दें

- उसे फौरन नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं

-मरीज को बिल्कुल चलने न दें, क्योंकि मांसपेशियों की रगड़ से जहर तेजी से फैल सकता है

-मरीज को बगैर डॉक्टर के सलाह के कोई दवा न दें

यह न करें

सर्पदंश की जगह काटना, चूसना, दबाना बिल्कुल न करें

सर्पदंश की जगह के उपर रस्सी, डोरी या कपड़ा कसकर न बांधें

सर्पदंश की जगह पर जगह पर कट न लगाएं

वहां से दबाकर खून निकालने की कोशिश न करें

जिला अस्पताल  में एंटी वैनम वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक है। सर्प दंश की घटना में मरीजों को जिला अस्पताल या नजदीकी अस्पताल ले जाया जाए। 

डा. डीके सोनकर , एसआईसी, जिला अस्पताल

कुशीनगर-

विज्ञान के बढ़ते प्रभाव के बीच भी कुशीनगर में अब भी अंधविश्वास अपना जगह बनाए हुए है। सर्पदंश के मामले में अब भी तमाम लोग इलाज की बजाय झाड़फूंक को तरजीह देते हैं और अब तक तमाम लोगों की जान भी जा चुकी है।

इधर, बरसात शुरू होने के बाद सर्पदंश के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। जून माह में अकेले जिला अस्पताल में ही एंटी स्नेक वेनम की सौ फाइलें खर्च हो चुकी हैं। यानी 80 के करीब मरीज आ चुके हैं, क्योंकि अधिकतर केस में एक से दो डोज ही देना पड़ता है।

सर्पदंश के इलाज की व्यवस्था

जिला अस्पताल के स्टोर में इस समय 400 फाइल एंटी स्नेक वेनम हैं। जबकि इमरजेंसी में भी इसकी डोज रखी गई है। जुलाई माह शुरू होने के साथ ही प्रतिदिन जिला अस्पताल में तीन से चार सर्पदंश के मामले आ रहे हैं। वहीं सीएमओ स्टोर में 177 डोज रखे हैं और सभी सीएचसी व पीएचसी पर पांच से दस डोज भेजे गए हैं।

इन मामलों में तो अंधविश्वास ने ही ले ली जान

केस-एक

5 जून को खड्डा थाना क्षेत्र के ग्राम रामपुर गोनहा जंगल टोला निवासी कन्हई को खेत में हल चलाने के दौरान बिषैले सांप ने काट लिया। उसका इलाज कराने की बजाय परिवारीजन बिहार के रामनगर में उसकी झांडफूंक कराते रहे। जहां गरीबी व अंधविश्वास के चक्कर में उसकी जान चली गयी।

केस-दो

20 जून को खड्डा थाना क्षेत्र के लखुआ लखुई निवासी विरेन्द्र कुशवाहा के सात वर्षीय पुत्र अनूप को सांप ने काट लिया। कई जगह उसकी झांडफूंक होती रही। लेकिन वह ठीक नहीं हुआ तो उसका शरीर गर्म देखकर परिजन अन्धविश्वास के चक्कर में पड़कर उसका शरीर केले के डंठल में बांध नारायणी नदी में बहा दिये। इस उम्मीद में कि वह जीवित होकर लौट आएगा, लेकिन ऐसा न होना था और न हुआ।

केस-तीन

29 जून को हनुमानगंज थाना क्षेत्र के ग्राम रामपुर जंगल निवासी प्रभु के 10 वर्षीय पुत्र को खेलने के दौरान विषैले सांप ने डंस लिया। परिजन उसे अस्पताल ला रहे थे कि रास्ते में एक सोखा मिल गया। जिससे वह झाड़फूंक कराने लगे। दो घण्टे तक झाड़फूंक होने के बाद लडके की तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो परिजन उसे पीएचसी खड्डा में भर्ती कराये, जहां उसकी मौत हो गयी। इस मामले में डाक्टर का कहना था कि एक घंटा पहले बच्चा आया होता तो वह बच जाता।

केस-चार

2 जुलाई को नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के कुर्मी पट्टी के टोला मिश्रौली में खूबलाल की पत्नी नगीना देवी की मौत सर्प दंश से हो गयी। मेडिकल कालेज के डाक्टरों ने मृत भी घोषित कर दिया, लेकिन परिवारीजन लाश को लेकर तीन दिनों तक घूमते रहे। कई जगहों पर झाड़फूंक कराया और  थक हारकर अंतिम संस्कार किए।

अंधविश्वास में पड़ना, जान जोखिम में डालना

कुशीनगर के सीएमओ डा. अखिलेश कुमार कहते हैं कि इस मौसम में सर्पदंश के मामले अधिक आते हैं। जिला अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर सर्पदंश के इलाज की पूरी व्यवस्था है। सर्पदंश के मामले की जानकारी होते ही पीड़ति को तत्काल अस्पताल लाना चाहिए, क्योंकि झाड़फूंक के चक्कर में पड़ने पर मरीज खतरे में पड़ जाता है।

संतकबीरनगर-  

बरसात के साथ ही जनपद में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गई हैं। इनके काटने से अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। दर्जनों लोग इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर पहुंचे हैं। जिला अस्पताल सहित सभी सीएचसी पर दवा उपलब्ध है। जिला अस्पताल में 120 तो सीएचसी पर 20 से तीस वायल तक दवा वर्तमान समय में मौजूद है।

ये हुए मौत के शिकार  

तिघरा गांव निवासी पिल्लू (उम्र सात वर्ष) छह जुलाई को दरवाजे के सामने खेल रहा था। उसी दौरान झाड़ी से निकले जहरीले सांप ने उसे डंस लिया। परिवार के लोगों ने सीएचसी हैंसर पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

प्रजापतिपुर गांव निवासी नाजिर अली का पुत्र 5 जुलाई की सुबह शौच के लिए घर से निकल रहा था। गांव के चौराहे पर स्थित एक नल पर जैसे ही पानी भरने के लिए झुका कि जहरीले सांप ने उसे डस लिया। परिवार के लोगों ने आनन फानन में सीएचसी हैंसर पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार वालों का जी नहीं माना तो उसे लेकर मऊ जनपद स्थिति सोखा के पास पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

उमरिया पाण्डेय निवासी चन्द्रभान को सांप ने डंस लिया था। उन्हें परिजन लेकर सीएचसी पहुंचे पर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

परसहर गांव निवासी शारदा देवी घर में काम कर रही थीं। इसी दौरान उन्हें सांप ने काट लिया। परिजन लेकर अस्पताल पहुंचे। इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई थी। 

क्या कहते हैं जिम्मेदार

सांप काटने से बचाव के लिए जरूरी इंजेक्शन सभी अस्पतालों में भरपूर मात्रा में मौजूद है। सर्पदंश होने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल में पहुंचकर इलाज शुरु करा देना चाहिए। जिससे पीडि़त की जान बचाई जा सके।

डाक्टर विमलचन्द्र श्रीवास्तव, सीएमओ

देवरिया-

बरसात में शुरू होने और नदी, नालों का पानी बढ़ने के साथ ही सर्प दंश की घटनायें भी बढ़ने लगी हैं। सांप के काटने से अब-तक तीन की मौत हो चुकी है। इसमें एक व्यक्ति की न जानने के चलते और दो की झाड़-फूंक कराने के चलते समय से इलाज न होने से मौत हो गयी। जबकि सांप काटने के बाद समय से अस्पताल पहुंचने के चलते डेढ़ दर्जन की जान बच गयी। जिला अस्पताल और पीएचसी,सीएचसी पर भरपूर मात्रा में सांप काटने पर लगने वाला वायल उपलब्ध है।

केस-एक

जिले के रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के कौलाछापर गांव के समीर पुत्र हामिद 9 वर्ष पिछले सप्ताह नहर में नहाने गया था। वह घर लौटा तो उल्टी होने लगी और शरीर पीला पड़ने लगा। कुछ लोगों ने नहाने के दौरान सांप काटने की आशंका व्यक्त की। इस पर परिजन इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की जगह झाड़ फूंक कराने लगे। वे जिले के अलावा, गोरखपुर और आजमगढ़ के भी कुछ स्थानों पर लेकर गए। झाड़-फूक के दौरान ही मासूम की मौत हो गई।

केस-दो

खुखुन्दू थाना क्षेत्र के वान टोला निवासी रविन्द्र यादव 32 वर्ष एक ईट भट्ठे पर चौकीदार थे। पिछले सप्ताह खेत में खाद छिंटते समय उन्हे सांप ने डंस लिया। परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो वह उन्हे झांड़- फूंक कराने बांकी लेकर चले गये। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां पर डाक्टरों ने रविन्द्र को मृत घोषित कर दिया।

केस- तीन

जून माह में खोरीबारी निवासी रविन्द्र राय को हैण्डपंप पर हाथ धोने के दौरान सर्प ने डंस लिया। लेकिन वह देख नहीं सके और पैर में किसी लकड़ी से खरोच समझ लिये। इसी चक्कर में काफी समय हो गया और जब उनकी आंख झपकने लगी तब परिजनों को सर्प के काटने की आशंका हुई। वह जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सांप के काटने की पुष्टि हुई।

सिद्धार्थनगर-

बरसात शुरू होने के साथ ही चारो तरफ पानी-पानी हो गया है। इससे सांप अपने बिल से बाहर आकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पहले सर्पदंश पर लोग डॉक्टर की बजाए सोखा-ओझा के पास जाना जरूरी समझते थे पर पिछले दो वर्षों में इसमें तेजी से बदलाव आया है। अब लोग सीधे डॉक्टर के पास पहुंच रहे हैं। पिछले सात माह के भीतर जिला अस्पताल में सर्पदंश से पीडि़त 148 लोग आए। इनमें से सिर्फ तीन की मौत हुई है। जिला अस्पताल में चार माह पहले ही पर्याप्त मात्रा में एन्टी स्नैक वेनम उपलब्ध करा दिया गया है।

24 घण्टे में पांच लोग हुए सर्पदंश के शिकार

जिला अस्पताल में रविवार की शाम से सोमवार दोपहर दो बजे तक सर्पदंश के शिकार पांच लोग आए। पांच लोगों में एक चार वर्ष का बच्चा भी था। सभी को बचा लिया गया है।

इस बार चार माह पहले ही आ गया था एन्टी स्नेक वेमन

प्रशासन इस बार अलर्ट रहा, इसलिए चार माह पहले ही एन्टी स्नेक वेनम मंगा लिया था। अभी पर्याप्त मात्रा में एन्टी स्नेक वेनम जिला अस्पताल में उपलब्ध है। इसके अलावा पीएचसी व सीएचसी पर भी एन्टी स्नेक वेनम उपलब्ध है।
 

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