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श्रीनगर ताल पुल पर बढ़ा पानी का दबाव

फरेंदा-नौतनवा तहसील क्षेत्र को जोड़ने के लिए श्रीनगर ताल पर पुल का निर्माण 1936 में कराया गया। लेकिन बाद के दिनों में उपेक्षा के कारण पुल जर्जर हो गया। इस बीच लगातार 3 दिनों तक हुई बारिश से श्रीनगर ताल का जलस्तर बढ़ गया है। पानी का दबाव पुल पर भी पड़ा है। ऐसे में अगर बारिश जारी रही तो पुल के जर्जर पायों के पानी में बहने की आशंका बढ़ गई है। ऐसा हुआ तो करीब दस गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाएगा।  
श्रीनगर पुल से बृजमनगंज, बहदुरी, लेहड़ा, मोहनापुर, रानीपुर, लक्ष्मीपुर, कोल्हुई तक के लोग आते जाते हैं। शरद ऋतू में ताल में विदेशी पक्षियों का बसेरा भी होता है। लेकिन आज पुल के सभी पाए जर्जर हो गए हैं। किसी तरह लोग पैदल और बाइक से आ-जा रहे हैं। फरेंदा और नौतनवा, दो विधानसभा को जोड़ने वाले श्रीनगर पुल की लंबाई 40 मीटर है। इसमें 20 फाटक लगे हैं। इन्हीं से पहले श्रीनगर ताल में पानी संरक्षित कर फिर उसे चौतरवां, मदरहना, मध्यनगर, मैनहवा व लेहड़ा माइनर की मदद से सिंचाई की जाती थी। इस बीच उपेक्षा के कारण पुल जर्जर हो गया। 20 मई 2016 से 24 मई तक पुल के निर्माण के लिए जिला पंचायत सदस्य सुरेश चंद साहनी, गयासुद्दीन, जुगानी, ओमप्रकाश, मोहन प्यारे ने ताल के किनारे ही धरना दिया। बात नहीं बनी तो जल सत्याग्रह भी शुरू कर दिया। मामला लखनऊ तक पहुंचा। डीएम के निर्देश पर परियोजना निदेशक ऋषिमुनि उपाध्याय और सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने मौके पर पहुंच पुल निर्माण के लिए दो करोड़ 62 लाख रुपये स्वीकृत होने की बात कह धरना समाप्त करवाया। लेकिन तब से आज तक कोई काम नहीं हुआ।    

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  • Web Title: Increased water pressure on Srinagar Pool bridge
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