मंगलवार, 16 मार्च, 2010 | 21:35 | IST
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चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि, यानी 16 मार्च से वासंतिक नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। इसी दिन से नववर्ष यानी नव संवत्सर की शुरुआत होती है। जानें नवरात्रों का तकनीकी तौर पर क्या है महत्त्व। आगे पढे
 
भारतीय संस्कृति सत्कार और सेवा की संस्कृति है। विनम्रता के साथ प्राणि मात्र की सेवा करना और उसको सम्मान देना भारतीय आध्यात्मिक दृष्टि है। आगे पढे
 
बुद्धिमान व्यक्ति व्यावहारिक (बाह्य) जीवन और आध्यात्मिक (आंतरिक) जीवन को सुचारु ढंग से जीने के लिए चार विधियों का प्रयोग करते हैं। उन विधियों को साम, दाम, भेद और दंड कहते हैं। आगे पढे
 
मनुष्यों ने देखा कि वह जो कुछ पाते हैं, उसके बाद देखते हैं कि यह तो बहुत थोड़ा है, इससे अधिक चाहिए। फिर जब वह भी मिला तो फिर देखते हैं कि उन्हें वह भी थोड़ा लगा। आगे पढे
 
आदमी को निरन्तर विस्मरण है। जो महान है विस्मृत हो जाता है, और जो क्षुद्र हो चौबिस घण्टे याद रहता है। परमात्मा को याद रखना पड़ता है, वासना को याद रखना नहीं पड़ता है, वह याद रहती है। आगे पढे
 
 
श्रीज्वालामुखी मंदिर की मान्यता 51 शक्तिपीठों में सर्वोपरि है। महामंदिर में मां भगवती के दर्शन ज्योति के रूप में होते हैं। पर्वत की चट्टान से, 9 अलग-अलग जगहों पर अखंड ज्योति बिना ईंधन के स्वत: प्रज्जवलित हैं। आगे पढे
 
ध्यान से उपजा प्रेम ही शाश्वत आनंद देता है और जो शाश्वत से जुड़ जाता है, वह शाश्वत ही बन जाता है। इसलिए प्रेम को हमने ईश्वर कहा है। नाद ब्रह्म ध्यान की एक विधि है। आगे पढे
 
यह ‘पर्व’ शब्द वही है जिससे पर्वत शब्द बना है। जिस तरह पर्वत श्रृंखला में उत्तरोत्तर चढ़ाई चढ़नी होती है उसी तरह ‘पर्व’ का निहितार्थ है संवेदना को, धैर्य एवं उदात्त भाव से ऊँचाई की ओर ले जाना, ऊर्ध्वमुखी होना। आगे पढे
 
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वैज्ञानिकों के मुताबिक आज भी ऐसे सांप हैं जिनके शिकार का तरीका डायनासोर की इस घटना से मिलता-जुलता है। पायथन नाम का सांप भी कुछ इसी अंदाज में शिकार करता है।
वैदिक संस्कृति में यज्ञ की प्रधानता है और यज्ञ का दूरगामी अर्थ है- समाज कल्याण के व्यक्तिगत और साझा उद्यम.. और सरल अर्थ है-अग्निकर्म। आगे पढे
 
हरिण्यकष्यप स्थूलता का प्रतीक है। प्रह्लाद भोलेपन, श्रद्धा एवं आनंद की प्रतिमूर्ति है। चेतना को केवल भौतिकता के प्रेम तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता। आगे पढे
 
सूफी संत सूफीमत का पैगाम फैलाने दुनिया के जिस भाग में गए, उन्होंने बिना किसी धार्मिक पक्षपात और भेदभाव के वहां के रीति-रिवाजों, अकीदों, रस्मों, त्योहारों और भाषा को अपनाया। आगे पढे
 
उत्तर भारत के लोग शीत की जड़ता या जाड्य भाव को शेष कर मानो वसन्त की सक्रियता और सजीवता में प्राण की पुन: प्राप्ति करना चाहते हों। आगे पढे
 
पैसा आदमी के बड़े आविष्कारों में एक है। उसकी निंदा करने की जरूरत नहीं है। बस, उसे पकड़िए मत। पकड़ बुरी बात है। आप जितना पकड़ते हैं उतनी दुनिया गरीब होती जाती है। आगे पढे
 
प्रत्येक साधन या चीज जिसका माप किया जा सके, माया है.. और धन ऐसा ही एक साधन है। जब प्रेम, स्नेह, सत्य, विवेक और स्वयं जीवन को भी मूल्यांकित कर दिया जाता है आगे पढे
 
अथर्ववेद में प्रगतिशीलता एवं कर्मशीलता के लिए एक बहुत सुन्दर मंत्र आया है। ऋषि कहते हैं कि हे मनुष्य! तुम सौ हाथों वाले होकर धन संग्रह करो। मगर साथ ही हजार हाथ वाले होकर धन का वितरण करो। आगे पढे
 
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