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सोमवार, 27 जून, 2016 | 14:58 | IST
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जीने कि राह
जेल में एक बौद्ध भिक्षु
जनकवि नागार्जुन का जन्मदिवस 30 जून को पड़ता है। नागार्जुन की कविता जैसी बहुरंगी है, वैसा ही बहुआयामी जीवन भी ‘यात्री’ नागार्जुन ने जीया है।  08:36 PM
नजरिये पर नजर
लैंगिक असमानता हमारे समाज की सबसे मारक समस्याओं में से एक है। इसकी मार सबसे ज्यादा लड़कियों-महिलाओं पर पड़ती है, गोकि इसका खामियाजा अंतत: पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। 08:33 PM
क्यों खाएं सोयाबीन
पिछले कुछ सालों से बाजार में सोया उत्पादों की भरमार है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यह एक सुपरफूड है, जो दिल और हड्डियों के लिए फायदेमंद है।  11:05 PM
 
धर्मक्षेत्रे
जिस परिवार में विपदा आई हो उसके साथ इस संकट की घड़ी में जरूर  खड़े हों और तन, मन, धन से सहयोग करें लेकिन मृतक भोज का बहिष्कार करें।
 
पतंजलि कहते हैं कि हम तन-मन के स्तर पर जी रहे हैं, जबकि हमें जाना है चेतन में। तन-मन के साथ हमारे तादात्म्य को तोड़ कर उसे चेतन से जोड़ने में चंचल मन की वृत्तियां बाधक हैं।
 
नंदन विज्ञान (सौंदर्य विज्ञान) पर आधारित नांदनिक बोध (सौंदर्य का बोध) जब किसी प्रबुद्ध मनुष्य के संस्पर्श में आता है, तब उस मानस अनुभूति को 'मिस्टिसिज्म' कहा जाता है और जब यह मिस्टिसिज्म मानवीय गरिमा के चरम स्तर पर पहुंचता है, तब उसे अध्यात्म कहा जाता है।
 
आजकल जैसे-जैसे जीवनशैली के आधुनिक बदलाव और दिनचर्या में तेजी हमारे जीवन का हिस्सा बनती जा रही है, वैसे-वैसे जीवन की गहराई को जानने की उत्सुकता भी बढ़ी है।
 
मेस्सी ने लिया संन्यास इन सभी हार के लिए मेस्सी को बहुत आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है। उनके लिए यहां तक कहा गया कि वो देश की जर्सी   को महसूस ही नहीं करते और ना ही राष्ट्रीय गान गाते हैं। इन सभी हार के लिए मेस्सी को बहुत आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है। उनके लिए यहां तक कहा गया कि वो देश की जर्सी को महसूस ही नहीं करते और ना ही राष्ट्रीय गान गाते हैं। अन्य फोटो
शब्द
जनकवि नागार्जुन का जन्मदिवस 30 जून को पड़ता है। नागार्जुन की कविता जैसी बहुरंगी है, वैसा ही बहुआयामी जीवन भी ‘यात्री’ नागार्जुन ने जीया है।
 
लैंगिक असमानता हमारे समाज की सबसे मारक समस्याओं में से एक है। इसकी मार सबसे ज्यादा लड़कियों-महिलाओं पर पड़ती है, गोकि इसका खामियाजा अंतत: पूरे समाज को भुगतना पड़ता है।
 
22 जून को कवि केदारनाथ अग्रवाल की पुण्यतिथि है। केदारनाथ अग्रवाल हिंदी की प्रगतिशील धारा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण कवियों में से हैं। उनकी कविता में प्रकृति और ग्रामीण जीवन के गीतात्मक चित्रों के साथ जीवन की कठोर वास्तविकताएं जुड़ी हुई हैं।
 
मेरी जीवन गाथा सुप्रसिद्ध लेखक आर.के. नारायण की आत्मकथा ‘माई डेज’ का हिंदी अनुवाद है। बचपन से लेकर लेखक बनने तक के कालक्रम में आर.के. नारायण के जीवन से जुड़े तमाम किस्से पुस्तक में समेटे गए हैं।
 
अपनी याद की मद्धम रोशनी में कुछ हस्तियों व घटनाओं की तलाश करना चाहता हूं, जिन्होंने मेरी जिंदगी को प्रभावित किया। सबसे पहले और मेरे बचपन में सबसे अधिक नानाजान ख्वाजा सज्जाद की शख्सियत ने मुझे प्रभावित किया।
 
धर्म और राजनीति के आपसी संबंधों के बारे में अक्सर बात होती रही है। इस सन्दर्भ में सत्ता एक प्रमुख विषय रहा है। माना जाता रहा है कि धर्म राजनीति को उसके दायित्व से भटकने से रोकता है।
 
कविता लिखने की ओर मेरी रुचि बराबर रही है, लेकिन लिखा है मैंने कम। जिसे साहित्य-क्षेत्र में उतरना कहते हैं, वह मैंने कभी नहीं किया, साहित्य से एक पाठक का सम्पर्क रहने से कभी-कभी गद्य में लिखा करता था।
 
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