मंगलवार, 01 सितम्बर, 2015 | 05:19 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
तरक्की
धर्मक्षेत्रे
खुशी का पैगाम ये छोटी-छोटी बातें
हम सभी अकसर कुछ बड़ा, कुछ चुनौतीपूर्ण करने के रोमांच को जीने की कोशिश में लगे रहते हैं। लेकिन इसी दौरान हमारी नजर इस बात से हट जाती है कि जीवन एक के बाद एक होने वाली छोटी-छोटी बातों और पलों से मिलकर ही बनता है। 07:50 PM
अपनों के लिए निकालें समय
बेटा: पापा, क्या आप मुझे 3000 रुपये उधार दे सकते हैं? पापा (गुस्से में): तुम पैसे लेने के लिए ही ये बेवकूफी भरे प्रश्न कर रहे थे। मैं तुम्हें फालतू खर्च के लिए पैसा नहीं दूंगा। जाओ और सो जाओ। मैं इसलिए मेहनत नहीं करता। बेटा चुपचाप कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लेता है। 07:47 PM
हर बार वाह-वाह जरूरी तो नहीं!
खुद को और अपनी कमियों को ईमानदारी से देख पाना आसान नहीं होता। इसलिए दूसरे के द्वारा आपके काम के बारे में कुछ कहे जाने पर उसमें सच देखने की कोशिश हमें मानवीय बनाती है, खुद के करीब ले जाती है।  07:43 PM
 
धर्मक्षेत्रे
लोग अकसर कृष्ण पर अनगिनत स्त्रियों से प्रेम रचाने पर सवाल उठाते हैं। लेकिन कृष्ण हमेशा से ब्रह्मचारी थे। ब्रह्मचर्य का अर्थ होता है ईश्वर के बताए रास्ते पर चलना।
 
पूरे मधुबन में कदम्ब का वृक्ष कृष्ण को बहुत प्रिय था। यह अकारण न था। इसकी कई विशिष्टताएं हैं। यह पेड़ बहुत जल्दी बढ़ता है। वर्षा ऋतु में इस पर फूल आते हैं।
 
मर्डर बना मिस्ट्री 25 अप्रैल की सुबह लगभग 5-6 बजे शव को लेकर घर से निकले और पेण के पास उसे   जलाकर ठिकाना लगाया गया था। राहुल मुखर्जी ने भी पुलिस को पूछताछ में बताया था   कि शीना को छोड़ने के लिए वह बांद्रा गया था। शीना ने उससे डिनर में शामिल होने के   लिए कहा था। लेकिन वह इस वजह से शीना के साथ डिनर पर नहीं गया क्योंकि इंद्राणी   उसे पसंद नहीं करती थी। 25 अप्रैल की सुबह लगभग 5-6 बजे शव को लेकर घर से निकले और पेण के पास उसे जलाकर ठिकाना लगाया गया था। राहुल मुखर्जी ने भी पुलिस को पूछताछ में बताया था कि शीना को छोड़ने के लिए वह बांद्रा गया था। शीना ने उससे डिनर में शामिल होने के लिए कहा था। लेकिन वह इस वजह से शीना के साथ डिनर पर नहीं गया क्योंकि इंद्राणी उसे पसंद नहीं करती थी। अन्य फोटो
शब्द
शैलेन्द्र ने रेणु से कहा, 'वे लोग फिल्म का अंत बदलकर हीरामन-हीराबाई को मिला देना चाहते हैं। यदि मुझे बम्बइया फिल्म ही बनानी होती तो 'तीसरी कसम' जैसे विषय को लेता ही क्यों?' शैलेन्द्र का रोम-रोम कर्ज में डूबा हुआ था।
 
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में इस्लाम धर्म और इसे मानने वालों को लेकर अनेक भ्रम फैले हुए हैं। ऐसे में प्रोफेसर अख्तरुल वासे की यह किताब इस्लाम से जुड़ी बुनियादी जानकारी देने की एक प्रासंगिक कोशिश है।
 
सर्वाधिक पढ़ी
गई ख़बरें
सर्वाधिक पसंद
की गई ख़बरें
सर्वाधिक पसंद
की गई तस्वीरे
क्रिकेट स्कोरबोर्ड