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सख्ती: डोपिंग रोकने के लिए खिलाड़ियों के शरीर में लगेगी चिप!

सांकेतिक तस्वीर

खेलों को डोपिंग के डंक से आजाद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ के सीईओ माइक मिलर ने खिलाड़ियों के शरीर में माइक्रोचिप लगाने का सुझाव दिया है। उनका दावा है कि इस चिप के माध्यम से खिलाड़ियों द्वारा ली जाने वाली प्रतिबंधित दवाओं की पहचान की जा सकती है। 

इसी हफ्ते खेलों में डोपिंग को रोकने के लिए आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने यह सुझाव रखा। मिलर ने कहा, ‘कुछ लोग इस सुझाव से इत्तेफाक नहीं रखते होंगे। मगर हम ‘पशु’ प्रेमी हैं और हम अपने पालतू पशुओं के शरीर में इस चिप को लगवाने के लिए तैयार हैं। तो हम भला अपने शरीर में इसे क्यों नहीं लगा सकते?’ उनका यह भी दावा है कि इस प्रणाली परीक्षण के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रणाली के माध्यम से हम कुछ समय के दौरान ही शरीर में प्रतिबंधित दवा का पता लगा सकते हैं जबकि चिप के माध्यम से हमें कभी भी जानकारी मिल सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह उनके निजी विचार हैं। 

विरोधियों ने निजता का उल्लंघन बताया :
हालांकि माइक मिलर के इस सुझाव को बहुत से लोगों ने नकारते हुए इसे निजता का उल्लंघन माना है। ब्रिटेन की एंटी डोपिंग संस्था की सीईओ निकोल स्टेपसीड का कहना है कि माइक्रोचिप्स हमारे खिलाड़ियों की निजता का उल्लंघन है। हम बेहतर परिणाम के लिए तकनीक की मदद लेने के पक्षधर हैं, लेकिन हम इसकी गारंटी कैसे दे सकते हैं कि इसका दुरुपयोग नहीं होगा। 

अभी कहां इस्तेमाल हो रही :
स्वीडन की एक फर्म ‘एपिकसेंटर’ ने इसी साल अप्रैल में अपने कर्मचारियों के शरीर में चावल के दाने के बराबर माइक्रोचिप लगवाई थी। इसके जरिए कर्मचारी कार्ड स्वाइप करना, दरवाजा खोलना, प्रिंट निकालना और कैंटीन में खाने-पीने का सामान तक खरीद सकते हैं। इस चिप को लगवाने वाले कर्मचारियों के लिए कंपनी अलग से पार्टी का भी आयोजन करती है। 

क्या है वर्तमान प्रणाली :
--वर्तमान प्रणाली ‘एडम्स वेयरअबाउट सिस्टम’ कहलाती है
--इसके जरिए खिलाड़ी की दिनचर्या का डाटा इकट्ठा किया जाता है 
--टूर्नामेंट का कार्यक्रम, रात में ठहरने की पूरी जानकारी एंटी-डोपिंग एजेंसी को देनी होती है 
--खिलाड़ियों को सुबह 5 बजे से रात 11 बजे के बीच 60 मिनट का स्लॉट देना होता है 

भारत में डोपिंग का डंक 
--100 एथलीट औसतन हर साल डोप टेस्ट में फेल होते हैं भारत में 
--70 फीसदी मामले एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती से जुड़े 
--852 एथलीट डोप टेस्ट में फेल हुए 2009 से जुलाई, 2017 तक 
--176 खिलाड़ी दोषी पाए गए थे 2012 में 
--2014 में भारत डोपिंग के मामले में रूस और इटली के बाद तीसरे नंबर पर था
--266 खिलाड़ी ट्रैक एंड फील्ड से प्रतिबंधित किए गए 
--181 वेटलिफ्टरों पर भी इस दौरान प्रतिबंध लगाया गया 

डोपिंग में रूस सबसे बदनाम 
2016 में बीजिंग ओलंपिक (2008) और लंदन ओलंपिक (2012) के सैंपलों की अत्याधुनिक तकनीक के जरिए फिर से जांच की गई। इसमें कई खिलाड़ी पॉजीटिव पाए गए। 
--19 मामलों के साथ रूस सूची में सबसे ऊपर रहा 
--26 मामले वेटलिफ्टिंग के क्षेत्र में पाए गए 
--18 खिलाड़ी ट्रैक एंड फील्ड में पॉजीटिव मिले 
--31 महिलाएं और 18 पुरुष डोप टेस्ट में फेल हुईं इस दौरान 
--29 पदक वापस लिए गए 2012 के लंदन ओलंपिक विजेताओं से 
--4 पदक वापस लिए गए रियो ओलंपिक के विजेताओं से 
--2016 में रूस की टेनिस स्टार मारिया शारापोवा डोप टेस्ट में पॉजीटिव पाई गई। 15 महीने का प्रतिबंध लगा।  

ये खिलाड़ी प्रतिबंधित दवा के दोषी पाए गए 
नरसिंह यादव (कुश्ती) : भारतीय पहलवान को रियो से ठीक पहले रोका गया 
प्रियंका पवार : एशियन गेम्स में स्वर्ण विजेता पर 8 साल का प्रतिबंध लगा 
मारिया शारापोवा (टेनिस) : रूसी खिलाड़ी पर 15 महीने का बैन लगा 
मरियन जोंस (एथलेटिक्स) : अमेरिकी स्टार को अपने 3 स्वर्ण गंवाने पड़े  
लांस आर्मस्ट्रांग (साइक्लिंग) : अमेरिकी स्टार डोप टेस्ट में फेल हुए 

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