#चंपारण के सौ साल

10 अप्रैल, 1917 को पहली बार महात्मा गांधी बिहार आए थे। इस इस तारीख को इसके ठीक सौ साल पूरे हो रहे हैं। बिहार सरकार भी गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह की सौवीं वर्षगांठ मनाने जा रही है। दरअसल महात्मा गांधी उस समय एक नील के खेतिहर के बुलावे पर बांकीपुर स्टेशन पहुंचे थे अब बांकीपुर को पटना के नाम से जाना जाता है। उस समय अंग्रेजों द्वारा जबरन नील की खेती कराई जा रही थी। स्थानीय किसानों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए गांधीजी ने आंदोलन किया। इस आंदोलन से न सिर्फ नील के किसानों की समस्या का त्वरित हल हुआ, बल्कि सत्य, अहिंसा और प्रेम के संदेश ने फिरंगियों के विरुद्ध भारतीयों को एकजुट किया।

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जब पत्नी ने की प्लाजो की जिद...

जब पत्नी ने प्लाजो की जिद की।

पति ने पिताजी का 36 इंच मोहरी का पायजामा रंगवा
कर दे दिया।

पत्नी खुशी जाहिर करते हुए नहीं थक रही।

पिताजी पाजामा ढूंढते नहीं थक रहे.....