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फालतू पेड़

First Published:19-04-2017 12:35:28 AMLast Updated:19-04-2017 12:35:28 AM

सोशल मीडिया से

कड़ी गर्मियों के दिन थे। दो दोस्त एक नीम के पेड़ के नीचे जा बैठे। कुछ देर बैठने के बाद एक ने दूसरे से कहा, ‘दोस्त, यह पेड़ तो एकदम बेकार है। इस पर कोई फल नहीं आता।’ उसकी हां में हां मिलाते हुए दूसरे ने कहा, ‘हां यार! इस पेड़ पर कोई फूल नहीं आता। यह बिल्कुल फालतू है।’ उसी पेड़ की छांह में एक और शख्स बैठा था। वह उन दोस्तों की बातों को सुन रहा था। उसे पेड़ के बारे में इस तरह बातें करना खराब लगा। पहले तो उसने खुद को किसी तरह चुप रखा। आखिर में उससे रहा नहीं गया। उसने कहा,‘भाइयो किसी पेड़ के बारे में इस तरह नहीं सोचना चाहिए।’

दोस्तों ने उखड़ते हुए पूछा, ‘तो फिर किस तरह सोचना चाहिए।’ वह बोला, ‘सुनिए, आप इस पेड़ की छांव में बैठे हैं, उसके बावजूद आप कह रहे हैं कि इस पेड़ का कोई मतलब नहीं है। यह भी कोई बात हुई?’ दोस्तों ने उसकी तरफ अजीब निगाहों से देखा। तब उसने कहा, ‘भाइयो, यह पेड़ आपको क्या नहीं देता इसकी बजाय यह देखना चाहिए कि वह आपको अभी दे क्या रहा है?

भिखारी की मस्ती
कुछ सोचते हुए शेख सादी चले जा रहे थे। अचानक उनकी नजर एक भिखारी पर पड़ी। वह सड़क के एक किनारे बैठा हुआ था। अपने में ही मगन था। कोई उदासी उसके चेहरे पर नहीं थी। उन्हें भिखारी को देख कर हैरत हुई। वह सोचने लगे कि मेरे पास तो बहुत कुछ है। फिर भी मैं उदास रहता हूं। इसके पास कुछ भी नहीं है। न मकान है। न कपड़ा है और न उसे भरपेट खाना ही मिलता है। फिर यह तो विकलांग भी है। तब यह मस्त क्यों है? आखिर इसकी वजह क्या है? वह सोचते रहे। फिर उनसे रहा नहीं गया। वह भिखारी के पास पहुंचे। उन्होंने पूछा, ‘तुम्हारी हालत इतनी खराब है। फिर भी तुम इतने मस्त क्यों हो?’ भिखारी ने कहा, ‘मैं तो इस तरह जिंदगी को नहीं देखता। मैं सोचता हूं कि अगर मेरे पैर नहीं हैं तो क्या हुआ? खुदा ने मुझे और बहुत कुछ तो दिया है। मेरे पास दिमाग तो है। जिस्म के और हिस्से तो हैं। तब मुझे दिक्कत नहीं होती।’
शेख सादी समझ चुके थे कि उसकी मस्ती का राज क्या है।

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