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मौसम ने क्या गुनाह किया?

वैसे तो बारहों महीने अलग-अलग मौसमों की खुमारियों में जीते हैं, पर जब जो मौसम आता है, उसका रस लेना नहीं जानते। गर्मियों में हम सर्दियों को बेहतर बताते हैं और सर्दियों में गर्मियों को याद करते हैं। क्यों न इस सोच को बदला जाए...
गर्मियां जल्दी आ गईं और भीषण पड़ने भी लगीं। अपने आसपास सुबह से शाम तक लोगों को यह कहते हुए सुनना, इतनी गर्मी में कैसे जिएंगे, इससे तो अच्छा होता सर्दियां ठहर कर जातीं, उफ पसीना, डिहाइड्रेशन, बाहर जाना मुहाल, कैसे बीतेंगे ये दिन, अजीब लगता है। पिछले साल भी गर्मियां आई थीं और जितने दिन उसके रहने का समय है, उतने दिन रही। हर साल आती है, तो फिर हम इस मौसम को जीने के बजाय साल के दूसरे मौसमों में क्यों गुम रहते हैं?

द ग्लास केसल की लेखिका जेनेट वाल्स कहती हैं, ‘गर्मियों का एक फायदा तो यह होता है कि आपको पूरा दिन लिखने के लिए रोशनी की कमी नहीं रहती।’
इस बात को ओशो ने भी रेखांकित करते हुए कहा था-‘हमारे पास जिस समय जो चीज है, उसे पाने की कोशिश कीजिए। यह आपको आशावादी बनाएगा। आज में अपने आपको देखना, आज जो हमें दे रहा है उसके अनुसार जीना हमारी ताकत है, कमजोरी नहीं।’

बढ़ते तापमान और चिपचिपे मौसम में शिकायतों का अंबार लगाने के बजाय यह देखिए कि यह मौसम फलों के राजा आम का भी मौसम है। इस मौसम में ठंडे पानी से नहाने में जैसा अनुभव होता है, दूसरे किसी मौसम में नहीं होता। गर्मियां अपने साथ छुट्टियां भी लाती हैं। अमेरिका की बच्चों और किशोरों की लोकप्रिय लेखिका जैनी हैन ने एक किताब लिखी है, ‘द समर आई टन्र्ड प्रेटी।’ उन्हें लगता है कि गर्मी के मौसम में कोई जादुई बात है। आप अपने पुराने स्किन को तज कर एक नया रूप धरते हैं। ठंड में अवसाद है, बरसात में करुणा है, गर्मी में उल्लास है। पूरे चमकते सूरज का उल्लास।

हमारे यहां भी इसी मौसम में लोग छुट्टियां मनाने अपने गांव-घर की तरफ लौटते हैं, पहाड़ों में जाते हैं, नई बातें सीखते हैं, नए-पुराने लोगों से मिलते हैं। बचपन की गर्मी की छुट्टियों में सितारों भरी रातें और दादी-नानी की कहानियां हमारी प्रिय यादों में से होती हैं।  पसीने से तर-बतर, भागते-दौड़ते बर्फ के गोले का स्वाद भी भूलने वाला नहीं होता। 

रूस के नाटककार और लेखक चेखव ने तो यहां तक कहा था कि खुश होने का कोई मौसम नहीं होता। आप जब खुश होते हैं तो यह नहीं देखते कि यह कौन सा मौसम है। इस मौसम का बेपरवाह आलसपन उन्हें रचनात्मक बनाता था।

ठंडक दिमाग में है
- गर्मियों को कोसने के बजाय ऐसा कुछ करें, जिससे आपको सुकून मिले। गर्मियों में अपना खानपान बदलें। दही के बजाय मसाला छाछ या लस्सी पिएं। नीबू की शिकंजी, आम का पना, बेल का शर्बत, जलजीरा स्वाद के साथ आपको शीतलता भी देगा।
- गर्मियों की सुबह और रातों का सोने के बजाय व्यायाम, स्विमिंग और दूसरे शौकों को पूरा करने के लिए करें। दिन भर चुस्त रहेंगे।
- आप अगर ऐसा कोई काम करना चाहते हैं, जिसका रिश्ता सूरज की रोशनी से है, बड़ी, पापड़ बनाने के अलावा, तो इस मौसम का फायदा उठाएं। मन में यह बात कतई ना लाएं कि आप यह खास काम इसलिए नहीं कर पा रहे कि बेहद गर्मी है।

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