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यूं दूर न करें अपनी खुशियां

मुझे नहीं लगता कि कोई भी नाखुशी का साथ थामना चाहता है। यह काफी कुछ हमारे व्यवहार में दिखता है। समझ  की कमी कह लीजिए कि हमें पता ही नहीं होता कि खुशियों को कैसे सहेजना है? अगर हमें पता हो कि कहां खुशी मिलेगी और कहां सिर्फ परेशानी, तो हम सिर्फ सही दिशा में ही कदम बढ़ाएंगे। 

हम सभी जिंदगी की इसी यात्रा में हैं, जहां सुख व दुख का आमना-सामना होता रहता है। ऐसा क्यों न हो कि हम अपने दिल और आत्मा को प्रसन्नता के समंदर में डुबकी लगाने दें। आइए जानते हैं उन स्थितियों को, जहां हम खुद ही अपनी खुशियों के दुश्मन बन जाते हैं-

खुद की तुलना करना
जब आप ही खुद दूसरों से तुलना करने में लगे रहेंगे तो  प्रसन्नता आपके पास कहां फटकेगी? यह स्वाभाविक भावना है कि हम दूसरों के बारे में सोचते हैं। पर हर समय यह सही नहीं। होता यह है कि हमारे भीतर जो खूबियां हैं, उन्हें पोषित करने की बजाय हम दूसरों की अच्छी लगने वाली बातों के दलदल में फं सते जाते हैं। 
हम खुद को निराशा में कैद कर लेते हैं। बेचैन रहते हैं। मैं यकीन से कह सकती हूं कि जब आप दूसरों से तुलना करते हैं, तब अपने ही दुश्मन बन जाते हैं। धीरे-धीरे ऐसा करना आदत में शुमार हो जाता है, जिसे रोकना जरूरी है। हम सभी में अपनी आदतों पर काबू पाने की शक्ति होती है। जरूरत है तो अपनी खूबियों को पहचाकर उनसे प्यार करने की। बस, सही रवैये से काम करते रहें।  

दूसरे के पास है बेहतर
यह एक ऐसा विचार है, जो हमारी जिंदगी में उथल-पुथल मचा सकता है। अगर हम इस सोच से बाहर नहीं आएंगे तो चेहरे पर खुशी भी नहीं दिखेगी।  हमारे पास भले ही सब कुछ हो, पर हमें दूसरे लोग ही खुश दिखेंगे। अपने पास केवल अभाव नजर आएगा।  खुशियां दूर हो जाएंगी और हम न जाने कितने ही शानदार पलों को छोड़ देंगे। जितना जल्दी हो सके इस मानसिक स्थिति से उबर जाएं। खुशियां तलाश करना इतना भी मुश्किल नहीं, बशर्ते अपने लेंस से अपनी खूबियों को देखना शुरू कर दें। 

अतीत के लिए अफसोस
अतीत की बुरी यादों में हर पल खोए रहना आपको कभी खुश नहीं रख सकता। यह स्वाभाविक है कि हम समय-समय पर पुरानी यादों में खो जाते हैं, लेकिन अच्छी बातों को संजोए रखना और बुरी यादों को कम से कम याद रखना ही हमें खुशी दे सकता है। जब हम अतीत में जाकर चीजों को ठीक नहीं कर सकते, तो क्यों बार-बार सोच कर दुखी रहें। 

यहां हमारे पास दो विकल्प हैं-पहला, हम पुरानी दुख भरी यादों में खोए रहें। दूसरा, उन यादों को भी जिंदगी की यात्रा का हिस्सा मानें, जिसमें दुख भी हैं और मुस्कुराहट लाने वाले शानदार पल भी। निजी तौर पर मैंने भी पुरानी बातों को बार-बार मथ कर अपनी जिंदगी को बहुत पीछे धकेला, लेकिन इससे कुछ  हासिल नहीं हुआ। हम आगे बढ़ें और आशावान रहें कि जिंदगी में बहुत से अच्छे पल हमारे इंतजार में हैं।   

खुद से लड़ना
हमारा खुद के लिए सबसे अच्छा नजरिया होता है  कि हम जैसे हैं, अच्छे हैं। खुद को दूसरों की नजर से देखने की बजाय अपनी अांखों से खुद की खूबियों को देखना भी एक हुनर है। दरअसल नाखुशी तब बढ़ जाती है,  जब खुद से ही हमारा बॉक्सिंग मैच शुरू हो जाता है।  मैंने खुद से ही नफरत करके न सिर्फ अपनी किशोरावस्था बर्बाद की, बल्कि युवावस्था भी इसी घृणा में बीती।  ऐसा भी एक समय आया जब मैं भूल गई कि असल में खुशियां होती क्या हैं? फिर मेरे जीवन में वह वक्त आया, जब मैंने ठान लिया कि नहीं, अब यह रोकना होगा। मुझे खुद से बॉक्सिंग मैच को रोकना होगा, इससे पहले कि मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाए। 

डर को तवज्जो
डर इंसानी मनोविज्ञान का स्वीकार्य हिस्सा है। निस्संदेह यह डर हमें कई खतरों से भी बचाता है, लेकिन नई चुनौतियों को लेने से रोकता भी है। हम डर को उतना ही महत्व दें, जितना जरूरी है, तो यह डर हमारे लिए आगे बढ़ने का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। डर को अपनी सफलता में बाधक ना बनने दें।  

गैर जरूरी ड्रामा 
देखा जाए तो हर सांस के साथ ड्रामा है। अगर हम इसे संतुलित करने में नाकाम रहते हैं तो यह हमारी खुशियों पर ब्रेक भी लगा सकता है। कई बार हम न चाहते हुए भी ऐसे दोस्तों के साथ होते हैं, जहां हमें गाहे-बगाहे अजीबो-गरीब स्थिति में फंसना पड़ता है। एक घटना से हटते नहीं कि किसी दूसरे की वजह से फिर से उसमें उलझ जाते हैं, जबकि उसमें आपकी कोई भूमिका ही नहीं होती। बस आपका कुसूर इतना होता  है कि आप उन लोगों के साथ थे। अगर आप गौर करें तो पाएंगे कि इससे आपकी खुशियां, नाखुशी में बदल गई हैं। आपको किन लोगों के साथ समय बिताना है, किन कार्यों में बिताना है, यह आपको ही तय करना होगा। 

खुशियां आपमें छिपी हैं
हम यह मानें या न मानें, मगर सच है कि असल खुशियां हमें भीतर से ही मिलती हैं। भले ही आपके बैंक एकाउंट में खूब पैसा हो,आपके नाम के आगे शानदार टाइटल जुड़े हों। कई ऐसे उदाहरण हैं,जहां कल तक बेहद गरीब रहा व्यक्ति आज करोड़ों में खेल रहा है। सोशल मीडिया में भी लोग खुशियां तलाशते नजर आते हैं, मगर वे सब जानते हैं कि इससे कितने खुश हो पाते हैं!  बाहरी संसार में बहुत सी चीजें हैं, जो हमें खुश होने का मौका देती हैं। मगर इन खुशियों को हम तब ही संजो सकते हैं, जब हम अंदर से खुश होंगे। हमें हर समय अंदर और बाहर संतुलन की जरूरत है।

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  • Web Title:life soul happiness