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ट्रंप का यात्रा प्रतिबंध

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और देश की निचली संघीय अदालतें शायद पिंग-पांग का खतरनाक खेल रहे हैं, जिसका खामियाजा देश की सुरक्षा को भुगतना पड़ रहा है। राष्ट्रपति, जिन पर देश की सुरक्षा का दारोमदार है, वह कुछ सोचकर कुछ नया प्रस्ताव करते हैं, तो कुछ जज हैं, जो उसे रद्द कर देते हैं। राष्ट्रपति फिर प्रस्ताव करते हैं, जज उसे फिर रद्द कर देते हैं। होनोलूलू के जिला जज डेरिक वाट्सन ने ट्रंप के यात्रा वीजा बैन वाले आदेश पर 50 दिन के लिए अस्थायी रोक लगा दी। 

जज का तर्क था कि हवाई राज्य और वहां के एक मुस्लिम नेता द्वारा लाया गया विधेयक पारित हो जाने से इस मामले में कोई स्थायी समाधान निकल जाएगा, इस बात का पूरा भरोसा है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप का आदेश अन्य बातों के अलावा हवाई के पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचाने वाला है। यह भी कि आदेश निश्चित तौर पर सुरक्षा हितों से खिलवाड़ और चंद लोगों के हित साधने वाला है। याद दिला दें कि जज मेरिक की नियुक्ति राष्ट्रपति ओबामा ने की थी। ट्रंप पहले ही इस बारे में किसी भी हद तक जाने की बात कह चुके हैं। उनकी बातों में उनकी जिद साफ दिखाई देती है। वह कहते हैं,‘खतरा भी स्पष्ट है, कानून भी स्पष्ट है। मेरे कार्यकारी आदेश की जरूरत भी स्पष्ट है।’ वह कानून और जजों का मखौल उड़ाने से भी नहीं चूकते। 

राष्ट्रपति ट्रंप का पहला आदेश तो सिएटल के जज ने रोक ही दिया, लेकिन इराक को प्रतिबंध की सूची से बाहर करके जारी हुआ दूसरा आदेश भी जज वाट्सन को संतुष्ट नहीं कर सका। उनका मानना था कि कोई भी तार्किक और तटस्थ व्यक्ति ट्रंप के आदेश को एक क्षेत्र विशेष के साथ भेदभाव के रूप में ही देखेगा, न कि धार्मिक रूप से तटस्थ प्रयास के रूप में, जैसा कि बताया जा रहा है। मेरीलैंड के एक जज ने भी इसे ट्रंप के चुनाव के दौरान मुसलमानों पर दिए गए भाषणों या वादों के विस्तार के रूप में ही रेखांकित किया। देखना चाहिए कि संघीय जजों ने हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिये से ही फैसले दिए हैं। जज वाट्सन भी इसका अपवाद नहीं हैं।    
वाशिंगटन टाइम्स,  अमेरिका

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  • Web Title:trump travel restriction