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नियमों से खेलते ट्रंप

जो लोग अमेरिकी राजनीति में ज्यादा रुचि नहीं लेते, वे भी जानते होंगे कि ह्वाइट हाउस और हमारे मौजूदा राष्ट्रपति किस कदर नियमों से खेल रहे हैं। कभी-कभी यह स्थिति कानून तोड़ने की हद तक पहुंच जाती है। पारदर्शिता और आचरण की शुचिता से जुड़ी परंपराओं को नजरअंदाज तो किया ही जाता है, जबकि इसकी अपेक्षा अमेरिकियों को अपने तमाम जनसेवकों से होती है। हम जानते हैं कि ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपतियों के उलट अपना टैक्स रिटर्न जारी करने से इनकार कर दिया है। हमें यह भी पता है कि ट्रस्ट के साथ हुए समझौते के अनुसार वह अपने कारोबार से कमाए जाने वाले लाभ का खुलासा करने को बाध्य नहीं हैं। यहां तक कि एक होटल के साथ भी उनका फायदेमंद करार है। मगर मसला बस इतना नहीं है। शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन ने यह घोषणा की कि ह्वाइट हाउस आने वाले आगंतुकों के लिए लगे ‘विजिटर्स बुक’ को अब सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, जबकि ऐसा वर्षों से होता रहा है। तर्क ये दिए गए हैं कि साल 2020 तक इस पर टैक्स देने वालों का 70,000 डॉलर तक खर्च होगा। यह मजाक ही है। हर सप्ताहांत ट्रंप के मारेलागो दौरे पर आने वाले खर्च से जरा इसकी तुलना तो कीजिए! यह सही है कि विजिटर्स बुक को सार्वजनिक न करना या अपना व्यावसायिक हित पालना उतना महत्वपूर्ण मसला नहीं है, तब भी ट्रंप के इन दोनों फैसलों से परेशान होने की वजह है। पहला फैसला जहां प्रशासन में पारदर्शिता के खिलाफ है, तो दूसरा उस संस्कृति का पोषण करता है, जिसमें खुद की संपन्नता और खुद का कारोबार ही सर्वोपरि माना जाता है। इन सबसे वे अमेरिकी जरूर निराश होंगे, जो यह उम्मीद पाल बैठे थे कि नई सरकार परंपरागत मानदंडों को खत्म करेगी। ऑफिस ऑफ गवर्नमेंट एथिक्स को भी ट्रंप प्रशासन के खिलाफ 39,105 शिकायतें मिली हैं, जबकि आठ वर्ष पहले ओबामा प्रशासन के इन्हीं शुरुआती महीनों में शिकायतों की संख्या महज 733 थी। हालांकि कुछ लोग ट्रंप प्रशासन की जवाबदेही तय कराने को लेकर काम कर रहे हैं, मगर पूरी सफलता फिलहाल उनसे दूर लग रही है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स, अमेरिका

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