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गैंगरेप पीड़िता के निधन पर देश में शोक की लहर
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:29-12-12 10:34 AM
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने चलती बस में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई 23 वर्षीय लड़की के निधन पर शोक व्यक्त किया है। पीड़िता ने आज तड़के भारतीय समयानुसार दो बज कर 15 मिनट पर सिंगापुर के माउंट एलिजबेथ अस्पताल में दम तोड़ दिया। राष्ट्रपति ने उसके निधन पर गहरा दुख जाहिर किया है।
   
इस लड़की के साथ राजधानी में 16 दिसंबर की रात चलती बस में सामूहिक बलात्कार और फिर क्रूरतापूर्वक हमला किया गया था। लड़की को गंभीर हालत में चलती बस से नीचे फेंक दिया गया था।
   
सरकार ने उसे हवाई एंबुलेन्स से सिंगापुर स्थित अंग प्रत्यारोपण की अत्याधुनिक सुविधाओं वाले अस्पताल में इलाज के लिए भेजा था। अत्यंत गंभीर हालत में वहां भेजे जाने के बाद उसने आज तड़के भारतीय समयानुसार दो बज कर 15 मिनट पर दम तोड़ दिया।
   
सिंगापुर भेजे जाने से पहले पीडिम्त दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती थी, जहां उसके तीन ऑपरेशन किए गए। वहां भी अधिकतर समय उसे वेन्टीलेटर पर ही रखा गया था। चोट और संक्रमण की वजह से डॉक्टरों ने उसकी आंत का बहुत बड़ा हिस्सा निकाल दिया था, जिसकी वजह से उसे गैंगरीन हो गया था।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिल्ली में 16 दिसंबर की रात चलती बस में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई लड़की के निधन पर अफसोस व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि भारत को रहने के लिए सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से सभी राजनीतिक वर्ग और समाज अपने संकीर्ण गुटीय हितों को दरकिनार करेंगे।
   
उन्होंने कहा कि पीड़िता की याद में सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उसके साथ हुए भयावह हादसे को लेकर युवाओं में उपजी भावनाएं और उर्जा रचनात्मक दिशा का रूख करें। पीड़िता की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने देशवासियों के साथ मिल कर उसके परिवार और मित्रों के प्रति संवेदना जताई है।
   
प्रधानमंत्री ने कहा मैं लड़की के परिजनों और देश से कहना चाहता हूं कि वह भले ही जीवन की लड़ाई हार गई हो, लेकिन अब यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि उसकी मौत को हल्के तौर पर न लिया जाए।
   
उन्होंने कहा हमने इस घटना से उत्पन्न भावनाओं और आक्रोश को देखा है। यह एक युवा भारत और ऐसे भारत की साफ समझ में आने वाली प्रतिक्रियाएं हैं जो वास्तव में बदलाव चाहता है। पीड़ित की याद में सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम इन भावनाओं और आक्रोश को रचनात्मक कार्रवाई की दिशा में मोड़ें।
   
सिंह ने कहा कि सामाजिक रवैये के लिए जरूरी महत्वपूर्ण बदलावों पर बहस और उनकी जांच समय की मांग है।

 
 
 
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