गुरुवार, 23 मई, 2013 | 16:22 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
Image Loading    खाद्य सुरक्षा कानून के लिए प्रतिबद्ध है संप्रग सरकार न्यायाधीश के रूप में श्रीनिवासन को 21 सांसदों का समर्थन फिक्सिंग से मेरा सिर शर्म से झुक गया: जितेंद्र सिंह  फिक्सिंग से मेरा सिर शर्म से झुक गया: जितेंद्र सिंह  फिक्सिंग से मेरा सिर शर्म से झुक गया: जितेंद्र सिंह  फिक्सिंग से मेरा सिर शर्म से झुक गया: जितेंद्र सिंह  शशिकांत शर्मा बने नए CAG, 2017 तक होगा कार्यकाल  फाइनल के लिए आखिरी जंग लड़ने उतरेंगे मुंबई-राजस्थान फाइनल के लिए आखिरी जंग लड़ने उतरेंगे मुंबई-राजस्थान फाइनल के लिए आखिरी जंग लड़ने उतरेंगे मुंबई-राजस्थान
 
भारत-पाक के बीच युद्ध से फैल सकती है भुखमरी
शिकागो, एजेंसी
First Published:25-04-12 01:04 PM
Last Updated:25-04-12 01:33 PM
 ई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ-
अगर भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध हुआ तो दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ेगा। एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि परमाणु भुखमरी एक अप्रत्याशित आपदा है जो आधुनिक सभ्यता का अंत कर देगी।
   
यह रिपोर्ट इंटरनेशनल फिजीशियन्स फॉर द प्रीवेन्शन ऑफ न्यूक्लियर वार (आईपीपीएनडब्ल्यू) ने जारी की है जिसमें कहा गया है कि दक्षिण एशिया के पड़ोसी देशों के बीच परमाणु टकराव भले ही क्षेत्र तक ही सीमित हो लेकिन इससे पूरी दुनिया की जलवायु पर असर पड़ेगा और चीन, अमेरिका तथा अन्य देशों में खाद्यान्न उत्पादन घट जाएगा।
   
अध्ययन की लेखिका इरा हेलफैंड ने कहा नए प्रमाण दर्शाते हैं कि भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के छोटे परमाणु हथियार भी पथ्वी की पारिस्थितिकी को वैश्विक नुकसान पहुंचा सकते हैं, उनका दूरगामी असर पड़ सकता है तथा पहले से ही कुपोषित लाखों लोगों के लिए खतरा उत्पन्न हो जाएगा।
   
इस अध्ययन का शीर्षक न्यूक्लियर फैमाइन : अ बिलियन पीपल एट रिस्क, ग्लोबल इम्पैक्टस ऑफ लिमिटेड न्यूक्लियर वार ऑन एग्रीकल्चर, फूड सप्लाइज एंड हयूमन न्यूट्रीशन है। इसमें कहा गया है कि भुखमरी की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों की मौत को टाला नहीं जा सकेगा।
   
हेलफैंड ने कहा है कि करीब एक दशक में बेवजह एक अरब लोगों की जान जाएगी जबकि इन मौतों को रोका जा सकता है। यह एक अप्रत्याशित त्रासदी होगी। हालांकि इससे मानव प्रजाति लुप्त नहीं होगी लेकिन जहां तक हम जानते हैं, इससे आधुनिक सभ्यता का अंत जरूर हो जाएगा।
   
उन्होंने अध्ययन में कहा है परमाणु भुखमरी की आशंका को देखते हुए परमाणु हथियारों के बारे में हमें अपनी सोच बदलनी होगी।
   
यह अध्ययन अमेरिका में आईपीएनडब्ल्यू से संबद्ध फिजीशियन्स फॉर सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (पीएसआर) ने भी जारी किया। आईपीपीएनडब्ल्यू की उत्तर अमेरिका में उपाध्यक्ष हेलफैंड ने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होने की स्थिति में जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों द्वारा पेश आंकड़ों पर काम करने के बाद निष्कर्ष निकाले हैं।
   
हेलफैंड और वैज्ञानिकों का कहना है कि कई परमाणु विस्फोट होने से वायुमंडल में कालिख और धुआं फैल जाएगा जिससे कषि क्षेत्र में तापमान में तेजी से बदलाव होगा और  इससे दुनिया भर में खाद्य उत्पादन, खाद्य उपलब्धता तथा दामों पर असर होगा।
   
अध्ययन के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध भले ही क्षेत्र तक सीमित रहे, इससे अमेरिका में दानेदार अनाजों का उत्पादन करीब एक दशक के लिए औसतन दस फीसदी कम हो जाएगा। युद्ध के करीब पांच साल बाद यहां अन्न उत्पादन में 20 फीसदी तक कमी आ सकती है।
   
सोयाबीन के उत्पादन में सात फीसदी की कमी आएगी। चीन में चावल उत्पादन घट जाएगा।

 
 Image Loadingई-मेल Image Loadingप्रिंट  टिप्पणियॉ: (0) अ+ अ- share  स्टोरी का मूल्याकंन
 
 
टिप्पणियाँ
 

लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें

आज का मौसम राशिफल
अपना शहर चुने  
बादलसूर्यादय
सूर्यास्त
नमी
 : 7:14 AM
 : 17:48 PM
 : 70% %
अधिकतम
तापमान
21.9°
.
|
न्यूनतम
तापमान
8.5°