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चीन के साथ बेहतर सम्बंध को इच्छुक भारत: प्रधानमंत्री
बाली, एजेंसी
First Published:19-11-11 01:19 AM
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इंडोनेशिया के बाली में आसियान शिखर सम्मेलन से इतर अपने चीनी समकक्ष वेन जिआबाओ के साथ बैठक करने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत चीन के साथ बेहतर सम्बंध चाहता है, जबकि जिआबाओ ने कहा कि 21वीं सदी एशिया की हो यह सुनिश्चित करने के लिए भारत-चीन को साथ मिलकर काम करना चाहिए।

मनमोहन सिंह ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में तेल व गैस की भारत की खोज पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधि है और ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां दोनों देश आपसी सहयोग बढ़ा सकते हैं। वेन और मनमोहन सिंह की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर गतिरोध और तनाव बरकरार है।

वेन ने कहा कि उनके बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर वैचारिक आदान-प्रदान की सहमति बहुत पहले ही बन गई थी। इसके साथ ही उन्होंने मनमोहन सिंह को उनकी वह टिप्पणी याद दिलाई, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के फलने-फूलने को पर्याप्त जगह है। उन्होंने कहा कि इसके लिए ''दुनिया में पर्याप्त क्षेत्र हैं, जहां चीन और भारत अपने सहयोग बढ़ा सकते हैं।''

वेन ने कहा, ''दुनिया में सर्वाधिक आबादी वाले हमारे दोनों देशों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम आधुनिकता हासिल करें और साथ काम करें।'' उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि इस तरह की दुनिया आने वाली है।
मनमोहन सिंह ने होटल लागुना में शिष्टमंडल स्तर की बातचीत के दौरान कहा कि दोनों देशों ने जब भी जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर सहयोग किया है, उसका प्रभाव सकारात्मक रहा है।

सिंह ने पिछले दिसम्बर में हुए वेन के भारत दौरे को मील का पत्थर करार देते हुए कहा कि जैसा आपने कहा है कि भारत और चीन को अपने रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए पर्याप्त जगह है। मनमोहन ने कहा कि दोनों देश न केवल पड़ोसी हैं, बल्कि विशाल विकासशील अर्थव्यवस्थाएं भी हैं, जिन्हें क्षेत्रीय, द्विपक्षीय और वैश्विक, कई मुद्दों पर आपस में सहयोग करना चाहिए।

भारत-आसियान और पूर्व एशिया शिखर सम्मेलनों से अलग मनमोहन सिंह ने यहां वेन के साथ अपनी मुलाकात में कहा कि सम्प्रभुता के मुद्दों को अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार हल किया जाना चाहिए। विदेश विभाग में सचिव (पूर्व) संजय सिंह के अनुसार, मनमोहन सिंह ने कहा कि तेल और गैस की भारतीय खोज पूरी तरह व्यावसायिक है।

दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे पर नई दिल्ली ने नौ वहन और वहां से होकर गुजरने के अधिकारों का समर्थन किया। चीन, तेल की खोज के लिए विएतनाम के साथ हुए भारत के समझौते को लेकर चिंता जाहिर कर चुका है।

एक सूत्र ने कहा कि समुद्र का एक कानून है। चीन ने समुद्री कानून को स्वीकार किया है। मतभेद पैदा होने की स्थिति में एक समिति है, जो इस बात का फैसला करेगी कि समुद्र क्षेत्र किसका है। यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब नौसेना प्रमुख एडमिरल निर्मल वर्मा ने गुरुवार को चेतावनी दी थी क्षेत्र में इस विवाद का एक बड़ा वैश्विक परिणाम होगा, खासतौर से उनके लिए जिनके वहां पर्याप्त आर्थिक हित जुड़े हुए हैं।

वर्मा ने संयुक्त सैन्य संस्थान (यूएसआई) द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में अपने वक्तव्य में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक ऐसी बहुपक्षीय सुरक्षा अधोसंरचना का भी आह्वान किया, जो शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करा सके।

 
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टिप्पणियॉ पढ़े(1)
अब पाकिस्तान से बेहतर सम्बन्ध बन चुके हैं क्या जो अब चीन से सम्बन्ध की तयारी मैं जुट गयी है भारतीय सरकार, आप लोग लगे रहो बेहतर सम्बन्ध बनाने में औउर एक दिन जब वोह पीठ पर वार करेंगे तब बना लेना मौका वोट बैंक बढ़ाने सरकार न घर की न घाट
By niraj  (19th-November-2011 03:42:PM)
 
 

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