मंगलवार, 26 मई, 2015 | 15:05 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    इस रेस्टोरेंट में आने वालों को बनना पड़ता है कैदी प्रतापगढ़ में रोडवेज के कैशियर की हत्या कर साढ़े सात लाख की लूट  सलमान को दुबई जाने के लिए कोर्ट से मिली अनुमति वसीम रिजवी शिया वक्फ बोर्ड के फिर चेयरमैन साहित्यिक चोरी के आरोप में 'पीके' के निर्माताओं को नोटिस 9 अधिकारियों के तबादले के बाद एलजी से मिले केजरीवाल  कांग्रेस के दस साल पर भारी भाजपा का एक साल: स्मृति पूरी दुनिया कर रही है हरमन की तारीफ, कहानी जान कर आप भी करेंगे इशारों में बोले अमित शाह: 370 सीटें दो, तभी बन पाएगा राम मंदिर 2जी: बैजल ने कहा, मनमोहन भी घोटाले के लिए जिम्मेदार
माले हवाई अड्डा: GMR के खिलाफ कार्रवाई पर सिंगापुर की अदालत का स्टे
सिंगापुर, एजेंसी First Published:03-12-12 02:13 PM
Image Loading

सिंगापुर उच्च न्यायालय ने मालदीव सरकार द्वारा भारतीय कंपनी जीएमआर के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का माले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण और परिचालन से जुड़ा 50 करोड़ डॉलर अनुबंध रद्द किए जाने के फैसले के विरुद्ध सोमवार को स्थगन आदेश जारी किया।

आदालत के हस्तक्षेप के बाद जीएमआर मालदीव के इस हवाई अड्डे का काम जारी रख सकती है। जीएमआर के प्रवक्ता ने कहा कि सिंगापुर उच्च न्यायालय ने मालदीविया एयरपोर्ट कंपनी लिमिटेड और मालदीव सरकार पर 27 नवंबर के पत्र के आधार पर किसी तरह की कार्रवाई करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

एमएसीएल ने मालदीव की नई सरकार के निर्देश के आधार पर 2010 में तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के कार्यकाल के दौरान जीएमआर को दिया गया अनुबंध 27 नवंबर को रद्द कर दिया था। यह पूछने पर कि क्या जीएमआर हवाई अड्डे का परिचालन जारी रखेगी, कंपनी के अधिकारी ने कहा कि हां हम जारी रखेंगे। साथ में पंचनिर्णय की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।

अनुबंध के मुताबिक दोनों पक्षों में मतभेद होने की स्थिति में सिंगापुर या फिर ब्रिटेन के कानून के तहत फैसला किया जाएगा। भारत ने इस अनुबंध के रद्द किए जाने का जोरदार विरोध किया है। मालदीव सरकार की कार्रवाई के बाद भारत ने एक उच्चस्तरीय बैठक में उसके साथ व्यापक संबंधों की समीक्षा भी की है।

प्रधानमंत्री की मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों पर समिति ने इस घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं तथा उनके दूरगामी प्रभावों पर गौर किया है। भारत सरकार ने मालदीव सरकार के निर्णय को विदेशी निवेशकों के लिए बड़ा बुरा संकेत बताया है।

मालदीव सरकार भारतीय कंपनी के साथ पिछली सरकार के समय हुए अनुबंध को संदेहास्पद दशा का अनुबंध करार दिया है।

 
 
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड