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पाक से रिश्ते सामान्य करने का प्रयास करेगा भारत: मथाई
वाशिंगटन, एजेंसी
First Published:07-02-12 09:39 AM
भारतीय विदेश सचिव रंजन मथाई ने यहां कहा कि पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में भारत अपनी कोशिश जारी रखेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के भविष्य को भारत के भविष्य से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
मथाई ने वाशिंगटन के एक बौद्धिक संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा, अफगानिस्तान और पाकिस्तान का भविष्य भारत एवं हमारे क्षेत्र के भविष्य से अलग नहीं है और इसलिए उनकी स्थिरता एवं प्रगति में भारत की अहम साझेदारी है। सामरिक और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र (सीएसआईएस) में अपने व्याख्यान में विदेश सचिव ने कहा, पाकिस्तान के साथ हम शांतिपूर्ण, सहयोगात्मक और सामान्य रिश्ते बनाने के लिए प्रयास जारी रखेंगे।
मथाई ने अपने भाषण में कहा कि पिछले साल भारत और अमेरिका ने मिलकर बातचीत की और समन्वय के साथ स्थिर, लोकतांत्रिक एवं समद्ध अफगानिस्तान के संदर्भ में अपना दष्टिकोण साझा किया।
उन्होंने कहा कि यह ऐसा दृष्टिकोण है जिसे केवल अफगानिस्तान की जनता महसूस कर सकती है लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय समर्थन, सहायता और सतत प्रतिबद्धता की जरुरत है। मथाई ने कहा कि अफगानिस्तान में हालात को सुलझाने में सुनिश्चित होना चाहिए कि पिछले दशक में किये गये व्यापक प्रयासों और बलिदानों को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाए।
मथाई ने कहा कि अशांत देशों की तकदीर उनके पड़ोसियों से जुड़ी होती है और अफगानिस्तान के मामले में भी ऐसा ही है। भारत और अमेरिका मानते हैं कि अफगानिस्तान की तथा व्यापक क्षेत्र की स्थिरता एवं समृद्धि के लिए उसका क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण जरूरी है।
अफगानिस्तान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता उसके अक्टूबर, 2011 के सामरिक साझेदारी समझौते और 2 अरब डालर की सहायता में झलकी है। उन्होंने कहा कि हमें अफगानिस्तान के विकास के लिए जापान जैसे अन्य देशों के साथ भारत और अमेरिका के सहयोग के रास्ते तलाशने चाहिए जिसमें उसके प्राकृतिक संसाधनों का विकास भी शामिल हो।
मथाई ने वाशिंगटन के एक बौद्धिक संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा, अफगानिस्तान और पाकिस्तान का भविष्य भारत एवं हमारे क्षेत्र के भविष्य से अलग नहीं है और इसलिए उनकी स्थिरता एवं प्रगति में भारत की अहम साझेदारी है। सामरिक और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र (सीएसआईएस) में अपने व्याख्यान में विदेश सचिव ने कहा, पाकिस्तान के साथ हम शांतिपूर्ण, सहयोगात्मक और सामान्य रिश्ते बनाने के लिए प्रयास जारी रखेंगे।
मथाई ने अपने भाषण में कहा कि पिछले साल भारत और अमेरिका ने मिलकर बातचीत की और समन्वय के साथ स्थिर, लोकतांत्रिक एवं समद्ध अफगानिस्तान के संदर्भ में अपना दष्टिकोण साझा किया।
उन्होंने कहा कि यह ऐसा दृष्टिकोण है जिसे केवल अफगानिस्तान की जनता महसूस कर सकती है लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय समर्थन, सहायता और सतत प्रतिबद्धता की जरुरत है। मथाई ने कहा कि अफगानिस्तान में हालात को सुलझाने में सुनिश्चित होना चाहिए कि पिछले दशक में किये गये व्यापक प्रयासों और बलिदानों को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाए।
मथाई ने कहा कि अशांत देशों की तकदीर उनके पड़ोसियों से जुड़ी होती है और अफगानिस्तान के मामले में भी ऐसा ही है। भारत और अमेरिका मानते हैं कि अफगानिस्तान की तथा व्यापक क्षेत्र की स्थिरता एवं समृद्धि के लिए उसका क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण जरूरी है।
अफगानिस्तान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता उसके अक्टूबर, 2011 के सामरिक साझेदारी समझौते और 2 अरब डालर की सहायता में झलकी है। उन्होंने कहा कि हमें अफगानिस्तान के विकास के लिए जापान जैसे अन्य देशों के साथ भारत और अमेरिका के सहयोग के रास्ते तलाशने चाहिए जिसमें उसके प्राकृतिक संसाधनों का विकास भी शामिल हो।
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