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भुट्टो जांच को सार्वजनिक करने के लिए पाक सरकार स्वतंत्र: आतंकरोधी अदालत

भुट्टो जांच को सार्वजनिक करने के लिए पाक सरकार स्वतंत्र: आतंकरोधी अदालत

पाकिस्तान की एक आतंकरोधी अदालत ने व्यवस्था दी है कि बेनजीर भुट्टो की मौत की जांच या उनकी हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ न्यायिक जांच के नतीजों को सार्वजनिक करने से पहले सरकार को किसी प्राधिकार से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है।

विशेष सरकारी वकील चौधरी जुल्फीकार अली ने न्यायाधीश चौधरी हबीब उर रहमान से इस जांच और मुकदमे की कार्यवाही को सार्वजनिक करने की इजाजत मांगी थी। इस याचिका के जवाब में रावलपिंडी की आतंकरोधी अदालत ने बुधवार को यह फैसला सुनाया।

जज ने कहा कि सरकार जांच और मुकदमे की कार्यवाही के नतीजों को सार्वजनिक कर सकती है। भुट्टो की हत्या के मामले में संलिप्तता के आरोप में पांच लोगों ऐतजाज शेराजी, अब्दुल रशीद तुराबी, शेर जमान, रफाकत हुसैन और हस्नैन गुल को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा कारणों के चलते इनपर मुकदमा रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद कमरे में चलाया जा रहा है।

फिलहाल निर्वासन में पाकिस्तान से बाहर रह रहे पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को भुट्टो को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने में विफल रहने पर आतंकरोधी अदालत ने घोषित अपराधी मानकर भगोड़ा घोषित कर दिया है। बेनजीर दिसंबर 2007 में रावलपिंडी में एक चुनावी रैली को संबोधित करने के बाद एक आत्मघाती हमले में मारी गई थीं।

गृहमंत्री रहमान मलिक ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि भुट्टो की हत्या के मामले की जांच के नतीजों को सार्वजनिक करने के लिए सरकार अदालत से इजाजत मांगेगी। ऐसा माना जाता है कि सत्ताधारी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी इस जानकारी को भुट्टो की पुण्यतिथि के आयोजनों के दौरान करना चाहती है। इसी के साथ वह अगले साल होने वाले सामान्य चुनावों के लिए अपने अभियान को भी शुरू करना चाहती है।

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