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पाकिस्तान में मुंबई हमले की सुनवाई 19 मई तक स्थगित
इस्लामाबाद, एजेंसी
First Published:05-05-12 07:12 PM
पाकिस्तान में मुंबई हमले को लेकर लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशनल कमांडर जकीउर रहमान लखवी और छह अन्य चरमपंथियों के खिलाफ सुनवाई 19 मई तक के लिए स्थगित हो गई है।
बीते 28 अप्रैल को सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने भारत का दौरा करने वाले न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर आपत्तियां जताईं थी। बंद कमरे में हुई आज की सुनवाई में बचाव पक्ष ने एक अतिरिक्त आवेदन दायर करके रिपोर्ट पर आपत्ति जताई।
सूत्रों ने बताया कि आतंकवाद विरोधी अदालत के न्यायाधीश शाहिद रफीक ने 19 मई को इस मामले पर जिरह करने की इजाजत दी है। इस सुनवाई के बाद लखवी के वकील ख्वाजा हारिस अहमद ने बताया कि बचाव पक्ष के वकीलों ने आयोग की रिपोर्ट को लेकर कई आपत्तियां जताई थीं।
उन्होंने दावा किया कि भारत के अधिकारी भारतीय वकीलों को पाकिस्तानी आयोग के सदस्यों के मुकाबले कहीं ज्यादा तवज्जो देने में लगे हुए थे। अहमद ने कहा कि गवाहों से पूछताछ को रोकने को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते को लेकर बचाव पक्ष के वकीलों ने कुछ आपत्तियां जताई थी।
उन्होंने कहा कि बिना पूछताछ से पूरी प्रक्रिया बेकार हो जाती है। पाकिस्तानी अभियोजकों ने 28 अप्रैल को अदालत के समक्ष न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सौंपी थी।
पाकिस्तान के आठ सदस्यीय आयोग ने मार्च में भारत का दौरा करके लौटा। आयोग ने मुंबई की जांच से जुड़े कुछ अहम लोगों के बयान दर्ज किए।
बीते 28 अप्रैल को सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने भारत का दौरा करने वाले न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर आपत्तियां जताईं थी। बंद कमरे में हुई आज की सुनवाई में बचाव पक्ष ने एक अतिरिक्त आवेदन दायर करके रिपोर्ट पर आपत्ति जताई।
सूत्रों ने बताया कि आतंकवाद विरोधी अदालत के न्यायाधीश शाहिद रफीक ने 19 मई को इस मामले पर जिरह करने की इजाजत दी है। इस सुनवाई के बाद लखवी के वकील ख्वाजा हारिस अहमद ने बताया कि बचाव पक्ष के वकीलों ने आयोग की रिपोर्ट को लेकर कई आपत्तियां जताई थीं।
उन्होंने दावा किया कि भारत के अधिकारी भारतीय वकीलों को पाकिस्तानी आयोग के सदस्यों के मुकाबले कहीं ज्यादा तवज्जो देने में लगे हुए थे। अहमद ने कहा कि गवाहों से पूछताछ को रोकने को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते को लेकर बचाव पक्ष के वकीलों ने कुछ आपत्तियां जताई थी।
उन्होंने कहा कि बिना पूछताछ से पूरी प्रक्रिया बेकार हो जाती है। पाकिस्तानी अभियोजकों ने 28 अप्रैल को अदालत के समक्ष न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सौंपी थी।
पाकिस्तान के आठ सदस्यीय आयोग ने मार्च में भारत का दौरा करके लौटा। आयोग ने मुंबई की जांच से जुड़े कुछ अहम लोगों के बयान दर्ज किए।
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