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सू ची से मंगलवार को मुलाकात करेंगे प्रधानमंत्री
नेपीदाव, एजेंसी
First Published:28-05-12 01:19 PM
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मंगलवार को विपक्ष की नेता आंग सान सू ची से मुलाकात करेंगे और समझा जाता है कि इस भेंट में वह म्यांमार की, पूर्ण लोकतंत्र में बदलाव की दिशा में प्रगति के प्रति भारत का पूर्ण समर्थन जाहिर करेंगे।
यंगून में सिंह और सू ची की मुलाकात से पहले, विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा कि सू ची म्यांमार के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक हैं और प्रधानमंत्री का सद्भावनावश उनसे मुलाकात करना तथा इस देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समृद्ध करने के लिए राष्ट्रीय सुलह सहमति की खातिर उन्हें हमारी शुभकामनाएं देना स्वाभाविक है।
यह पूछे जाने पर कि म्यांमार में लोकतंत्र की समृद्धि में मदद के लिए भारत की क्या प्रतिबद्धताएं हो सकती हैं, कृष्णा ने कहा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए और प्रतिबद्धताएं जताने वाले हम कौन हो सकते हैं। यह एक स्वतंत्र, संप्रभु देश है जिसके साथ हमारे कूटनीतिक और अन्य तरह के संबंध हैं।
भारत में शिक्षित और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित 66 वर्षीय सू ची के साथ सिंह की मुलाकात, प्रधानमंत्री की म्यांमार के राष्ट्रपति थीन सीन से बातचीत के एक दिन बाद होगी। बीते एक बरस में म्यांमार में राजनीतिक सुधारों की पहल करने का श्रेय थीन सीन को ही जाता है।
इन सुधारों के कारण म्यामांर में माहौल बहुत बदला है जिसकी बदौलत ही सिंह राजनीतिक दायरे में विपक्ष के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्ष के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम और उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी म्यांमार आए थे लेकिन तब वह नजरबंद सू ची से नहीं मिल पाए थे।
सिंह की सू ची से मुलाकात को इस बात का साफ संकेत समझा जा रहा है कि नई दिल्ली इस लोकतांत्रिक कार्यकर्ता के साथ अपने रिश्ते मजबूत करना चाहती है। पूर्व में उसे म्यांमार के पूर्व सैन्य जुंटा के साथ संबंधों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था।
अगले माह 67 साल की होने जा रही सू ची का नई दिल्ली ने हमेशा सम्मान किया है। वर्ष 1993 में नई दिल्ली ने उन्हें प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू अवार्ड दिया। लेकिन सुरक्षा और उर्जा के मुद्दे तथा म्यांमार में चीन के बढ़ते प्रभाव की वजह से भारत को अपना रूख बदलना पड़ा जिसके साथ सैन्य जुटा से नजदीकी शुरू हुई।
यंगून में सिंह और सू ची की मुलाकात से पहले, विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा कि सू ची म्यांमार के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक हैं और प्रधानमंत्री का सद्भावनावश उनसे मुलाकात करना तथा इस देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समृद्ध करने के लिए राष्ट्रीय सुलह सहमति की खातिर उन्हें हमारी शुभकामनाएं देना स्वाभाविक है।
यह पूछे जाने पर कि म्यांमार में लोकतंत्र की समृद्धि में मदद के लिए भारत की क्या प्रतिबद्धताएं हो सकती हैं, कृष्णा ने कहा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए और प्रतिबद्धताएं जताने वाले हम कौन हो सकते हैं। यह एक स्वतंत्र, संप्रभु देश है जिसके साथ हमारे कूटनीतिक और अन्य तरह के संबंध हैं।
भारत में शिक्षित और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित 66 वर्षीय सू ची के साथ सिंह की मुलाकात, प्रधानमंत्री की म्यांमार के राष्ट्रपति थीन सीन से बातचीत के एक दिन बाद होगी। बीते एक बरस में म्यांमार में राजनीतिक सुधारों की पहल करने का श्रेय थीन सीन को ही जाता है।
इन सुधारों के कारण म्यामांर में माहौल बहुत बदला है जिसकी बदौलत ही सिंह राजनीतिक दायरे में विपक्ष के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्ष के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम और उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी म्यांमार आए थे लेकिन तब वह नजरबंद सू ची से नहीं मिल पाए थे।
सिंह की सू ची से मुलाकात को इस बात का साफ संकेत समझा जा रहा है कि नई दिल्ली इस लोकतांत्रिक कार्यकर्ता के साथ अपने रिश्ते मजबूत करना चाहती है। पूर्व में उसे म्यांमार के पूर्व सैन्य जुंटा के साथ संबंधों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था।
अगले माह 67 साल की होने जा रही सू ची का नई दिल्ली ने हमेशा सम्मान किया है। वर्ष 1993 में नई दिल्ली ने उन्हें प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू अवार्ड दिया। लेकिन सुरक्षा और उर्जा के मुद्दे तथा म्यांमार में चीन के बढ़ते प्रभाव की वजह से भारत को अपना रूख बदलना पड़ा जिसके साथ सैन्य जुटा से नजदीकी शुरू हुई।
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