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आपकी मौत का कारण बन सकता है आपका जन्मदिन
लंदन, एजेंसी
First Published:11-06-12 02:14 PM
अगर आंकड़ों की मानें तो बहुत से लोगों की मौत साल के किसी और दिन के बजाय उनके जन्मदिन पर ही हो सकती है। इस मौत का कारण है, उन लोगों में मौजूद बर्थडे ब्लूज।
बर्थडे ब्लूज का अर्थ है कि किसी व्यक्ति को उसके जन्मदिन जैसे खुशी के अवसर पर भी दुख और उदासी ने ही घेरा हो। जन्मदिन के मौके पर नकारात्मक विचारों से घिरे रहना इन मौतों का प्रमखु कारण माना गया है।
एनाल्स ऑफ एपिडेमियोलॉजी पत्रिका में छपा यह शोध बीस लाख से भी ज्यादा लोगों पर किया गया और शोधकर्ताओं ने पाया कि बर्थडे ब्लूज के चलते लोगों की दिल के दौरों, सदमों, कैंसर और आत्महत्या से मरने के मामलों में वृद्धि होती है।
इस अध्ययन के अनुसार, हो सकता है किसी एक निश्चित उम्र के बीत जाने पर आपको अपने जन्मदिन की ज्यादा खुशी न हो लेकिन ऐसा भी संभव है कि अगले ही साल आपकी परेशानियां कम हो गई हों। इसलिए ऐसा औसत रूप से ही कहा जाएगा।
डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, औसतन 60 साल की उम्र से ज्यादा के लोगों में से 14 प्रतिशत लोगों की अपने जन्मदिन के दिन मरने की संभावना ज्यादा होती है।
इस अध्ययन के लिए स्विटजरलैंड में पिछले 40 साल के समयांतराल में अध्ययन किया गया है। जिससे यह सामने आया है कि जन्मदिन का तनाव हमारे जीवनकाल पर एक व्यापक प्रभाव डालता है।
इनमें सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी दिल के दौरों के मामले में था। पुरुष और महिलाओं दोनों में ही जन्मदिन के मौके पर दिल के दौरे पड़ने में 18.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। आघात के स्तर लगभग 21.5 प्रतिशत तक बढ़े हुए पाए गए। इसके अलावा कैंसर के मामलों में भी 10.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखने को मिली।
ज्यूरिक विश्वविद्यालय में मनोचिकित्सा में शोध कर रहे डॉक्टर व्लादेता एजडेकिक ग्रॉस का मानना है कि बूढ़े लोग अपने जन्मदिनों पर ज्यादा तनावग्रस्त हो सकते हैं। जन्मदिन के दिन ही मरने की संभावना उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है।
इस अध्ययन का समर्थन कनाडा के एक अस्पताल के आंकड़े भी करते हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, आघातों के लगने की संभावना दूसरे दिनों के बजाय जन्मदिन पर ज्यादा होती है। ऐसा खासतौर पर उंचे रक्तचाप वाले मरीजों में होता है।
हालांकि 1969 और 2008 के बीच के आधिकारिक आंकड़े देखें तो 60 वर्ष से कम की आयु के लोगों में जन्मदिन के अवसर पर मृत्यु में कोई खास बढ़त नहीं देखी गई है। और आत्महत्या या दुर्घटना से होने वाली मौतों के मामले भी 60 साल से ज्यादा की उम्र के आदमियों में ही देखे गए हैं।
पहले ऐसा माना जाता था कि लोग अपने जन्मदिन के बाद के दिनों में ज्यादा मरते हैं क्योंकि उससे पहले तक वे अपने जन्मदिन का मौका जी लेने के लिए जिंदा रहना चाहते हैं। लेकिन अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि उनके निष्कर्षों से उपर कही बात का खंडन हो गया है।
शोधकर्ता अपने अध्ययन की रोशनी में एनीवर्सरी रिएक्शन या बर्थडे ब्लूज पर यकीन करते हैं। अपने ही जन्मदिन के दिन मरने वालों में विलियम शेक्सपीयर और इंग्रीड बर्जमैन का नाम प्रमुख है। इंग्रीड की मौत अपने 67 वें जन्मदिन पर ब्रेस्ट कैंसर की वजह से हुई थी, जबकि शेक्सपीयर की मौत अपने 52 वें जन्मदिन पर अज्ञात कारणों से हुई थी।
बर्थडे ब्लूज का अर्थ है कि किसी व्यक्ति को उसके जन्मदिन जैसे खुशी के अवसर पर भी दुख और उदासी ने ही घेरा हो। जन्मदिन के मौके पर नकारात्मक विचारों से घिरे रहना इन मौतों का प्रमखु कारण माना गया है।
एनाल्स ऑफ एपिडेमियोलॉजी पत्रिका में छपा यह शोध बीस लाख से भी ज्यादा लोगों पर किया गया और शोधकर्ताओं ने पाया कि बर्थडे ब्लूज के चलते लोगों की दिल के दौरों, सदमों, कैंसर और आत्महत्या से मरने के मामलों में वृद्धि होती है।
इस अध्ययन के अनुसार, हो सकता है किसी एक निश्चित उम्र के बीत जाने पर आपको अपने जन्मदिन की ज्यादा खुशी न हो लेकिन ऐसा भी संभव है कि अगले ही साल आपकी परेशानियां कम हो गई हों। इसलिए ऐसा औसत रूप से ही कहा जाएगा।
डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, औसतन 60 साल की उम्र से ज्यादा के लोगों में से 14 प्रतिशत लोगों की अपने जन्मदिन के दिन मरने की संभावना ज्यादा होती है।
इस अध्ययन के लिए स्विटजरलैंड में पिछले 40 साल के समयांतराल में अध्ययन किया गया है। जिससे यह सामने आया है कि जन्मदिन का तनाव हमारे जीवनकाल पर एक व्यापक प्रभाव डालता है।
इनमें सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी दिल के दौरों के मामले में था। पुरुष और महिलाओं दोनों में ही जन्मदिन के मौके पर दिल के दौरे पड़ने में 18.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। आघात के स्तर लगभग 21.5 प्रतिशत तक बढ़े हुए पाए गए। इसके अलावा कैंसर के मामलों में भी 10.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखने को मिली।
ज्यूरिक विश्वविद्यालय में मनोचिकित्सा में शोध कर रहे डॉक्टर व्लादेता एजडेकिक ग्रॉस का मानना है कि बूढ़े लोग अपने जन्मदिनों पर ज्यादा तनावग्रस्त हो सकते हैं। जन्मदिन के दिन ही मरने की संभावना उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है।
इस अध्ययन का समर्थन कनाडा के एक अस्पताल के आंकड़े भी करते हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, आघातों के लगने की संभावना दूसरे दिनों के बजाय जन्मदिन पर ज्यादा होती है। ऐसा खासतौर पर उंचे रक्तचाप वाले मरीजों में होता है।
हालांकि 1969 और 2008 के बीच के आधिकारिक आंकड़े देखें तो 60 वर्ष से कम की आयु के लोगों में जन्मदिन के अवसर पर मृत्यु में कोई खास बढ़त नहीं देखी गई है। और आत्महत्या या दुर्घटना से होने वाली मौतों के मामले भी 60 साल से ज्यादा की उम्र के आदमियों में ही देखे गए हैं।
पहले ऐसा माना जाता था कि लोग अपने जन्मदिन के बाद के दिनों में ज्यादा मरते हैं क्योंकि उससे पहले तक वे अपने जन्मदिन का मौका जी लेने के लिए जिंदा रहना चाहते हैं। लेकिन अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि उनके निष्कर्षों से उपर कही बात का खंडन हो गया है।
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मौत| जन्मदिन| बर्थडे ब्लूज
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