ब्रेकिंग
वडोदराः रेसकोर्स टावर में लगी आग, करीब 300 लोग बिल्डिंग के अंदर फंसे
सीरियाई संकट के शांतिपूर्ण हल के पक्ष में भारत
संयुक्त राष्ट्र, एजेंसी
First Published:05-02-12 07:59 PM
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया पर अरब लीग समर्थित प्रस्ताव को भारत ने वहां के संकट के शांतिपूर्ण निपटारे के अपने रूख के तहत समर्थन दिया। भारत ने रेखांकित किया कि प्रस्ताव सीरियाई सरकार और समूचे विपक्ष के बीच गंभीर राजनीतिक वार्ता पर जोर देता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई सदस्य हरदीप सिंह पुरी ने 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद को भारत की स्थिति का ब्यौरा देते हुए बताया, सीरिया में सभी विपक्षी बलों का सरकार के साथ सकरात्मक बातचीत में शामिल होना अनिवार्य होगा। हमें उम्मीद है कि यह शांति का नया माहौल और राजनीतिक प्रक्रिया बहाल करेगा।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक वार्ता राजनीतिक सुधारों पर आधारित होनी चाहिए जिसकी सीरियाई नेतृत्व ने घोषणा की थी ताकि उन्हें वहां के समाज के हर वर्ग का समर्थन मिले।
रूस और चीन ने प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया है जिसमें सीरिया के सभी पक्षों सरकारी बलों और सशस्त्र विपक्षी समूहों को हिंसा और बदले की कार्रवाई रोकने को कहा गया है।
प्रस्ताव पर मतदान के बाद पुरी ने कहा कि मामले पर भारत ने तर्कों पर आधारित और स्वतंत्र तौर पर फैसला लिया। चीन और रूस से उलट प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर अमेरिका के पक्ष में खड़े होने की आलोचना पर पुरी ने कहा कि मेरा मानना है कि यह कहना सही होगा कि भारत ने अपने रूख और सीरिया में स्थिति के हिसाब से फैसला किया।
पुरी ने कहा कि हम विदेश नीति के फैसले तर्कों पर लेते हैं और हम उन्हें स्वतंत्र तौर पर लेते हैं। उन्होंने कहा कि अरब लीग समर्थित प्रस्ताव में भारत के रूख और उसकी ज्यादातर चिंताओं को शामिल किया गया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि ने प्रस्ताव पर सुरक्षा परिषद के दो सदस्यों चीन और रूस के वीटो करने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। प्रस्ताव को दुनिया के सबसे ताकतवर संगठन के बाकी 13 सदस्यों कर समर्थन मिला।
बातचीत की शुरुआती प्रक्रिया में सक्रिय तौर पर शामिल रहे पुरी ने कहा कि 2 फरवरी को ऐसा लगा कि रूस प्रस्ताव के आलेख पर रजामंद हो गया है। उन्होंने कहा कि गुरुवार शाम दो फरवरी को ऐसा लगा कि हमारे प्रस्ताव के आलेख से सभी सहमत हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि ने कहा कि जब यह मान लिया गया कि प्रस्ताव के मसौदे पर सभी तैयार हो गए हैं, रूसी कुछ अतिरिक्त अनुशंसाओं के साथ आए और वे इसपर मतदान में देरी चाहते थे।
उन्होंने कहा कि इससे कोई बात नहीं बनी। मेरा मानना है कि परिषद इस पर मतदान को तैयार था। इस वजह से इसके पक्ष में दो के मुकाबले 13 मत पड़े। पुरी ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो परिषद इस मुद्दे पर फिर से विचार करेगा।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दो स्थाई सदस्यों के नकारात्मक मतदान के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका और मुझे उम्मीद है कि सीरियाई सरकार और विपक्ष इस संदेश को ग्रहण करेंगे और सभी यही उम्मीद कर रहे हैं कि हिंसा बढ़े नहीं क्योंकि स्थिति वाकई में बहुत गंभीर है।
00

अन्य खबरें
टिप्पणियाँ
स्थानीय ख़बरें
एन सी आर
पंजाब
उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें
आज का मौसम राशिफल



ई-मेल

