ब्रेकिंग
वडोदराः रेसकोर्स टावर में लगी आग, करीब 300 लोग बिल्डिंग के अंदर फंसे
'ईरान मसले पर यूएस-ईयू के रास्ते पर भारत'
वाशिंगटन, एजेंसी
First Published:03-02-12 01:15 PM
भारत जोर दे कर कह चुका है कि वह ईरान से पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में कमी नहीं करेगा, लेकिन अमेरिकी सांसदों को कांग्रेस की एक रिपोर्ट के माध्यम से बताया गया है कि भारत ईरान के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को विस्तारित करने के प्रति सतर्क है।
स्वतंत्र कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस ने ईरान पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा है वर्ष 2010 के आखिर से भारत यह बताता रहा है कि वह ईरान के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को लेकर सतर्क है।
इस सप्ताह के शुरू में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शिकागो में कहा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बावजूद भारत उससे पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में कटौती नहीं करेगा।
मुखर्जी ने कहा था कि भारत के लिए ईरान से आयात में तेजी से कमी लाना संभव नहीं है क्योंकि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतों को जो देश पूरा कर सकते हैं उनमें ईरान एक महत्वपूर्ण देश है।
इस रिपोर्ट को स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है, लेकिन इसे कांग्रेस का अनुमोदन प्राप्त नहीं है। बहरहाल, ये सांसदों के समक्ष चीजों को अमेरिकी नजरिये से पेश करते हैं ताकि वे अपना स्वयं का निर्णय कर सकें।
अमेरिकी कांग्रेस की स्वतंत्र द्विदलीय शाखा सीआरएस सांसदों की रुचि के विषयों पर समय-समय पर रिपोर्ट तैयार करती है। रिपोर्ट में अमेरिका में भारत की राजदूत निरूपमा राव के हाल में दिये बयान के हवाले से कहा गया है कि हाल के वर्षों में ईरान से भारत के तेल आयात में कमी आयी है। बयान के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, पहले अमेरिकी प्रतिबंध लगने के खतरे ने भारतीय कंपनियों को ईरानी उर्जा परियोजनाओं में निवेश करने से नहीं रोका।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि भारत का रुख वर्ष 2012 के शुरू से अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसा होता जा रहा है। ईरान के सेंट्रल बैंक के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते हाल्कबैंक को यह बताने को मजबूर होना पड़ा कि वह ईरान को भुगतान का जिम्मा नहीं संभाल सकता। इसके चलते ईरान ने संभावित हल के तहत भारत से कहा है कि वह तेल के लिए जापानी येन में भुगतान का प्रयास करे।
इसमें कहा गया है कि भुगतान विवाद के अलावा ऐसी जानकारी है कि भारतीय तेल शोधक कंपनियां पीएल 112.81 के तहत प्रतिबंध से छूट के लिए ईरानी तेल खरीद में कटौती कर रही हैं। यह छूट उन देशों को मिलती है जो ईरान से तेल खरीद में काफी कटौती करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भुगतान परेशानियों के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कुछ भारतीय कंपनियों ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद में कटौती कर दी है। भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम तेल उपभोक्ता होने के साथ ही चीन के बाद ईरान से दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है।
सीआरएस ने कहा कि आमतौर पर यह माना जाता है कि भारत के ईरान के साथ मैत्री संबंध हैं। कई विशेषज्ञ उस समय हैरान हुए थे जब भारत के केंद्रीय बैंक ने दिसम्बर 2010 में यह घोषणा की थी कि वह ईरान के साथ वित्तीय लेनदेन के लिए क्षेत्रीय संस्था एशियन क्लीयरिंग यूनियन का इस्तेमाल नहीं करेगा।
तेहरान में द एशियन क्लीयरिंग यूनियन की स्थापना वर्ष 1970 के दशक में संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य एशियाई देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना था। हाल के वर्षों में ऐसे आरोप हैं कि हो सकता है कि ईरान यूरोपीय एवं अन्य बैंकों द्वारा लगाये गए प्रतिबंधों से बचने के लिए अपने वित्तीय लेनदेन के लिए क्लीयरिंग यूनियन का इस्तेमाल कर रहा हो।
रिपोर्ट में कहा गया है, इस कदम से भारत की प्रति दिन 350,000 से 400,000 बैरल ईरानी तेल की खरीद जटिल हो गई। इसके बाद भारतीय अधिकारियों ने ईरान से बातचीत की कि वह तेल और अन्य ईरानी सामान के लिए भुगतान की खातिर अन्य वैकल्पिक तंत्र की तलाश करे।
01

अन्य खबरें
टिप्पणियाँ
स्थानीय ख़बरें
एन सी आर
पंजाब
उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें
आज का मौसम राशिफल



ई-मेल

