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बहादुर शाह जफर की मजार पर पहुंचे खुर्शीद
यंगून, एजेंसी First Published:15-12-2012 02:32:02 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद जब यहां अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह जफर की मजार पर पहुंचे तो वह जफर की एक यादगार पंक्ति का उल्लेख करना नहीं भूले। जफर ने लिखा था कि कितना है बदनसीब जफर, दफन के लिए, दो गज जमीन भी मिल ना सकी, कुए यार में।

खुर्शीद ने इसी पंक्ति को यहां बयां किया। इस मुगल शासक का निधन सात नवंबर, 1962 को रंगून (अब यंगून) में हुआ था। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेते हुए वह पकड़े गए थे। इसके बाद अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें यंगून निर्वासित कर दिया।

इस मौके पर खुर्शीद ने वहां बहादुर शाह की खूबसूरत कृतियों को देखा। इनमें सभी वक्त की नमाजों का जिक्र है। खुर्शीद ने सन्स ऑफ बाबर नामक एक नाटक भी लिखा है जिसमें हर मुगल शासक और बहादुर शाह जफर के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है।

मंत्री ने जफर के मकबरे की देखरेख करने वालों को अपने लिखे इस नाटक की एक प्रति भी भेंट की। खुर्शीद ने यहां की अतिथि पुस्तिका में लिखा कि इस स्थान का दौरा करने पर आध्यात्मिक और राजनीतिक के तौर पर मैं एक संपूर्णता और प्रेरणा महसूस करता हूं।

इस मौके पर खुर्शीद और उनकी पत्नी लुईस ने अकीदत पेश की और मजार पर चादर चढ़ाई। इससे पहले खुर्शीद ने यहां बौद्ध धर्म पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस मौके पर म्यांमार के उप राष्ट्रपति साई मौक खाम भी मौजूद थे।

 
 
 
 
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