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चीन में खुलेपन की खिलाफत कोई नई बात नहीं है। गूगल पर लगाम कसने के बाद शुक्रवार की शाम देश में अपनी तरह की पहली समलैंगिक सौंदर्य प्रतिस्पर्द्धा पर भी चीन ने संस्कृति और मूल्यों की नसीहत देते हुए प्रतिबंध लगा दिया। हैरत की बात है कि चीनी प्रशासन को अपनी सभ्यता-संस्कृति की याद कार्यक्रम शुरू से महज एक घंटे पहले आई।
प्रतिभागियों को उम्मीद थी कि इस प्रतिस्पर्द्धा से समलैंगिकता के बारे में देश में जिस तरह के दकियानूसी विचार प्रचलित हैं, उनमें तब्दीली आएगी और 2001 तक जिसे मानसिक बीमारी की संज्ञा दी जाती थी, को सामाजिक स्वीकृति मिल पाएगी। लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
प्रतिभागी और आयोजक चीन के बारे में दुनियाभर को यह संदेश भी देना चाहते थे कि देश में बदलाव की बयार सिर्फ आर्थिक जीवन ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक जीवन होकर भी बह रही है और यह दूर तलक जाएगी।
आयोजन में स्विमवीयर राउंड के साथ टैलेंट सेक्शन को भी शुमार किया गया था। और इसमें चुने जाने वाले 'मिस्टर गे' को अगले महीने नॉर्वे में होने जा रहे 'मिस्टर गे वर्ल्डवाइड फाइनल' में हिस्सा लेने का सुअवसर मिलता, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने के महज एक घंटे पहले बहानाबाजी करके प्रशासन ने पूरी तैयारी का जनाजा निकाल दिया।
अपनी पीड़ा बयां करते हुए आठ प्रतिभागियों में से एक जू फेई ने कहा, 'मुझे वास्तव में रोने का दिल कर रहा है। हम समलैंगिक लोगों के अच्छे पक्ष को लोगों के समक्ष रखना चाहते थे।' उनके अनुसार, चूंकि इसकी तैयारी काफी समय से चल रही थी और इस दौरान समलैंगिकता से जुड़े अहम मुद्दों को खूब प्रसारित किया गया, इसलिए अपने मकसद में हम पूरी तरह असफल भी नहीं रहे हैं।
प्रतिभागियों के अनुसार, इस आयोजन से चीन की अंतरराष्ट्रीय छवि बेहतर होती। इससे न सिर्फ गे समुदाय को बल्कि देश को भी लाभ मिलता, क्योंकि इससे चीनी समाज की समरसता और सामंजस्यपूर्ण छवि दुनिया के सामने आती।

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