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लंदन स्थित संगठन पीस इंटरनेशनल ने दक्षिण एशिया में शांति बहाली के प्रयासों के तहत जसवंत सिंह को यह सम्मान प्रदान किया है।
अपनी किताब में मोहम्मद अली जिन्ना की प्रशंसा करने के कारण भाजपा से निष्कासित किये गए पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह को दक्षिण एशियाई क्षेत्र में शांति के दूत सम्मान से नवाजा गया है।
लंदन स्थित संगठन पीस इंटरनेशनल ने दक्षिण एशिया में शांति बहाली के प्रयासों के तहत जसवंत सिंह को यह सम्मान प्रदान किया है। पीस इंटरनेशनल के अध्यक्ष जावेद राजा ने सिंह को शुक्रवार शाम लंदन हिल्टन होटल में आयोजित एक समारोह के दौरान शाल प्रदान किया।
जसवंत सिंह ने इसे अपने लिए एक दुर्लभ सम्मान बताया और उन्होंने कहा कि वह दक्षिण एशिया के बहुत ही साधारण से नागरिक हैं। उन्होंने कहा, अपने शेष जीवन के लिए मैं भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच शांति और मैत्री के लिए काम करुंगा।
जसवंत ने क्षेत्र के नेताओं से साझा अतीत की खुमारी से निकलने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि हम अतीत से नहीं उबरेंगे और कई सदियों की गलतियों के लिए एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहे तो हम आज की चुनौती से कभी निपट नहीं पाएंगे।
जसवंत सिंह ने कहा कि हम अपने समक्ष मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए जबतक सामूहिक कार्रवाई नहीं करेंगे कोई भी हमारी मदद नहीं करेगा। यह हमारी जिम्मेदारी है कि मौजूदा तथा आने वाली पीढी़ के लिए समस्या का समाधान ढूंढे।
उन्होंने कहा, 1947 में भारत के विभाजन के साथ धरती से शांति रूठ गयी। शांति की बहाली की जिम्मेदारी जबतक हम नहीं लेंगे कोई इस दिशा में काम नहीं करेगा। यदि हम उपाय नहीं करेंगे तो पूरी दक्षिण एशिया की करीब दो अरब आबादी गरीबी और दुख में डूबी रहेगी।
अपने किताब का उल्लेख करते हुए जसवंत सिंह ने कहा कि मैं इतिहासकार नहीं हूं। 15 साल की उम्र में मैं सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण के लिए भर्ती हो गया। मैं रेगिस्तानी भारत के ग्रामीण परिवेश में पला बढ़ा हूं। कई वर्षों में मेरे भीतर भी दृढ़ संकल्प शक्ति पैदा हुई। उन्होंने कहा, एक सैनिक के रूप में मेरे लिए यह कहना आसान है कि शांति अनिवार्य है। इन सबसे ऊपर सैनिक संघर्ष नहीं चाहते हैं।

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