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ऑस्ट्रेलिया के सभी बारों के बाहर लिखा हुआ है कि वे बिना कारण बताए किसी भी ग्राहक को प्रवेश देने से इंकार कर सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में छात्र समुदाय पर हो रहे हमलों के बीच तीन भारतीयों सहित छह दक्षिण एशियाइयों को यहां के एक बार में घुसने नहीं दिया गया और इस घटना को नस्लभेद की वारदात के रूप में देखा जा रहा है।
इस समूह के एक सदस्य नेपाली नागरिक सुजान पाठक ने कहा कि हम अपने एक साथी को विदाई की पार्टी देने के लिए बार गए थे। बुधवार को अभिषेक अग्रवाल भारत जाने वाला है। बहरहाल उन्होंने कहा कि सभी युवकों को बिना कारण बताए मेलबर्न सेंटर लॉयन बार होटल में प्रवेश करने से रोक दिया गया।
पाठक ने कहा कि ये सभी छह मित्र (तीन भारतीय और तीन नेपाली) प्रवेश देने से इंकार का कारण जानना चाहते थे और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया, जिसने मदद नहीं की। यहां के सभी बारों के बाहर लिखा हुआ है कि वे बिना कारण बताए किसी भी ग्राहक को प्रवेश देने से इंकार कर सकते हैं।
अग्रवाल ने एनडीटीवी को फोन पर शुक्रवार को देर रात की घटना के बारे में बताया कि हमने बार के भीतर प्रवेश करने का प्रयास किया। हमारे सामने कई लोग खड़े थे और हमारे पीछे भी लाइन में लोग खड़े थे। उन्होंने हमें अंदर घुसने नहीं दिया और कहा कि तुम लोग भीतर नहीं जा सकते।
अग्रवाल ने कहा कि हमने शराब नहीं पी रखी थी, हमारे पास उम्र का प्रमाण था और ठीक ठाक कपड़े पहन रखे थे। फिर भी उन्होंने कहा कि तुम लोग भीतर नहीं जा सकते। उन्होंने हमें कोई कारण नहीं बताया। हमने 10 मिनट तक इंतजार किया। अन्य सभी लोग भीतर प्रवेश कर रहे थे, लेकिन हमें भीतर नहीं जाने दिया गया।
उन्होंने कहा कि हमने पुलिस बुलाई और उनसे मदद मांगी। हमने उन्हें कहा कि यह नस्लभेद का मामला है, क्योंकि हमें भीतर प्रवेश करने से रोकने के लिए कोई कारण नहीं जान पड़ता। अग्रवाल ने कहा कि पुलिस ने कहा कि हम जल्द से जल्द आ रहे हैं। मुझे 20 मिनट बाद एक कॉल आई। वहां पुलिस विभाग का एक कर्मी था उसने पूछा क्या मामला है क्या तुम बता सकते हो। जब मैंने उसे वस्तुस्थिति बताई तो उसने कहा माफ कीजिएगा यह नस्लभेद का मामला नहीं है। इस मामले में हम कुछ नहीं कर सकते हैं।
अग्रवाल ने कहा कि पुलिसकर्मी ने कहा यदि यहां आपको प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा है तो आप दूसरे बार में चले जाएं। ऑस्ट्रेलिया में 2009 में भारतीयों पर 100 हमले हुए और 2008 में ऐसी 17 घटनाएं हुई।

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