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प्रधानमंत्री ने कहा कि हम वर्तमान में विवरणों को अंतिम रूप दे रहे हैं जिससे करार पूरी तरह कार्यान्वित हो जाएगा।
परमाणु करार को भारत-अमेरिका संबंधों में ऐतिहासिक करार देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि दोनों देश समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए विवरणों को अंतिम रूप दे रहे हैं जो एक ऐसा कदम होगा जिससे परमाणु प्रौद्योगिकी के प्रवाह पर लगी बंदिश हट जाएगी और अमेरिकी कारोबारों के लिए व्यवसायिक अवसर का एक बड़ा क्षेत्र खुल जाएगा।
भारत और अमेरिका ऊर्जा, सुरक्षा तथा जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक रूपरेखा भी तय करेंगे जब दोनों पक्षों के बीच इस बारे में मंगलवार को करारनामे (एमओयू) पर हस्ताक्षर होंगे।
यूएस-इंडिया बिजनेस एंड चैम्बर ऑफ कॉमर्स को यहां संबोधित करते हुए सिंह ने यह भी कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग की एक नई राह खुलने जा रही है जब भारत इस क्षेत्र में 26 फीसदी तक विदेशी निवेश की अनुमति देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ हमारे रिश्तों को कई मोर्चे पर विस्तार मिल रहा है और इससे कारोबार के नए अवसर निर्मित हो रहे हैं।
सिंह ने कहा कि परमाणु समझौता भारत-अमेरिका संबंधों में ऐतिहासिक है और मैं यह स्वीकार करना चाहूंगा कि इस पहल में समर्थन के लिए कांग्रेस को राजी करने में अमेरिकी व्यापार ने काफी मददगार भूमिका अदा की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम वर्तमान में विवरणों को अंतिम रूप दे रहे हैं जिससे करार पूरी तरह कार्यान्वित हो जाएगा। एक बार यह हो जाए तो इससे परमाणु और अन्य क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के प्रवाह पर बंदिशें हट जाएंगी। इससे अमेरिकी कारोबार के लिए व्यावसायिक अवसरों का एक वृहद क्षेत्र खुल जाएगा।

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