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प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत नहीं जानता कि इस्लमाबाद में किससे बात की जाए क्योंकि इस पड़ोसी देश में सेना सबसे ताकतवर है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान पर मुंबई हमलों के षडयंत्रकारियों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए पर्याप्त कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत नहीं जानता कि इस्लमाबाद में किससे बात की जाए क्योंकि इस पड़ोसी देश में सेना सबसे ताकतवर है।
मनमोहन ने सीएनएन के साथ इंटरव्यू में कहा, "नहीं, उन्होंने (पाकिस्तान ने) पर्याप्त कार्रवाई नहीं की है।" इस इंटरव्यू को नई दिल्ली में लिया गया था और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के वाशिंगटन पहुंचने के चंद मिनट पहले इसे प्रसारित किया गया। वह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रथम राजकीय अतिथि हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि पाकिस्तान ने कुछ कदम उठाए हैं। मैंने इस मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी से उस वक्त बात की, जब हम मिस्र के शर्म अल शेख में मिले थे। हमने जो संयुक्त बयान जारी किया, उसमें उन्होंने (गिलानी ने) आश्वासन दिया था कि पाकिस्तान मुंबई हमलों के षडयंत्रकारियों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
मनमोहन ने कहा कि लेकिन हमें लगता है कि पाकिस्तान ने इस दिशा में पर्याप्त कार्य नहीं किया है। हाफिज मोहम्मद सईद खुलेआम घूम रहा है। पाकिस्तान ने खुद स्वीकार किया है कि मौलाना अजहर मसूद और लश्कर -ए-तैयबा के अन्य ऐसे आतंकी तत्व जो मुंबई हमलों को अंजाम देने में शामिल रहे, वे खुलेआम घूम रहे हैं। साजिश पाकिस्तान में रची गई।
यह पूछे जाने पर कि क्या पाकिस्तानी सेना आतंकवाद से निबटने के प्रति गंभीर है, मनमोहन ने कहा कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि पाकिस्तानी सेना इन तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। भारत साफ तौर पर नहीं जानता कि पाकिस्तान में किससे बात की जाए क्योंकि वहां सेना बहुत शक्तिशाली है। भारत उस देश में लोकतंत्र को सफल होते देखना चाहेगा, लेकिन हमें यह स्वीकार करना होगा कि आज वहां सत्ता वस्तुत: सेना के पास है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पाकिस्तान में आज भारत का कोई साझीदार है। जब जनरल परवेज मुशर्रफ राष्ट्रपति थे और मुझे उनसे बात करनी होती थी और वह कहते थे कि मैं (मुशर्रफ) सेना हूं और मैं सशस्त्र बलों का प्रतिनिधित्व करता हूं। जबकि मैं (मनमोहन सिंह) जनता का प्रतिनिधित्व करता हूं, अब मुझे नहीं पता कि किससे बात की जाए।
अफगानिस्तान में पाकिस्तान के उद्देश्यों को अमेरिका के उद्देश्यों से अलग बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि अफगानिस्तान उसका पिछलग्गू बन जाए। पाकिस्तान को कभी-कभी महसूस होता है कि अगर अफगानिस्तान में लगातार दबाव पड़ता रहा, तो अमेरिकियों के पास वहां अधिक समय तक टिके रहने की कुव्वत नहीं होगी, तब पाकिस्तान के लिए अफगानिस्तान अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को प्रभावी करने के लिए एक अड्डा बन जाएगा।
उन्होंने पाकिस्तान में क्वेटा शूरा की मौजूदगी के बारे में अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि यह उन चीजों की ओर इशारा है जो जमीनी सतह पर हो रही हैं।
मनमोहन ने बताया कि अमेरिका ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर संतुष्ट है। हम सभी कह सकते हैं कि अफगानिस्तान में तालिबान का उदय दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या है और तालिबान शासन का खात्मा विश्व समाज के लिए एक वरदान होगा।
अफगानिस्तान के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई फिर से चुने गए हैं। यह उनकी जिम्मेदारी और दायित्व है कि वह तालमेल बिठाएं और उन सभी तत्वों को एक साथ करें, जो देश के पुनर्निर्माण और विकास कार्य में योगदान दे सकते हैं।
करजई द्वारा पर्याप्त कदम उठाए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि वहां इससे पहले सीमित प्रयास किए गए। मैं उम्मीद करता हूं कि आतंकवादी तत्वों का विरोध करने वाले अफगान समाज के तमाम तबके अफगानिस्तान की जनता को एक उद्देश्यपूर्ण सरकार देने के लिए एक हो सकते हैं।

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