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सुनन्दो सेन का न्यूयॉर्क में अंतिम संस्कार संपन्न
न्यूयॉर्क, एजेंसी First Published:01-01-13 09:22 AM
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सबवे में एक महिला द्वारा ट्रेन के आगे धक्का देने के कारण जान गंवाने वाले 46 वर्षीय भारतीय आव्रजक सुनन्दो सेन का उनके मित्रों और कारोबारी सहयोगियों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया।   
   
भारतीय वाणिज्य दूतावास के एक अधिकारी ने बताया कि सेन का अंतिम संस्कार कल न्यूयॉर्क में किया गया। उस दौरान उनके मित्र, कारोबारी सहयोगी और वाणिज्य दूतावास के प्रतिनिधि मौजूद थे।
   
कोलंबिया विश्वविद्यालय के समीप अपना प्रिंटिंग का कारोबार चलाने वाले सेन को 27 दिसंबर को क्वीन्स सबवे स्टेशन पर 31 साल की एक महिला एरिका मेनेन्डेज ने सामने से आ रही ट्रेन के आगे धक्का दे दिया था।
   
सेन अविवाहित थे और भारत में उनका कोई परिवार भी नहीं है। वह पिछले 16 साल से एक छोटे से अपार्टमेंट में अपने कुछ साथियों के साथ रह रहे थे। अधिकारी ने सेन की मौत को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि उनके मित्र सदमे में हैं।
   
अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए सेन के मित्रों ने भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क किया था।
   
एरिका मेनेन्डेज पर नफरत की वजह से अपराध करने के कारण हत्या का आरोप लगाया गया है। पिछले सप्ताह सुनवाई के दौरान उसने कहा था कि उसने सेन को मुस्लिम समझा और उसे लगा कि उसे धक्का दे देना ही अच्छा रहेगा। इसके बाद न्यायाधीश ने एरिका की मनोवैज्ञानिक जांच के आदेश दे दिए।
   
एरिका मेनेन्डेज ने सुनवाई के दौरान जो कहा, उसे उद्धत करते हुए सहायक जिला अटॉर्नी मिशेल काशूबा ने कहा मैंने एक मुस्लिम को धक्का दिया था। उसने कहा था कारण कुछ भी नहीं था। मैंने उसे इसलिए ट्रेन के आगे धक्का दिया क्योंकि मुझे लगा कि यह ठीक रहेगा। वह मुस्लिम था इसलिए मैंने उसे धकेल दिया।
   
दोषी साबित होने पर एरिका को अधिकतम 25 साल की सजा हो सकती है। गिरफ्तार किए जाने के बाद उसने पुलिस से कहा था मैंने उस मुस्लिम को इसलिए ट्रेन के आगे धक्का दिया, क्योंकि मैं वर्ष 2001 से हिन्दुओं और मुस्लिमों से  नफरत करती हूं। उन्होंने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टॉवर ध्वस्त किए थे और इसीलिए मैं उन्हें...।
   
सुनवाई के दौरान महिला की बातों से ऐसा नहीं लगा कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा है बल्कि वह खूब हंसती रही और बोली कि उसे कोई पछतावा नहीं है।
   
अगली सुनवाई 14 जनवरी को है। एरिका की ओर से कोई याचिका दायर न किए जाने के कारण सुनवाई बिना जमानत के हो रही है। क्वीन्स के न्यायाधीश जिया मोरिस ने अगली सुनवाई से पहले एरिका की मनोवैज्ञानिक जांच कराने के आदेश दिए हैं।
   
एरिका को हिंसा संबंधी आरोपों के चलते पहले भी दो बार गिरफ्तार किया जा चुका है। उसके परिवार के सदस्यों को भी पुलिस कई बार तलब कर चुकी है लेकिन एरिका का व्यवहार नहीं बदला। एक बार उसकी मां ने पुलिस को बताया था कि वह खुद को और दूसरों को नुकसान पहुंचाने की धमकी देती है।

 
 
 
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