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पाकिस्तान में भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह जिस कथित बम हमले में संलिप्तता के लिए मृत्युदंड की सजा का सामना कर रहा है, उसकी प्राथमिकी में उसका नाम ही नहीं है। सरबजीत के वकील अवैस शेख ने बताया कि प्राथमिकी किसी मंजीत सिंह नामक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज है।
शेख ने बताया कि उनके मुवक्किल को बचाने के लिए उनके प्रयास सरबजीत के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में बताए गए नाम पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि मैंने कहा है कि मेरे मुवक्किल का प्राथमिकी में जिक्र नहीं है। नामों को लेकर हुई यह गलतफहमी भारत और पाकिस्तान के बीच संवादहीनता के कारण दूर नहीं हो पा रही है। वकील ने कहा कि सरबजीत को प्राथमिकी के आधार पर फांसी पर नहीं लटकाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि भारत में कई लोग सरबजीत को बेकसूर मानते हैं। पड़ोसी देश की हालिया यात्रा के दौरान उन्होंने इस बारे में सबूत भी जुटाए हैं। शेख ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के जज से सरबजीत की सजा को फांसी से बदल कर मृत्युदंड में तब्दील करने की अपील भी की है। पाकिस्तानी प्रशासन ने प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के 2008 में किए गए हस्तक्षेप के बाद सरबजीत की फांसी की सजा पर अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है।

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