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भारतीय मूल के वैज्ञानिक रॉल्फ मार्टिन ने अल्जाइमर बीमारी पर शोध से तो चौदह वर्षीय छात्र उमा झा ने ऑस्ट्रेलिया में अपने तेज दिमाग का लोहा मनवाया है। नस्लीय हमलों की बढ़ती वारदातों के बीच इन दो मेधाओं ने भारत का मान और दुनिया में ऑस्ट्रेलिया का सम्मान बढ़ाया है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच उपजे तनाव के बाद यह खबर किसी सुखद अहसास से कम नहीं है।
हाल ही में सिडनी में न्यूरो साइंस की प्रतियोगिता में पूरे ऑस्ट्रेलिया से चुनकर आए 4000 ‘महारथियों’ के बीच भारतीय मूल की छात्र उमा झा ने सबसे तेज दिमाग होने का ताज अपने सिर किया। ऑस्ट्रेलिया में हाईस्कूल के विद्यार्थियों के लिए बुद्धि, याददाश्त, संवेदना, नींद, अल्जाइमर की बीमारी और सदमे जैसे विषयों पर आधारित ‘2010 आस्ट्रेलियन ब्रेन बी चैलेंज’ नामक परीक्षा शुरू की गई है। इसमें सभी राज्यों से जीत कर करीब 4000 प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे। इसमें बाजी पर्थ की शेल्टन कॉलेज की छात्र उमा के नाम रही। प्रतियोगिता में दिमाग जांच की परीक्षा, डॉक्टर-मरीज परीक्षण और न्यूरोसाइंस क्विज में बुद्धि कौशल दिखाना था।
फिलहाल उमा का सफर अभी थमा नहीं है। अगस्त में वह ‘इंटरनेशनल ब्रेन बी चैलेंज’ में भाग लेने कैलिफोर्निया जाने वाली है। प्रतियोगिता के राष्ट्रीय आयोजक और क्वींसलैंड ब्रेन इंस्टीटय़ूट की प्रोफेसर लिंडा रिचर्ड कहती हैं, ‘उमा के लिए यह बहुत ही अपूर्व अवसर था। उसने दिखा दिया है कि न्यूरोसाइंस के लिए उसमें विशेष योग्यता और जुनून है। ’
इसके अलावा पिछले ही दिनों अल्जाइमर पर शोध करने वाले भारतीय मूल के वैज्ञानिक रॉल्फ मार्टिन ने अपना लोहा मनवाया है। शोध के लिए मार्टनि को पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का आस्ट्रेलियन ऑफ द ईयर चुना गया है।
भारत के जन्मे मार्टनि सोलह साल की उम्र में ही पर्थ चले गए थे। अल्जाइमर रोग पर उनके द्वारा किए शोध की पूरी ऑस्ट्रेलिया में अलग धाक है।

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