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जानें, योगी कैबिनेट में शामिल हुए इन 18 चेहरों का ब्यौरा

नई दिल्ली । लाइव हिन्दुस्तान टीम First Published:19-03-2017 03:23:04 PMLast Updated:19-03-2017 08:15:46 PM
जानें, योगी कैबिनेट में शामिल हुए इन 18 चेहरों का ब्यौरा

योगी आदित्यनाथ ने यूपी के सीएम के रूप में शपथ ली। इस दौरान उनके साथ कुल 45 मंत्रियों को भी पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। आइए जानते हैं किसे किसे कैबिनेट मंत्री बनाया गया-

सूर्य प्रताप शाही, कैबिनेट मंत्री​
सूर्य प्रताप शाही, कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं। शाही प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों में गृहमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और आबकारी मंत्री के पदों पर रह चुके सूर्यप्रताप शाही इस बार देवरिया की पथरदेवा सीट से विधानसभा में पहुंचे हैं।

उन्होंने 1984 की इंदिरा लहर में भी कसया सीट से जीत हासिल की थी।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे शाही ने 1985 से 1989 तक, 1991 से 1993 और 1996 से 2002 तक कसया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

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स्वामी प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री
22 जून 2016 को बसपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य पड़रौना से विधायक हैं। स्वामी बसपा के नेता विधायक दल और विधानसभा में नेता विपक्ष रह चुके हैं। चार बार विधायक रह चुके स्वामी, बसपा राज में कैबिनेट मंत्री थे। कांगे्रस के वरिष्ठ नेता आरपीएन सिंह 2009 में पड़रौना विधानसभा की सीट खाली कर सांसद बने तो उपचुनाव में स्वामी प्रसाद विजयी हुए। इसके बाद 2012 और 2017 में भी उन्होंने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा।

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डॉ. रीता बहुगुणा जोशी (कैबिनेट मंत्री)
प्रदेश की राजनीति में 67 वर्षीय रीता बहुगुणा जोशी का नाम जाना पहचाना। रीता जोशी राज्य के दिवंगत राजनेता हेमवतीनंदन बहुगुणा की पुत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके विजय बहुगुणा की बहन हैं। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में मध्यकालीन तथा आधुनिक इतिहास की प्रोफेसर रहीं रीता वर्ष 1995 से 2000 तक इलाहाबाद की महापौर (मेयर) भी रही हैं।

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर जीतीं। इस बार भी वह इसी सीट से भाजपा से विधायक बनी हैं।

ब्रजेश पाठक (कैबिनेट मंत्री)
बसपा से पूर्व सांसद रहे ब्रजेश पाठक इस चुनाव में भाजपा में शामिल हो गए थे। बसपा में दलित-ब्राह्मण गठजोड़ की शुरुआत पाठक ने ही की थी। हरदोई के रहने वाले बृजेश पाठक
ने लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति से सियासी जीवन की शुरुआत की और छात्रसंघ अध्यक्ष भी चुने गए थे।

सिद्धार्थनाथ सिंह (कैबिनेट मंत्री)
भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती सिद्धार्थनाथ सिंह वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता हैं। सिद्धार्थनाथ ने हाल में हुए विधानसभा में चुनाव में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं।

इन्होंने यहां से बसपा विधायक पूजा पाल को 25336 वोटों से हराया है। सिद्घार्थनाथ आंध्रप्रदेश में भाजपा के प्रभारी हैं और पश्चिम बंगाल में पार्टी के सह प्रभारी भी हैं। वह भाजपा के राष्ट्रीय सचिव भी हैं।

आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल टंडन (कैबिनेट मंत्री)
लखनऊ पूर्वी सीट से भाजपा नेता लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल टंडन इस बार दोबारा विधायक बने हैं। उन्होंने करीब-करीब एकतरफा जीत में कांग्रेस के अनुराग
भदौरिया को 80 हजार वोटों से हराया।


नंद गोपाल गुप्ता नंदी (कैबिनेट मंत्री)
यह इलाहाबाद शहर दक्षिणी से इस बार भाजपा के टिकट पर विधायक बने हैं। नंदी इससे पहले बसपा से विधायक थे। बसपा की पूर्व सरकार में मंत्री भी रहे। इस विधानसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हुए।


श्रीकांत शर्मा (कैबिनेट मंत्री)
वृंदावन सीट से विधायक और भाजपा प्रवक्ता व राष्ट्रीय सचिव का श्रीकांत शर्मा मीडिया में पार्टी का पक्ष प्रमुखता से रखने के लिए जाने जाते हैं। इन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और अरुण जेटली का करीबी भी माना जाता है।

शर्मा का जन्म मथुरा हुआ और शुरुआती शिक्षा भी यहीं से हुई। लेकिन बाद उच्च शिक्षा के लिए वह दिल्ली आ गए। दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज से स्नातक करने के दौरान आरएसएस के संपर्क में आए और भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी में सक्रिय छात्र नेता के रूप में उभरे। कहा जा रहा है कि जब यह डीयू में थे तब यहां एनएसयूआई का कब्जा था लेकिन इन्होंने कुछ ऐसे काम किया जिसका बाद में एबीवीपी को फायदा मिला।


रमापति शास्त्री (कैबिनेट मंत्री)
मनकापुर सुरक्षित से जिले में रिकॉर्ड मतों से जीते रमापति शास्त्री पहले भी स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। 15 अक्टूबर 1952 में जन्मे श्री शास्त्री स्नातक है। और शास्त्री उपाधि मिली है।

प्रदेश महामंत्री रहे शास्त्री कांशी प्रांत के प्रभारी भी रहे। जनसंघ से 77 में चुनाव लड़ पहली बार विधायक बने। उसके बाद 77 मे जनता पार्टी से और 91 मे भाजपा जीते। कल्याण सिंह के कार्यकाल में समाज कल्याण और महिला कल्याण के साथ राजस्व मंत्री रहे। इसके बाद फिर कल्याण सरकारऔर राम प्रकाश गुप्ता सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे।

85 से 90 तक अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश महामंत्री रहे। दो बार युवा मोर्चा प्रदेश महामंत्री भी रहे। राजनाथ सरकार में भी स्वास्थ मंत्री रहे। इसके अलावा पार्टी के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। 1975 में डीआईआर मे जेल भी गये। राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया और जेल गये।

सतीश महाना (कैबिनेट मंत्री)
महराजपुर विधानसभा क्षेत्र से सातवीं बार विधानसभा चुनाव जीते हैं। महाना के पिता राम अवतार महाना देश बंटवारे के बाद शहर के लालबंगला की रामगली काली मंदिर के सामने आकर बस गए। इनके पिता राम अवतार आरएसएस के प्रांत सेवक रह चुके हैं। बजरंगदल से राजनीति में उतरे सतीश महाना पांच बार कानपुर कैंट विधानसभा क्षेत्र से तथा परिसीमन के बाद 2012 से महराजपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत रहे हैं। भाजपा की पिछली सरकारों में महाना राज्यमंत्री रह चुके हैं।


एसपी सिंह बघेल (कैबिनेट मंत्री)
इनका पूरा नाम सत्यपाल सिंह बघेल है। यह फिरोजाबाद के टूंडला से विधायक चुने गए हैं। 1993 में राजनीति में आते ही पुलिस की सब इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ी।

मूल रूप से औरैया के रहने वाले हैं। 1998 में लोकसभा का चुनाव सपा की टिकट पर जलेसर सीट से जीता। वह इस सीट से लगातार तीन बार सांसद रहे। 2009 में सपा से अनमन हुई और बसपा का दामन थाम लिया।

-2009 में बसपा के टिकट पर फिरोजाबाद में विस चुनाव अखिलेश यादव के खिलाफ लड़ा और दूसरे नम्बर पर रहे। अखिलेश के सीट छोड़ने पर हुए उप चुनाव में राजबब्बर से हार गए। 2010 में बसपा से राज्यसभा सांसद बने। 2014 में बसपा से भी मोह भंग हुआ और भाजपा का दामन थाम लिया। 2014 में फिरोजाबाद से लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन सपा सांसद अक्षय यादव से हार गए।

भाजपा ने बघेल को पिछड़ा वर्ग आयोग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। विस चुनाव फिरोजाबाद की टूंडला (सुरक्षित सीट) विस से चुनाव लड़ने का फैसला लिया और अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष
पद छोड़ दिया।

सत्यदेव पचौरी (कैबिनेट मंत्री)
स्वरूपनगर निवासी सत्यदेव पचौरी छात्रसंघ चुनाव से राजनीति में आए। हलीम कॉलेज इंटरमीडिएट करने के बाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ राजनीति में सक्रिय रहे। बाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष भी बनाए गए। पहला चुनाव आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से जीते थे। पिछले वर्ष गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता और तीसरी बार भी गोविंदनगर से ही जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। मिलनसार व्यवहार के धनी पचौरी ब्राह्मण समाज से आते हैं। क्षेत्र में अच्छी पकड़ है।

चेतन चौहान (कैबिनेट मंत्री)
अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेटर चेतन चौहान वर्ष 1991 से 1996 व 1998 से 1999 तक दो बार अमरोहा लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे हैं। 21 जुलाई 1947 को जन्मे चेतन को खेलों में प्रतिभाग के लिए 1981 में अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया।

भाजपा की सरकार बनने पर जून 2016 में केंद्र सरकार की ओर से नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फैशन टेक्नालॉजी (एनआईएफटी) का चेयरमैन नियुक्त किया गया। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें अमरोहा की नौगावां सादात विधानसभा से मैदान में उतारा था। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी व सीएम के बेहद करीबी दर्जा मंत्री मौलाना जावेद आब्दी को तकरीबन 28 हजार वोटों से हराकर विधानसभा पहुंचे।

चौधरी लक्ष्मी नारायण (कैबिनेट मंत्री)
मथुरा जिले की राजनीति में इनकी अच्छी पकड़ है। इस बार वह फिर मथुरा से विधायक चुने गए हैं। जिला पंचायत चुनाव 2015 को भाजपा ने उत्तरप्रदेश में केवल एक ही स्थान से विजयश्री हासिल की थी और वह जगह मथुरा जिला पंचायत थी। चौधरी लक्ष्मी नारायण की पत्नी ममता चौधरी मथुरा जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं।

सुरेश खन्ना (कैबिनेट मंत्री)
खन्ना शाहजहांपुर से विधायक हैं। इनका राजनीतिक सफर 1980 से शुरू हुआ। सबसे पहले यह लोकदल से शाहजहांपुर सीट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। 1989 में भाजपा से शाहजहांपुर सीट पर चुनाव लड़े, तब से लगातार आठवीं बार विधायक हैं। 2004 में सुरेश खन्ना ने लोकसभा का चुनाव भी भाजपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन हार गए।

ओमप्रकाश राजभर (कैबिनेट मंत्री)
गाजीपुर की जहूराबाद सीट से विधायक और भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष हैं।
ओमप्रकाश ने बसपा प्रत्याशी के रूप में सबसे पहले वाराणसी की कोलअसला सीट से 1996 में चुनाव लड़ा। 27 अक्टूबर 2002 को भारतीय समाज पार्टी की स्थापना की। 2007 के विधानसभा चुनाव में भासपा की ओर से 152 और 2012 में 56 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारा। 2004 के लोकसभा चुनाव में 8 सीटों, 2009 में 12 सीटों और 2014 में 14 सीटों पर प्रत्याशी उतारा लेकिन कभी किसी सीट पर सफलता नहीं मिली। इस बार भाजपा के साथ गठबंधन कर आठ सीटों पर चुनाव लड़ा और चार सीटें जीतीं।

वाराणसी जनपद के सिंधौरा बाजार के फत्तेपुर कटौना गांव निवासी ओमप्रकाश राजभर पांच भाइयों में सबसे बड़े है। पिता का नाम टल्लु राजभर एवं माता का नाम मितना देवी है। बसपा से राजनीति शुरू की और बसपा के टिकट पर पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे। 2012 में कौमी एकता दल से गठबन्धन कर जहूराबाद से विधानसभा चुनाव लड़कर 48500 के लगभग वोट पाये थे। ओमप्रकाश राजभर की एक बेटी किरण की शादी हो चुकी है। बेटे अरविन्द और अरुण हैं। बलिया जिले के रसड़ा के मिरणगंज में ओमप्रकाश राजभर का वर्तमान आवास एवं पार्टी कार्यालय है।

प्राथमिकताएं-- महिलाओं को शिक्षा की ब्यवस्था,सड़क,पानी व बिजली के साथ ग़रीबो को हक़ दिलाना।राशन कार्ड,आवास,पेंशन तथा समान शिक्षा लागू करना।

दारा सिंह चौहान (कैबिनेट मंत्री)

मऊ जिले के मधुबन से विधायक दारा सिंह चौहान का जन्म आजमगढ़ जिले के गेलुवारा गांव में हुआ। इन्होंने भी छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरुआत कर दी थी। नब्बे की दशक में आजमगढ़ के हैदराबाद क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए और फिर 1996 में बसपा और 2000 में सपा से राज्यसभा सदस्य रहे।

बसपा से 2009 में घोसी से लोक सभा चुनाव जीते और लोकसभा में बसपा के संसदीय दल के नेता बने। 2 फरवरी 2015 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद मिला। वर्ष 2017 विधान सभा चुनाव में मऊ जिले के मधुबन सीट से चुनाव जीते 19 मार्च को प्रदेश में कैबिनेट मंत्री बनाए गए

प्राथमिकताएं: मंत्री बनने के बाद पहली प्राथमिकता के आधार पर भाजपा के एजेंडे के तहत कार्य करना। विकास कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराना। सभी वर्गों के साथ ही कार्यकर्ताओं का सम्मान। जिले में अपराध व गुंडागर्दी समाप्त की जाएगी।

धर्मपाल सिंह (कैबिनेट मंत्री)

बरेली बरेली के आंवला से विधायक धर्मपाल सिंह मंत्री बनाए गए हैं।
राजनीतिक सफर: ब्लाक प्रमुख से शुरुआत, 1997,2002,2012, 2017 चौथी बार विधायक बने हैं, कल्याण सिंह, मायावती-बीजेपी गठबंधन, रामप्रकाश गुप्त, राजनाथ सिंह की सरकार में मंत्री रहे, बीजेपी के प्रदेश उपाद्यक्ष, सदन में डिप्टी लीडर भी रहे हैं। रुहेलखण्ड में हिंदूवादी और किसान नेता की छवि।

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