class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

यूपी विधानसभा चुनाव: बाहुबली फिर दम दिखाएंगे?

यूपी विधानसभा चुनाव: बाहुबली फिर दम दिखाएंगे?

गंभीर आपराधिक छवि वाले लोगों को टिकट देने पर जनता के गुस्से का सामना कर रहीं बड़ी पार्टियों का रुख थोड़ा बदला है। वैसे तो भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा ने को टिकट देने से परहेज किया है। लेकिन उनके बेटे-बेटियों और अन्य परिजनों को बड़े दलों से भी टिकट मिला है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बार बाहुबलियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया है। मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद जैसे बाहुबली पार्टी टिकट नहीं पा सके हैं। सपा से अतीक अहमद को टिकट मिलने पर काफी ऊहापोह रही। बाद में टिकट कट गया। अतीक निर्दलीय उतरने की तैयारी में हैं। बाहुबली धनंजय सिंह भी लोजपा से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। जानकारों के मुताबिक, दलीय निष्ठा ताक पर रखने वाले बाहुबली किसी न किसी पार्टी से टिकट पाकर विधानसभा पहुंचते रहे हैं। मुख्तार अंसारी 1996 में पहली बार बसपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे। फिर 2002 और 2007 का निर्दलीय लड़े। कौमी एकता दल नेता मुख्तार 2012 में जेल से ही विधानसभा पहुंचाने में सफल रहे। वहीं 2012 में सपा के टिकट पर गोसाईगंज फैजाबाद से चुनाव जीते। इस बार भी वह मैदान में ताल ठोंक रहे हैं।

भाजपा ने सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण को गोंडा से टिकट दिया है। मुख्तार अंसारी के भाई सिग्बतुल्लाह अंसारी के टिकट पर अभी पसोपेश है। वहीं हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी को बसपा ने चिल्लूपार से टिकट दिया है।

ये भी पढ़ें- मुलायम की बहू व रीता जोशी से रोचक हुआ लखनऊ कैन्ट का मुकाबला

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:strongman shows their power in up assembly election