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तीन तलाक और शरीयत में दखल बर्दाश्त नहीं: दारुल उलूम

देवबंद, हमारे संवाददाता First Published:19-10-2016 09:55:31 PMLast Updated:19-10-2016 09:55:31 PM

तीन तलाक के मसले पर मचे बवाल पर मुस्लिम पर्सनल-लॉ-बोर्ड द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे पर देशभर के मुसलमानों से दारुल उलूम देवबंद ने समर्थन करने का आह्वान किया है। दारुल उलूम ने कहा कि कामन सिविल कोड और तीन तलाक पर सरकार की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं होगी। देशभर में इसके खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलेगा।

बुधवार की शाम को दारुल उलूम देवबंद ने मजलिस-ए-शूरा ( कार्यकारिणी) की आपात बैठक बुलाई। इसमें पांच प्रस्ताव रखे गए। मजलिस-ए-शूरा ने कहा कि विधि आयोग के जरिए केंद्र सरकार शरीयत मामलों में बेवजह दखल कर रही है। संविधान की धारा-25 के तहत मुसलिम पर्सनल ला मुसलमानों का बुनियादी हक है। विधि आयोग का सवालनामे का बायकाट होगा और इसके खिलाफ हम हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे।

बैठक में तीन तलाक, बहु विवाह, लॉ कमीशन व कामन सिविल कोड के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं संस्था के सदर मोहतमिम मौलाना मोहम्मद सालिम कासमी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कहा गया कि 'शरियत एप्लिकेशन 1938 में साफ लिखा है कि निकाह, तलाक, मीरास, व वसीयत जैसे समाजी मसाइल ( मुद्दे) में मुसलमानों पर उनके शरई कानून ही लागू होंगे। इसलिए लोकसभा और अदालतों को इसमें परिवर्तन करने का अधिकार नहीं है।

मदरसा नदवातुल उलेमा लखनऊ के मोहतमिम मौलाना डा. सईदुर्रहमान आजमी और इस्लामिक फिकह एकेडमी इंडिया के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि हिंदुस्तान के संविधान में सभी धर्मों के लोगों को धार्मिक आजादी दी गई है। फिर मुसलमानों को क्यों नहीं? कामन सिविल कोड संविधान की अवधारणा के भी खिलाफ है। बैठक में मौलाना कमरुज्जमां इलाहाबादी, दारुल उलूम सबीलुर रिशाद अरबिक कालेज बैंगलोर के मोहतमिम मुफ्ती अशरफ अली बाकवी, मुफ्ती अजीजुर्रहमान मुंबई, मौलाना जकरिया नानौतवी, मौलाना कारी अब्दुल्लाह मियां गुजरात, डा. अनवर सईद सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

औरतों को सबसे ज्यादा हक इस्लाम में
मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी व शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह ने कहा कि इस्लाम में जितने हुकूक औरतों को दिए गए है वह किसी और मजहब में नहीं है। निकाह के मामले में औरत को खुद निकाह कबूल करने का हक है तो खुला ( पत्नी भी तलाक ले सकती है) के जरिए पति से अलग होने का अधिकार है।

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