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तीन तलाक का मुद्दा: मुस्लिम महिलाओं ने पर्सनल लॉ का समर्थन किया

तीन तलाक का मुद्दा: मुस्लिम महिलाओं ने पर्सनल लॉ का समर्थन किया

तीन तलाक और कॉमन सिविल कोड को लेकर केंद्र सरकार की पहल पर उलेमा के बाद अब मुस्लिम महिलाएं, लड़कियों ने विरोध के तेवर दिखाए हैं। मुस्लिम संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने कहा कि सरकार दो-चार महिलाओं के बहकावते में आकर अपना फैसला दे रही है। अगर ऐसा है तो हम जनमत के लिए भी तैयार है।

बिहारीपुर कलां स्थित मदरसा तालिमुल इस्लाम की फातिमा आलिया, गुलबख्श, राबिया, हुमैरा, आसिया ने कहा कि ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं कुरान और हदीस में कही गई बातों पर ही अमल करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस्लाम में पुरुषों को तलाक का हक दिया गया है तो महिलाओं को भी ‘खुला’ का अधिकार दिया गया है। चेतावनी दी कि अगर शरीयत के बनाए नियमों और मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखलअंदाजी की गई तो मुस्लिम महिलाएं आंदोलन छेड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगी। 

शहनाज, फात्मा, रूकसाना, आयशा फात्मा नूरी, नाजरीन, गुलजार फात्मा, शबनम, शाजिया, फिरदौस आदि ने कहा कि सरकार को मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल नहीं देना चाहिए। केंद्र में बैठी भाजपा की सरकार सिर्फ वोट के लिए इस तरह के मामले उठाकर जनता को गुमराह करने में लगी है।  सरकार जो चाहे कर ले मुसलमान शरीयत कानून पर ही अमल करेंगे। 

तलाक मसले का हल शरीयत में 
दो चार महिलाओं ने तलाक पर आपत्ति दर्ज कर दी तो उसको सरकार गंभीरत से ले रही है। अगर महिलाओं की राय ही जाननी है तो सरकार जनमत कराए। तलाक, शादी और दीनी मसलों को आलिमे दीन ही बैठकर सुलझा सकते हैं, नये कानून से मामले और बिगड़ेंगे। 
- नीलोफर मलिक, अध्यक्ष महिला विकास समिति

तलाक पर सरकार नहीं शरई कानून चलेगा 
औरतों को इस्लामिक कानून को समझना होगा। दीनी इल्म की जानकारी बेहद जरूरी है। तलाक मसला सरकार नहीं शरीयत तय करेगी। मदरसे की तमाम लड़कियां कॉमन सिविल कोड का विरोध कर रही हैं। 
- हाफिज इमरान रजा बरकाती, प्रबंधक, मदरसा तालिमुल इस्लाम गरीब नवाब 

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  • Web Title:muslim women supported personal law