शनिवार, 20 दिसम्बर, 2014 | 16:21 | IST
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हिन्दुस्तान: जामताडा में 71 प्रतिशत और नाला विधानसभा क्षेञ में 74 प्रतिशत मतदान की सूचनाजम्मू कश्मीर में 3 बजे तक 55% मतदानइंडिया टुडे और सिसेरो का एग्जिट पोल: झारखंड में बीजेपी को बहुमत के आसारझारखंड में पहली बार बहुमत की सरकार के आसारझारखंड में कांग्रेस को 16 % प्रतिशत वोट मिलने का अनुमानझारखंड में जेएमएम को 20 % प्रतिशत वोट मिलने का अनुमानझारखंड में बीजेपी को 36% प्रतिशत वोट मिलने का अनुमानकांग्रेस को 7-11, बीजेपी 41-49, जेएमएम 15-19, अन्य 8-12 सीटों पर जीत मिलने की संभावनाझारखंड में पहली बार बहुमत की सरकार बनने के आसारअगर आपको धर्मांतरण से एतराज है तो धर्मांतरण के खिलाफ संसद में कानून लाइए: मोहन भागवतझारखंड विधानसभा के पांचवें और आखिरी चरण के मतदान का समय खत्म हो गया है।झारखंड विधानसभा के पांचवें और आखिरी चरण का मतदान खत्म होने में बस 10 मिनट बाकी हैं। 'हिन्दुस्तान' आपसे अपील करता है कि आप भी अपने मताधिकार का प्रयोग करें।झारखंड : लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के पांच बूथों पर दोपहर 1 बजे तक 80 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआजम्मू: बिशनाह चुनाव क्षेत्र में मतदान केन्द्र संख्या 27 में कुल 640 वोटर हैं और मतदान के पहले घंटे में 72 प्रतिशत मतदान हो चुका है।जम्मू: बानी में 15.22 प्रतिशत, हरीनगर 15.02 प्रतिशत, बिशनाह में 14 प्रतिशत, मारह 12 प्रतिशत, कठुआ में 11.71 प्रतिशत, बशोली में 11 प्रतिशत, बिल्लावर में 10.25 प्रतिशत और गांधीनगर एवं जम्मू पूर्व में 10 प्रतिशत मतदान हुआ है।जम्मू: जम्मू पश्चिम और नौशेरा में नौ-नौ प्रतिशत और डरहाल में 8.50 प्रतिशत एवं कालकोट में 7.15 प्रतिशत मतदान हुआ है।जम्मू: जम्मू जिले के गांधीनगर विधानसभा में केंद्रीय विद्यालय में तीन मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इस केंद्र पर पहले आधे घंटे में लगभग 50 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।जम्मू: गांधीनगर इलाके एक पोलिंग स्टेशन पर निर्वाचन अधिकारियों ने मतदाताओं के लिए चाय की व्यवस्था भी की है।जम्मू: कठुआ जिले में सीमवर्ती निर्वाचन क्षेत्र हीरानगर में महिला मतदाताओं की संख्या, पुरुष मतदाताओं से अधिक रही। कठुआ जिले के दूर-दराज के बानी और बिलावर निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया की शुरुआत धीमी रही।जम्मू: राजौरी जिले की राजौरी, दारहल, कालकोट और नौशेरा में भी सुबह के समय मतदान प्रक्रिया सुस्त रही।झारखंड: दोपहर 1 बजे तक जामताड़ा-57, नाला-56, बोरियो-45, राजमहल-43, बरहेट-47, पाकुड़-61, लिट्टीपाड़ा-59, महेशपुर-58, दुमका-44, जामा-56, जरमुंडी-57, शिकारीपाड़ा-60, सारठ-59, पोड़ैयाहाट-56, गोड्डा-47, महगामा-48 प्रतिशत मतदान हुआ
शिखर संत कवि नरसिंह मेहता
डॉ. संतोष कुमार तिवारी First Published:17-12-12 10:49 PM

जिस प्रकार किसी फूल की महक को शब्दों में बयां करना कठिन है, उसी प्रकार गुजराती के शिखर संत कवि नरसिंह मेहता की कृष्ण-भक्ति का वर्णन करना भी मुश्किल है। 15वीं शताब्दी के इस शीर्ष कवि का एक भजन महात्मा गांधी की दैनिक प्रार्थना का अंग था- ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए, पीड़ पराई जाणे रे। पर दु:खे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आने दे॥’(अर्थात सच्चा वैष्णव वही है, जो दूसरे की पीड़ा को समझता हो। दूसरे के दुख पर जब वो उपकार करे तो अपने मन में कोई अभिमान न आने दे।)

ब्रिटिश फिल्म निदेशक रिचर्ड एटेनबरो ने महात्मा गांधी पर जो फिल्म बनाई थी, उसमें भी यह भजन है। फिल्म में इस भजन को लता मंगेशकर ने गाया है और सितार पंडित रविशंकर ने बजाया है। सौराष्ट्र, गुजरात, में जन्मे नरसिंह राम की आयु जब पांच वर्ष थी तो उनके माता-पिता का देहांत हो गया था। उनका लालन-पालन उनके बड़े भाई और दादी ने किया था। लोग उन्हें गूंगा राम भी कहते थे। लगभग आठ वर्ष की उम्र तक उनका कंठ नहीं खुला था। फिर एक दिन उनके कान में एक साधु ने कुछ कहा तो उनके मुंह से निकला- ‘राधे कृष्ण राधे कृष्ण।’ कहा जाता है कि भगवान कृष्ण स्वयं साधु भेष में उनके पास आए थे।
वह कमाते-धमाते नहीं थे तो उनकी दादी की मृत्यु के बाद उनके भाई-भावज ने उन्हें घर से निकाल दिया था। नरसिंह मेहता का जीवन अलौकिक घटनाओं से भरा हुआ है। कहा जाता है कि वह जो करताल बजाते थे, वह भी भगवान श्रीष्ण ने स्वयं उनको दी थी। भगवान स्वयं उनकी पुत्री की शादी में भी आए थे। उनकी कृष्ण-भक्ति इतनी अधिक थी कि जब धनाभाव में उनकी इज्जत जाने की नौबत आ जाती थी तो भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कोई अवतार लेकर उन्हें बचाने उसी प्रकार आते थे, जिस प्रकार वह द्रौपदी की इज्जत बचाने के लिए चीरहरण के समय आए थे।

नरसिंह मेहता नागर ब्राह्मण थे। एक बार वह निम्न जाति के एक व्यक्ति के घर पर भजन-कीर्तन करने गए। इस कारण उनकी बढ़ती लोकप्रियता से ईर्ष्यालु नागर ब्राह्मणों ने उन्हें अपनी जाति से बहिष्कृत कर दिया था।
गुजराती भाषा में नरसिंह मेहता का एक और भजन है- ‘नारायणनु नामज लेतां, बारे तेने तजियेरे।’ इस पूरे भजन का हिंदी में भावार्थ है- नारायण का नाम लेने से जो रोकता है, उसका त्याग कर दें। इसी कारण प्रह्लाद ने पिता को त्यागा था। इसीलिए भरत-शत्रुघ्न ने अपनी माता का त्याग किया था, परंतु श्रीराम को नहीं छोड़ा था।

 
 
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