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चल पड़ा टाइगर
विशाल ठाकुर
First Published:17-08-12 09:08 PM
Last Updated:18-08-12 12:27 PM
पिछले तीन-चार सालों से सलमान खान की फिल्में गुणवत्ता के आधार पर कम, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के मद्देनजर ज्यादा चर्चा में रही हैं। उनकी नई फिल्म 'एक था टाइगर' के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। इस फिल्म के रिलीज होने से पहले ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि यह फिल्म सलमान की पिछली सभी सफल फिल्मों का रिकॉर्ड भारी अंतर से तोड़ेगी। पहले दिन के कलेक्शन (32 करोड़) से ये साबित भी हो गया। लेकिन अगले ही दिन फिल्म के कलेक्शन (17 करोड़) में करीब 50 फीसदी की गिरावट हुई। पर एक था टाइगर दो दिनों में सबसे तेज करीब पचास करोड़ बटोरने वाली पहली फिल्म बन गयी है।
ट्रेड पंडितों का आकलन कहता है कि आने वाले वीकएंड और सोमवार को ईद की छुट्टी को मिला कर यह फिल्म 6-7 दिनों में 120 से 130 करोड़ का आंकड़ा छू सकती है। और इसी तरह से आने वाले 10-12 दिनों में यह फिल्म 200 करोड़ का आंकड़ा भी पार कर लेगी। तो क्या सलमान खान केवल बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों की अठखेलियों के बीच उलझ कर रह जाने वाले कलाकार बन कर गये हैं? लोगों के दिलों में सलमान प्रेम किस कदर रचा-बसा है, ये नए सिरे से बयां करने की जरूरत नहीं है। लेकिन क्या इस प्रेम को कैश करने के लिए किसी भी कमजोर फिल्म को बढ़िया मार्केटिंग के साथ परोस कर हिट बना देना ही फिल्म मेकिंग है।
'एक था टाइगर' के संबंध में यह बातें इसलिए कही जा रही हैं, क्योंकि यह फिल्म अपने कंटेंट के स्तर पर बेहद कमजोर फिल्म है। इसकी कहानी नीलेश मिश्र और आदित्य चोपड़ा ने मिल कर लिखी है। संवादों में भी नीलेश मिश्र और निर्देशक कबीर खान का दखल है। लेकिन इस फिल्म का एक भी संवाद ऐसा नहीं है, जिसे याद रखा जा सके, जबकि सलमान की पिछली कुछ फिल्मों के संवाद लोगों को आज भी याद हैं। फिल्म वॉन्टेड का एक संवाद, ‘एक बार जो मैंने कमिटमेंट कर दी, फिर मैं अपने आप की भी नहीं सुनता’ और फिल्म दबंग के संवाद, ‘कमाल करते हो पांडेजी’ या फिर ‘छेदी सिंह हम तुम्हारे अंदर इतने छेद करेंगे कि..’ पिछले साल आई फिल्म 'बॉडीगार्ड' का एक संवाद ‘मुझ पर एक अहसान करना कि मुझ पर कोई अहसान न करना।’ बेशक यह कोई कलमतोड़ संवाद नहीं हैं, लेकिन जब सलमान की छवि भुनाने की बात आती है तो यही मार्केट में चलता है।
'एक था टाइगर' कुछ ऐसे संवादों के अभाव के चलते इंटरवल से पहले बहुत धीमी गति वाली फिल्म नजर आती है। हैरानी होती है, जब पुरानी दिल्ली के डिलाइट जैसे सिनेमाहॉल में सलमान के लिए इंटरवल से पहले केवल एक बार ही तालियां बजती दिखाई दें। 'वॉन्टेड', 'दबंग' और 'बॉडीगार्ड' के दौरान इसी सिनेमाहॉल में सलमान के सीन्स पर इतना शोर मचता था कि बाहर सड़क तक सुनाई देता था। इसका मतलब कि सलमान खान को लोग उसी ढंग से देखना चाहते हैं, जैसा वह पिछले तीन-चार साल से देखते आ रहे हैं।
'एक था टाइगर' का जासूस किसी बीमा कंपनी के एग्जीक्यूटिव की तरह लगता है, जो डबलिन में स्टंटबाजी कर उसी ड्रेसअप में एक तेज गति ट्राम को अपने कोट से रोक देता है। टाइगर से ज्यादा तालियां फिल्म की दूसरी जासूस यानी जोया (कैटरीना कैफ) को मिली हैं, जिसने क्यूबा और इस्तानबुल में जोरदार स्टंट किये हैं। टाइगर के किरदार को गढ़ते समय यशराज कैंप की टीम ये भूल गयी कि एक जासूस और दिलफेंक आशिक में क्या फर्क होता है, नहीं तो उन्हें टाइगर को जेम्स बॉन्ड सरीखा बनाना चाहिए था, जो विश्व के हर कोने में फ्लर्ट की गुंजाइश बना कर चलता है।
बॉन्ड इस बात के लिए प्रसिद्ध है कि वह जासूसी करते-करते दुश्मन के खेमे की किसी न किसी महिला को अपने रूमानी लेपेटे में ले ही लेता है। लेकिन प्रेम पच्चीसी में पड़ते ही टाइगर परेशान हो जाता है अपनी नौकरी से और अचानक उसे याद आता है दो देशों के बीच अमन व शांति का रास्ता। यही सोच कर वह एक विश्व सम्मेलन में जोया के साथ डांस करने का आग्रह करता है। इसके पीछे तर्क ये होता है कि क्या दो पड़ोसी मुल्कों (भारत-पाक) के जासूस एक-दूसरे के साथ डांस नहीं कर सकते। यह सब लेखन की अपरिपक्वता दर्शाते हैं।
इस जासूस को देख कर लोग उस समय बहुत खुश होते हैं, जब वो जोया को लेकर भाग जाता है। वह पाकिस्तान और भारत की खुफियां एजेन्सियों की आंखों में धूल झोंक कर उन्हें इधर से उधर नचाता है तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। यहां इस दौरान इस बात पर किसी का ध्यान नहीं जाता कि एक जासूस का मुख्य काम आखिर क्या है। लोग इस बात पर हंसते दिखाई देते हैं कि टाइगर जैसे तेजतर्रार हिन्दुस्तानी जासूस ने आखिर पटाई भी तो एक पाकिस्तानी जासूस।
इस तरफ भी किसी का ध्यान नहीं जाता कि आखिर क्यों और कैसे टाइगर डबलिन मिशन खत्म करके वापस दिल्ली आ जाता है। फिल्म के प्रोमोज में दिखाया गया था कि इस फिल्म में रॉ और आईएसआई की फाइलों से ऐसा कुछ निकलता दिखाया जाएगा, जो दुनिया के सामने पहले कभी नहीं दिखाया गया। बेशक, इन दो खुफिया एजेन्सियों की फाइल से जासूसों की प्रेम कहानी तो कभी नहीं निकली। फिल्म के कमजोर पक्षों का अंत नहीं है। और मजे की बात है कि यह सब स्क्रीन पर घट रहा है और लोग बाहर अगले शो के लिए टिकट खिड़की पर उधम काट रहे हैं। उन्हें नहीं मतलब कि सलमान और कैट फिल्म में क्या परोस रहे हैं, फिल्म का संगीत कैसा है, उसके स्टंट किस हॉलीवुड फिल्म से कॉपी किये गये हैं वगैरह वगैरह। यहां सारी कहानी फिल्म को जल्द से जल्द देख लेने की है। तभी करोड़ों की कलेक्शन का अंबार लग गया है।
ट्रेड पंडितों का आकलन कहता है कि आने वाले वीकएंड और सोमवार को ईद की छुट्टी को मिला कर यह फिल्म 6-7 दिनों में 120 से 130 करोड़ का आंकड़ा छू सकती है। और इसी तरह से आने वाले 10-12 दिनों में यह फिल्म 200 करोड़ का आंकड़ा भी पार कर लेगी। तो क्या सलमान खान केवल बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों की अठखेलियों के बीच उलझ कर रह जाने वाले कलाकार बन कर गये हैं? लोगों के दिलों में सलमान प्रेम किस कदर रचा-बसा है, ये नए सिरे से बयां करने की जरूरत नहीं है। लेकिन क्या इस प्रेम को कैश करने के लिए किसी भी कमजोर फिल्म को बढ़िया मार्केटिंग के साथ परोस कर हिट बना देना ही फिल्म मेकिंग है।
'एक था टाइगर' के संबंध में यह बातें इसलिए कही जा रही हैं, क्योंकि यह फिल्म अपने कंटेंट के स्तर पर बेहद कमजोर फिल्म है। इसकी कहानी नीलेश मिश्र और आदित्य चोपड़ा ने मिल कर लिखी है। संवादों में भी नीलेश मिश्र और निर्देशक कबीर खान का दखल है। लेकिन इस फिल्म का एक भी संवाद ऐसा नहीं है, जिसे याद रखा जा सके, जबकि सलमान की पिछली कुछ फिल्मों के संवाद लोगों को आज भी याद हैं। फिल्म वॉन्टेड का एक संवाद, ‘एक बार जो मैंने कमिटमेंट कर दी, फिर मैं अपने आप की भी नहीं सुनता’ और फिल्म दबंग के संवाद, ‘कमाल करते हो पांडेजी’ या फिर ‘छेदी सिंह हम तुम्हारे अंदर इतने छेद करेंगे कि..’ पिछले साल आई फिल्म 'बॉडीगार्ड' का एक संवाद ‘मुझ पर एक अहसान करना कि मुझ पर कोई अहसान न करना।’ बेशक यह कोई कलमतोड़ संवाद नहीं हैं, लेकिन जब सलमान की छवि भुनाने की बात आती है तो यही मार्केट में चलता है।
'एक था टाइगर' कुछ ऐसे संवादों के अभाव के चलते इंटरवल से पहले बहुत धीमी गति वाली फिल्म नजर आती है। हैरानी होती है, जब पुरानी दिल्ली के डिलाइट जैसे सिनेमाहॉल में सलमान के लिए इंटरवल से पहले केवल एक बार ही तालियां बजती दिखाई दें। 'वॉन्टेड', 'दबंग' और 'बॉडीगार्ड' के दौरान इसी सिनेमाहॉल में सलमान के सीन्स पर इतना शोर मचता था कि बाहर सड़क तक सुनाई देता था। इसका मतलब कि सलमान खान को लोग उसी ढंग से देखना चाहते हैं, जैसा वह पिछले तीन-चार साल से देखते आ रहे हैं।
'एक था टाइगर' का जासूस किसी बीमा कंपनी के एग्जीक्यूटिव की तरह लगता है, जो डबलिन में स्टंटबाजी कर उसी ड्रेसअप में एक तेज गति ट्राम को अपने कोट से रोक देता है। टाइगर से ज्यादा तालियां फिल्म की दूसरी जासूस यानी जोया (कैटरीना कैफ) को मिली हैं, जिसने क्यूबा और इस्तानबुल में जोरदार स्टंट किये हैं। टाइगर के किरदार को गढ़ते समय यशराज कैंप की टीम ये भूल गयी कि एक जासूस और दिलफेंक आशिक में क्या फर्क होता है, नहीं तो उन्हें टाइगर को जेम्स बॉन्ड सरीखा बनाना चाहिए था, जो विश्व के हर कोने में फ्लर्ट की गुंजाइश बना कर चलता है।
इस जासूस को देख कर लोग उस समय बहुत खुश होते हैं, जब वो जोया को लेकर भाग जाता है। वह पाकिस्तान और भारत की खुफियां एजेन्सियों की आंखों में धूल झोंक कर उन्हें इधर से उधर नचाता है तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। यहां इस दौरान इस बात पर किसी का ध्यान नहीं जाता कि एक जासूस का मुख्य काम आखिर क्या है। लोग इस बात पर हंसते दिखाई देते हैं कि टाइगर जैसे तेजतर्रार हिन्दुस्तानी जासूस ने आखिर पटाई भी तो एक पाकिस्तानी जासूस।
इस तरफ भी किसी का ध्यान नहीं जाता कि आखिर क्यों और कैसे टाइगर डबलिन मिशन खत्म करके वापस दिल्ली आ जाता है। फिल्म के प्रोमोज में दिखाया गया था कि इस फिल्म में रॉ और आईएसआई की फाइलों से ऐसा कुछ निकलता दिखाया जाएगा, जो दुनिया के सामने पहले कभी नहीं दिखाया गया। बेशक, इन दो खुफिया एजेन्सियों की फाइल से जासूसों की प्रेम कहानी तो कभी नहीं निकली। फिल्म के कमजोर पक्षों का अंत नहीं है। और मजे की बात है कि यह सब स्क्रीन पर घट रहा है और लोग बाहर अगले शो के लिए टिकट खिड़की पर उधम काट रहे हैं। उन्हें नहीं मतलब कि सलमान और कैट फिल्म में क्या परोस रहे हैं, फिल्म का संगीत कैसा है, उसके स्टंट किस हॉलीवुड फिल्म से कॉपी किये गये हैं वगैरह वगैरह। यहां सारी कहानी फिल्म को जल्द से जल्द देख लेने की है। तभी करोड़ों की कलेक्शन का अंबार लग गया है।
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टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(13)
बकवास वापस करना चाहिए
By hd (14th-September-2012 09:59:AM)
बोरिंग movie
By amit (3rd-September-2012 04:58:PM)
SALMAN BHAI AAP FILM ACTION HIIIII KARNA VERY NICE INN ACTION HERO
By RAKESH VYAS (2nd-September-2012 09:07:PM)
सलमान भाई मै तो आपका फैन हूँ ही और मै तो आपकी कोई भी फिल्म देखूंगा पर मै यह कहना चाहता हूँ की आप की लाइफ की सबसे मस्त फिल्म वांटेड है और यही फिल्म है जो आपको बुलंदी पर ले गई , मै बस यही कहुगा की अगर आप फिल्म बनाये तो वांटेड की तहर वरना नहीं बनाये, क्योकि आपके फैन आपको इसी lookup में देखना चाहते है आपका फैन नसीम
By NASIM (25th-August-2012 03:29:PM)
सलमान भाई प्ल्ज़ स्क्रिप्ट देख कर ही मोविएस
By daud khan (22nd-August-2012 01:08:AM)
मेरे हिसाब से ये फ़िल्म केवल सलमान खान के चाहने वालों के लिए ही है
By null (19th-August-2012 12:51:PM)
film koi khas nahi hai is tarah ki filmen mujhe bilqul pasand nahi hai, lekin mai toh salman ko dekhne gaya tha, kyon ki mai salman ka pasand karta par ye film pasand nahi
By gulfam ansari (18th-August-2012 03:10:PM)
Film to achchi है और न भी होती तो भी मैं तो जरुर देखता क्यूंकि मैं तो सलमान का फेन
By sawan soni (18th-August-2012 01:19:PM)
सामान रोक्किंग इ रेल्ली एन्जोयेद ग्रेट कीप आईटी उप Salman
By Rahul (18th-August-2012 12:58:PM)
FILM IS GOOD EK LOVE STORY ME JO HONA CHAHIYE WO HAI SALMAAN ACTING IS A VERY GOOD I LIKE MOVIE EK THA TIGER
By PUSPENDRA TRIVEDI (18th-August-2012 12:48:PM)
extremely boring movie Salman 2/10
By sanjay (18th-August-2012 10:22:AM)
सलमान की इससे ज्यादा बोरिंग मूवी कोई हो ही नहीं सकती ,,,न कोई कहानी है, न कोई टाइम पास मटेरियल , जिस आधार पर मूवी का प्रचार प्रसार किया गया है वो तो मूवी में कुछ भी नहीं है ,,लोगों को सलमान का नाम जोड़ के उल्लू बनाया गया
By shyam (18th-August-2012 02:38:AM)
सलमान इस बार धोखा दे जायेंगे ऐसा अनुमान और वह्ही हुआ
By manish (18th-August-2012 01:30:AM)
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