शनिवार, 25 मई, 2013 | 09:57 | IST
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फिल्म रिव्यू : फैटसो
विशाल
First Published:05-05-12 12:25 AM
Last Updated:05-05-12 10:45 AM
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इंसान मरने के बाद कहां जाता है? स्वर्ग में या नरक में? स्वर्ग और नरक जैसी कोई चीज है भी या नहीं? ये जानने के लिए क्या मरना जरूरी है ? और क्या कोई मरने के बाद जिंदा भी वापस आ सकता है? अगर हां, तो उसे उसका शरीर कैसे मिलेगा, जिसे वह त्याग चुका है? नहीं मिलेगा तो क्या वह किसी दूसरे के शरीर में प्रवेश कर जाएगा? इस फिल्म को देखते समय  ऐसे कई सवाल मन में कौंधने सहज हैं। लेकिन यह फिल्म स्वर्ग और नरक की बहस का नतीजा नहीं है। कुछ हल्की-फुल्की कॉमेडी के साथ यह एक रोमांटिक कहानी है, जिसमें लव है, ट्रेजिडी है, एक्सीडेंट है और इमोशंस भी हैं।

फिल्म का मेन प्लॉट राजेन्द्र कुमार की फिल्म ‘झुक गया आसमां’ और हॉलीवुड फिल्म ‘घोस्ट’ से लिया गया लगता है, लेकिन इस फिल्म की पटकथा में बदले का भाव नहीं है। कहानी में जो कुछ होता है, उसकी पृष्ठभूमि में केवल प्यार है। यह कहानी पांच दोस्तों सुदीप (रणवीर शौरी), नवीन (पूरब कोहली) , नंदिनी (गुल पनाग), तनु (गुंजन बख्शी) और यश (नील भूपालम) की है।

नवीन प्यार करता है नंदिनी से और जल्द शादी भी करने वाला है। तनु प्रेमिका है यश की और इनके बीच है सुदीप, जो इस ग्रुप में सबसे मोटा है। उसका मोटापा ग्रुप में ठहाकों का काम करता है। एक एक्सीडेंट में जब नवीन की मौत हो जाती है तो नंदिनी बिल्कुल अकेली रह जाती है। मरने के बाद नवीन को पता लगता है कि दरअसल मरने का वक्त उसका नहीं, बल्कि सुदीप का था। वह सुदीप के शरीर में प्रवेश कर जाता है। इस घटना के कुछ दिनों बाद यश तनु का साथ छोड़ नंदिनी को प्रपोज कर देता है।

सुदीप से यह देखा नहीं जाता। वह नंदिनी को यश से बचाने की कोशिश करता है। उधर, तनु भी यश से किनारा कर लेती है। नंदिनी को सुदीप का रवैया अच्छा नहीं लगता और वह उससे नाराज रहने लगती है। सुदीप में आए इस बदलाव का कारण कोई नहीं जानता। वह चाह कर भी किसी को कुछ नहीं बता सकता, क्योंकि उसकी बात पर कोई यकीन नहीं करेगा। यही सोच कर वह इन्हीं हालात में नंदिनी को यश से बचाने और नंदिनी से अपने प्यार का इजहार करने में जुट जाता है।

निर्देशक रजत कपूर की फिल्मों में लव एंगल में ट्राएंगल और यू-टर्न खूब तेजी से आते हैं। लेकिन ‘फैटसो’ में प्यार और रोमांस से परे एक ऐसे आदमी की कहानी पर फोकस किया गया है, जिसे एक हादसे के बाद दूसरी जिंदगी मिली है और वह भी किसी दूसरे के शरीर में। लेकिन इससे भी रोचक है वह पूरा सीन, जिसे मरने के बाद स्वर्ग नरक दर्शाने के लिए दिखाया गया है।

फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह से इंसान के मरने के बाद उसकी जिंदगी की फाइल ऐसे धक्के खाती है, जैसे निगम के  किसी दफ्तर में पानी के कनेक्शन का प्रार्थना पत्र। इंसान के प्राण लेने में भी चूक हो सकती है, इस पर पहले भी फोकस किया जा चुका है, लेकिन इसे आज के नए अंदाज में देखना अच्छा लगता है। नवीन का अपनी जिंदगी वापस पाने के लिए लड़ना अच्छा लगता है।

फिल्म में कई ऐसे पल हैं, जो गुदगुदाने का  काम करते  हैं। लेकिन पूरी फिल्म आपको एंटरटेन कर सके, ऐसा मसाला इसमें नहीं है। सितारों की अच्छी एक्टिंग की वजह से यह फिल्म देखी जा सकती है। सॉफ्ट अहसास जगाते संगीत और अच्छी कहानी की वजह से भी इस फिल्म पर पैसे खर्च किए जा सकते हैं। पर क्या वाकई में ऐसा होता है? ऐसे सवाल आपको परेशान करते रहेंगे।

कलाकार: रणवीर शौरी, पूरब कोहली, गुल पनाग, नील भूपालम, गुंजन बख्शी, ब्रिजेन्द्र काला
निर्देशक: रजत कपूर
निर्माता/बैनर: प्रितिश नंदी/ प्रितिश नंदी कम्युनिकेशन
संगीत : सागर देसाई
गीतकार : अमिताभ वर्मा, मनीष जैन

 
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