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अनूठी छठा बिखेरते वृन्दावन के फूल बंगले
महेंद्र प्रताप तिवारी
First Published:16-04-12 09:58 PM
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ईश्वर को प्रसन्न करने एवं उसकी सेवा के अनेक ढंग हैं। इन्हीं में से एक है वृन्दावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में बांके बिहारी जी का फूलों से श्रृंगार। गर्मियों में बांके बिहारी जी को ठंडक पहुंचाने के उद्देश्य से किए जाने वाले इस श्रृंगार को ही फूल बंगले के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धालु प्राय: मनौतियां पूर्ण होने पर ठाकुर जी की सेवा में फूल बंगले अर्पित करते हैं।

फूल बंगलों की शुरुआत का श्रेय स्वामी हरिदास को जाता है। स्वामी हरिदास बांके बिहारी जी की सेवा के लिए जंगलों से तरह-तरह के फूल बीन कर लाते थे। इनमें से कुछ फूल वे बांके बिहारी जी को चढ़ा देते तो कुछ की माला बना कर उन्हें पहना देते। कभी-कभी फूलों से उनका मंदिर सजा देते। बाद में स्वामी जी के शिष्य व अन्य लोग भी इस काम को करने लगे।

वक्त के साथ फूल बंगलों की साज-सज्जा में भी बदलाव आया है। अब कई-कई मंजिल के फूल बंगले बनते हैं। विभिन्न प्रकार की वस्तुओं से उन्हें सजाया जाता है। जैसे सब्जियों का फूल बंगला, फलों का फूल बंगला, केले के पत्तों का फूल बंगला आदि। यही नहीं, इन फूल बंगलों में विभिन्न प्रकार की सुंदर नक्काशी भी की जाती है। आज से 50-60 साल पहले लगभग 50 या 100 रुपए में सुंदर फूल बंगला तैयार हो जाता था। वर्तमान में बांके बिहारी जी का एक दिन का फूल बंगला 5 लाख रुपए या उससे अधिक का बनता है, जिसे बनवाने के लिए भक्तों को लंबे समय तक अपने नंबर की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। बिहारी जी का यह फू ल बंगला बिहारी जी के विग्रह से होता हुआ उनके परिसर और मंदिर के अंदर, मंदिर के बाहर सड़क तक भव्य सजावट के रूप में मिलता है। विभिन्न प्रकार के बैंड बाजों से बिहारी जी की स्तुति की जाती है। उन्हें विभिन्न प्रकार की बेशकीमती पोशाकें पहनायी जाती हैं। इस प्रकार बिहारी जी के विग्रह से ले कर मंदिर और गली से बाहर सड़क तक विभिन्न प्रकार के फूलों की महक से वातावरण महकने लगता है।

 
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