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फिल्म रिव्यू: खिलाड़ी 786
विशाल ठाकुर
First Published:07-12-12 07:44 PM
Last Updated:07-12-12 07:55 PM
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इस बात को अब नए सिरे से बयां करने की जरूरत नहीं कि अक्षय कुमार की जिंदगी में ‘खिलाड़ी’ टाइटल क्या मायने रखता है। मौजूं ये है कि इस टाइटल की जरूरत इस बार अक्षय कुमार को ज्यादा है या फिर उनके नए-नए मुरीद बने हिमेश रेशमिया को? गायक से अभिनेता बने हिमेश इस फिल्म के साथ एक बड़ी लीग के निर्माता और लेखकों की जमात में भी शामिल हो गये हैं। फिल्म की कहानी उन्होंने ही लिखी है। पहले उनके दिमाग में अक्षय की बजाए सलमान खान थे, इसलिए अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक एक्शन-कॉमेडी फिल्म  में गहराई की गुंजाइश तो पैदा होने से पहले ही खत्म हो गयी होगी।

फिल्म की कहानी शादी कराने वाले एक व्यक्ति के बेटे मनसुख भाई (हिमेश रेशमिया) के घर निकाले से शुरू होती है। बेकार बैठे मनसुख को एक डॉन यानी तांत्या तुकाराम तेंदुलकर उर्फ टीटी (मिथुन चक्रवर्ती) की बेटी इंदु तेंदुलकर (असिन) की शादी का ठेका मिलता है। मनसुख का दिमाग तुरंत अपने एक दोस्त 72 सिंह की तरफ दौड़ता है, जो बांका है, जवान है, पर कुंवारा है। पंजाब का रहने वाला ये गबरू यानी 72 सिंह न सिर्फ अपने नाम का, बल्कि काम का भी अनोखा इंसान है। वह अपने पिता 70 सिंह और चाचा 71 सिंह के साथ पुलिस की नकली वर्दी पहन सीमा पार से आने वाले अवैध सामान के ट्रकों को पुलिस के लिए लूटता है। 72 सिंह का एक भाई है 73 सिंह, जो बचपन में मेले में कहीं खो गया था। इस नंबरी फैमिली में  एक मां भी है, जो साउथ अफ्रीका की रहने वाली है। एक बहू कनाडा की तो दूसरी चीन की है।

यही वजह है कि इस परिवार का इकलौता बच्चा एक नन्हा चीनी सिख है। मनसुख टीटी की असलियत छिपा कर 72 सिंह की शादी इंदु से तय करा देता है और उधर टीटी को भी एक पुलिस वाला बना देता है। लेकिन इंदु 72 सिंह से शादी को राजी नहीं होती। वह एक गुंडे आजाद (राहुल सिंह) से प्यार करती है, जो जेल में बंद है। इतनी कहानी सुन कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसी कहानियों में सलमान, अक्षय या फिर अजय देवगन बिलकुल फिट बैठते हैं। अब अजय और सलमान नहीं तो अक्षय ही सही। मोटे तौर पर देखा जाए तो यह एक कॉमेडी फिल्म है, जिसमें ‘खिलाड़ी’ टाइटल को कैश करने के लिए जबरदस्ती का एक्शन ठूंसा गया है, खासतौर से क्लाईमैक्स में। वॉन्टेड, दबंग, सिंघम और राउडी राठौड़ सरीखी फिल्मों से प्रेरित इस फिल्म में निर्देशक आशीष आर. मोहन ने रोहित शेट्टी, प्रभुदेवा और साजिद खान के स्टाइल को कॉपी किया है।

फिल्म की कॉमेडी में सस्ते जोक्स हैं। ये जोक्स हंसाते हैं, गुदगुदाते हैं, लेकिन घर साथ नहीं आते। पटकथा के लिहाज से 72 सिंह का परिवार और उसके साथ बीता घटनाक्रम जब जब आता है तो मजा आता है। राहुल सिंह का किरदार अच्छा लिखा गया है। वो जब भी जेल से बाहर निकलता है तो फंस जाता है। ये इनपुट फिल्म में काम कर गया। असिन औसत रहीं। अक्षय कुमार का एक्शन को लेकर वही पुराना स्टाइल है। कॉमेडी में भी खास नयापन नहीं है। राज बब्बर, मुकेश ऋषि और मिथुन ठीक-ठाक रहे। निराश किया तो भारती सिंह के किरदार ने। हिमेश को झेलना मुश्किल है। फिल्म का संगीत काफी अच्छा है। कुल मिला कर ‘खिलाड़ी 786’ अक्षय के फैन्स के लिए ही एक ट्रीट हो सकती है, जो उनके एक्शन-कॉमेडी के दीवाने हैं।

कलाकार: अक्षय कुमार, असिन, राज बब्बर, हिमेश रेशमिया, मुकेश ऋषि, परेश रावल, मिथुन चक्रवर्ती, संजय मिश्र
निर्देशक: आशीष आर. मोहन
निर्माता: हिमेश रेशमिया, ट्विंकल खन्ना, सुनील ए. लुल्ला
बैनर: हरिओम एंटरटेनमेंट, ईरोज इंटरनेशनल, एचआर म्यूजिक
संगीत, लेखक : हिमेश रेशमिया

लोगों ने कहा
मस्त फिल्म है। अक्षय कुमार के एक्शन सीन देखने वाले हैं।
रंजीत चार्ली, आर्टिस्ट
वन टाइम मूवी है। म्यूजिक मस्त है। खासकर बलमा.. सॉन्ग अच्छा लगा।
रजनीश शर्मा, बिजनेसमैन
राज बब्बर की एक्टिंग अच्छी है। असिन भी ठीक लगीं। अक्षय तो जम गए हैं।
पुनीत, छात्र

 

 
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