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फिल्म रिव्यू: तलाश
विशाल ठाकुर First Published:30-11-12 07:21 PMLast Updated:01-12-12 12:43 PM
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एक बात यहां शुरू में ही साफ करता चलूं कि आमिर खान की सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘तलाश’ सबका पेट नहीं भर सकती। खासतौर से उन लोगों का तो बिलकुल नहीं, जो इसकी तुलना विद्या बालन की फिल्म ‘कहानी’ से कर रहे हैं। ये फिल्म उन लोगों के लिए भी नहीं है, जो इसमें ‘कातिल कौन’ वाला फैक्टर तलाश रहे हैं।

‘तलाश’ को एक सस्पेंस थ्रिलर कहा गया है, जबकि इसे सुपरनेचुरल थ्रिलर कहा जाना चाहिए। उससे भी बड़ा है इस फिल्म को बनाने और एक रहस्य को उजागर करने का ढंग, जो इस 2 घंटे 22 मिनट की फिल्म को शुरू से अंत तक दिलचस्प बनाए रखता है। कुछ और बातों का खुलासा करने से पहले जरा फिल्म की कहानी पर नजर डाली जाए। चूंकि यह एक सस्पेंस फिल्म है तो बताने के लिए कुछ ज्यादा नहीं होगा। सीन दर सीन ब्योरा देना भी फिल्म का मजा किरकिरा कर सकता है। इसलिए एक कड़ी में कहानी का जायजा लेते हैं।

मुंबई की एक सुनसान सड़क पर रात करीब दो बजे के आसपास एक कार का एक्सीडेंट होता है। अगली सुबह तफ्तीश में इंस्पेक्टर देवरथ (राजकुमार यादव) को पता चलता है कि कार प्रसिद्ध अभिनेता अरमान कपूर (विवान भटेना) चला रहा था। पानी में डूबने से उसकी कार में ही मौत हो जाती है। मामले की छानबीन का जिम्मा सुजर्न सिंह शेखावत (आमिर खान) के पास आता है। शुरुआती जांच में यह घटना महज एक एक्सीडेंट के रूप में ही सामने आती है, लेकिन अरमान से जुड़े करीबी लोगों के बयान के बाद मामले में कई नए मोड़ आते हैं।

इस मामले में शेखावत को रेड लाइट एरिया के एक दलाल शशि पर शक है, जो घटना के बाद से लापता है। शशि की खोज उसे तैमूर (नवाजुद्दीन सिद्दिकी) से मिलवाती है। उसके बाद रहस्यमयी परिस्थितियों में उसे एक कॉलगर्ल रोजी (करीना कपूर) मिलती है, जिसके बाद इस मामले में कई नए खुलासे होते हैं। लेकिन अचानक शेखावत को रोजी की गतिविधियों पर ही शक होने लगता है। खासतौर पर जब एक दिन रोजी का नाम सिमरन के रूप में सामने आता है।

फिल्म की कहानी के संक्षिप्त वर्णन से शायद बहुतेरे पाठकों का खाना हजम न हो। लेकिन सच मानें तो इससे ज्यादा कुछ बताना एक सस्पेंस फिल्म के लिए ज्यादती होगी। हालांकि फिल्म की कहानी केवल एक एक्सीडेंट पर केन्द्रित नहीं है। इसके बीच सुजर्न सिंह शेखावत की निजी जिंदगी भी है। उसकी पत्नी  श्रेया (रानी मुखर्जी) और बेटे करण की भी दास्तान है, जो कई कोणों से उलझी हुई है। लेकिन फिल्म की कहानी का यह दूसरा पहलू क्लाईमैक्स में उस वक्त भरपूर दबाव के साथ सामने आता है, जब शेखावत एक साथ दो अजीब-सी स्थितियों के साथ जूझता है।

जैसा कि शुरू में ही साफ किया गया है कि इस फिल्म के सस्पेंस को ‘कहानी’ के सस्पेंस के समान नहीं माना जा सकता। हां, ये जरूर है कि दोनों फिल्मों का ट्रीटमेंट तकरीबन एक जैसा ही है। निर्देशक रीमा काग्ति ने फिल्म के हर दृश्य को रोचक और रीयल दिखाने के लिए काफी बारीकी से काम किया है। उनके हर सीन में एक शोध-सा दिखाई देता है। इंटरवल से पहले फिल्म काफी तेज गति के साथ आगे बढ़ती है, लेकिन इंटरवल के बाद कई जगह इसकी धीमी गति खलती भी है।

खासतौर से आमिर के घरेलू झंझावात के दृश्यों में। लेकिन जब-जब फिल्म की कहानी एक्सीडेंट के मामले में परतें हटाने का काम करती है तो मजा आता है। अगर पटकथा की बात करें तो रीमा के साथ जोया अख्तर ने कई दृश्यों में कमाल का ब्योरा दिया है। एक एक्सीडेंट के साथ कत्ल और ब्लैकमेल जैसी बातों का जुड़ना इस सस्पेंस थ्रिलर को और ज्यादा रोचक बना देता है। फिल्म की कहानी के हर दूसरे सीन में एक नए किरदार का रोचक ढंग से आगमन फिल्म में बांधे रखता है।

जो लोग सस्पेंस से भरपूर उपन्यास पढ़ने के शौकीन रहे हैं, वह इस फिल्म के क्लाईमैक्स को शायद आसानी से पचा सकें, क्योंकि एक सस्पेंस थ्रिलर में जब सुपरनेचुरल टच आता है तो मसाला फिल्मों के रूटीन दर्शकों का हाजमा थोड़ा गड़बड़ होने लगता है। वो इसकी तुलना हॉरर फिल्म से करने लगते हैं। यही इस फिल्म के क्लाईमैक्स के साथ भी हुआ है। सिरहन पैदा करने वाली ऐसी कहानी एक जमाने में मनोहर कहानियां या फिर सत्यकथा जैसी पत्रिकाओं में पढ़ने को मिलती थी।

3 ईडियट्स के बाद लोगों को आमिर की एक्टिंग का एक नया रंग देखने को मिलेगा। अपने अंदर बहुत कुछ समेटे आमिर का किरदार क्लाईमैक्स में काफी खुल कर सामने आता है। खासतौर से जब वह ङील के किनारे बैठ कर रोते हैं। या फिर एक होटल के कमरे में करीना संग अपने दिल का हाल बयां करते हैं। आमिर और करीना के बीच कई सीन्स काफी दिलचस्प हैं। इनके बीच डॉयलागबाजी का स्कोप काफी बढ़ गया है। करीना की उपस्थिति फिल्म में एक गजब का आकर्षण पैदा करती है।

इसके अलावा फिल्म में नवाजुद्दीन का काम काबिले तारीफ है। लंबाई और अहमियत के लिहाज से उनका किरदार इंस्पेक्टर खान (फिल्म कहानी में) से कम नहीं है। रानी मुखर्जी को बिना मेकअप के देखना शायद न अखरे।

कलाकार: आमिर खान, करीना कपूर, रानी मुखर्जी, नवाजुद्दीन सिद्दिकी, राजकुमार यादव, शेरनाज पटेल, अदिति वासुदेव, विवेक मदान
निर्देशक: रीमा काग्ति
निर्माता: आमिर खान, फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी
बैनर: रिलायंस एंटरटेनमेंट, आमिर खान प्रोडक्शंस, एक्सल एंटरटेनमेंट
संगीत: राम संपत
कहानी-पटकथा: रीमा काग्ति, जोया अख्तर

लोगों ने कहा
एकदम मस्त मूवी है। आमिर खान की एक्टिंग काबिले तारीफ है।
रवि शर्मा, आई.टी. मैनेजर
कहानी और म्युजिक अच्छा है। करीना की एक्टिंग भी अच्छी लगी।
प्रीति कन्नौजिया,  आर्टिस्ट
फिल्म शुरू से ले कर अंत तक दर्शकों को बांधे रखती है।
एकता शर्मा, हाउस वाइफ

 

 
 
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