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कामुकता और अश्लीलता में फर्क है!
शान्तिस्वरुप त्रिपाठी
First Published:03-08-12 08:40 PM
Last Updated:04-08-12 01:36 AM
पूजा भट्ट मानती हैं कि उनकी फिल्म ‘जिस्म 2’ उन इनसानी भावनाओं का आईना है, जिन्हें अब तक कभी पर्दे पर दिखाया नहीं गया। ये फिल्म कामुकता की नई परिभाषा गढ़ेगी।
‘जिस्म 2’ पर कैसी प्रतिकिया आ रही हैं?
मैंने सही प्रतिक्रिया जानने के लिए पहला ट्रायल फिल्म के सभी सदस्यों,अपने पिता महेश भट्ट, चाचा मुकेश भट्ट और कुछ दूसरे दोस्तों के साथ मिल कर देखा। सभी फिल्म देख कर हैरान रह गए। हर किसी को फिल्म की कहानी पसंद आई। यह फिल्म कहीं भी दर्शकों को उनके जीवन मूल्यों से ‘ना’ जुड़ने की बात नहीं करती। पर नियम हैं क्या? नियम वही हैं, जिन्हें हमने बना रखा है। मेरी फिल्म में पाखंड नहीं है।
क्या ‘जिस्म 2’ के बाद कामुकता के मायने बदल जाएंगे?
जी बिलकुल। ‘जिस्म 2’के पहले भाग में एक औरत अपने अकेलेपन में अतीत को याद कर परेशान हो रही है। फिर वह अकेलापन दूर करने के लिए शराब पीने जाती है, जहां उसकी मुलाकात एक पुरुष से होती है। वह पुरुष उसे भा जाता है और वह उसे अपने साथ ले आती है। वह उसके घर में रहने लगता है। अब तक भारतीय फिल्मों में ऐसा पुरुष ही करता आया है, लेकिन पहली बार मेरी फिल्म में यह काम एक औरत कर रही है।
बोल्ड फिल्मों के इस दौर में आपकी फिल्म कैसे अलग है?
हम कुछ ऐसी इनसानी भावनाओं को दिखा रहे हैं, जो अब तक दिखाई नहीं गईं। यह एक सेंसुअस फिल्म है। फिल्म का सबसे बड़ा हथियार ही कामुकता है। मुझे लगता है कि यह फिल्म पुरुष और नारी दोनों की सोच को नई परिभाषा देगी। अब तक हम देखते आए हैं कि औरत भीगे कपड़े पहन कर पुरुष को आकर्षित कर रही है। पर हमारी फिल्म में पुरुष के हाथ लगाए बिना ही औरत अपने कपड़े उतारती है।
हीरोइन के तौर पर सनी क्यों?
दस साल पहले जब एक अखबार में मैंने पहली भारतीय पॉर्न स्टार के रूप में सनी लियोनी पर छपा लेख पढ़ा था, तभी मैंने उन्हें फिल्म ‘जिस्म’ में लेने की बात सोची थी। मुझे उनका भोला- भाला चेहरा बहुत पसंद आया था। पर उस वक्त वह कहीं और अनुबंधित थीं, इसलिए हमारे साथ काम नहीं कर सकती थीं। जब ‘जिस्म 2’ की बात आई तो मेरे पति ने मुझे सनी लियोनी की याद दिलाई। मुझे सनी लियोनी जैसे व्यक्तित्व वाली अभिनेत्री की ही जरूरत थी। इस बार बात बन गई।
सनी लियोनी तो कपड़े उतारने में माहिर हैं, इसलिए उनके साथ काम करना आसान रहा होगा?
हमारे यहां सबसे बड़ी समस्या यही है कि लोग कामुकता और अश्लीलता में फर्क नहीं समझते। पॉर्न फिल्म देखते समय दर्शक के मन में कोई भावना नहीं होती, लेकिन कामुक फिल्मों के साथ ऐसा नहीं है। कामुकता तो नारी के अंदर होती है, यह तब तक बाहर नहीं आती, जब तक नारी अंदर से उसे महसूस न करे। फिर चाहे वह सनी लियोनी हों या कोई दूसरी अभिनेत्री।
मैंने सही प्रतिक्रिया जानने के लिए पहला ट्रायल फिल्म के सभी सदस्यों,अपने पिता महेश भट्ट, चाचा मुकेश भट्ट और कुछ दूसरे दोस्तों के साथ मिल कर देखा। सभी फिल्म देख कर हैरान रह गए। हर किसी को फिल्म की कहानी पसंद आई। यह फिल्म कहीं भी दर्शकों को उनके जीवन मूल्यों से ‘ना’ जुड़ने की बात नहीं करती। पर नियम हैं क्या? नियम वही हैं, जिन्हें हमने बना रखा है। मेरी फिल्म में पाखंड नहीं है।
क्या ‘जिस्म 2’ के बाद कामुकता के मायने बदल जाएंगे?
जी बिलकुल। ‘जिस्म 2’के पहले भाग में एक औरत अपने अकेलेपन में अतीत को याद कर परेशान हो रही है। फिर वह अकेलापन दूर करने के लिए शराब पीने जाती है, जहां उसकी मुलाकात एक पुरुष से होती है। वह पुरुष उसे भा जाता है और वह उसे अपने साथ ले आती है। वह उसके घर में रहने लगता है। अब तक भारतीय फिल्मों में ऐसा पुरुष ही करता आया है, लेकिन पहली बार मेरी फिल्म में यह काम एक औरत कर रही है।
बोल्ड फिल्मों के इस दौर में आपकी फिल्म कैसे अलग है?
हम कुछ ऐसी इनसानी भावनाओं को दिखा रहे हैं, जो अब तक दिखाई नहीं गईं। यह एक सेंसुअस फिल्म है। फिल्म का सबसे बड़ा हथियार ही कामुकता है। मुझे लगता है कि यह फिल्म पुरुष और नारी दोनों की सोच को नई परिभाषा देगी। अब तक हम देखते आए हैं कि औरत भीगे कपड़े पहन कर पुरुष को आकर्षित कर रही है। पर हमारी फिल्म में पुरुष के हाथ लगाए बिना ही औरत अपने कपड़े उतारती है।
हीरोइन के तौर पर सनी क्यों?
दस साल पहले जब एक अखबार में मैंने पहली भारतीय पॉर्न स्टार के रूप में सनी लियोनी पर छपा लेख पढ़ा था, तभी मैंने उन्हें फिल्म ‘जिस्म’ में लेने की बात सोची थी। मुझे उनका भोला- भाला चेहरा बहुत पसंद आया था। पर उस वक्त वह कहीं और अनुबंधित थीं, इसलिए हमारे साथ काम नहीं कर सकती थीं। जब ‘जिस्म 2’ की बात आई तो मेरे पति ने मुझे सनी लियोनी की याद दिलाई। मुझे सनी लियोनी जैसे व्यक्तित्व वाली अभिनेत्री की ही जरूरत थी। इस बार बात बन गई।
सनी लियोनी तो कपड़े उतारने में माहिर हैं, इसलिए उनके साथ काम करना आसान रहा होगा?
हमारे यहां सबसे बड़ी समस्या यही है कि लोग कामुकता और अश्लीलता में फर्क नहीं समझते। पॉर्न फिल्म देखते समय दर्शक के मन में कोई भावना नहीं होती, लेकिन कामुक फिल्मों के साथ ऐसा नहीं है। कामुकता तो नारी के अंदर होती है, यह तब तक बाहर नहीं आती, जब तक नारी अंदर से उसे महसूस न करे। फिर चाहे वह सनी लियोनी हों या कोई दूसरी अभिनेत्री।
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