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फिल्म रिव्यू: रा.वन
सुरेश शर्मा
First Published:28-10-11 10:24 PM
सितारे: शाहरुख खान, करीना कपूर, अमन वर्मा, अर्जुन रामपाल, संजय दत्त, प्रियंका चोपड़ा, सतीश शाह, शहाना गोस्वामी, दिलीप ताहिल।
बैनर: इरोज इंटरनेशनल और रेड चिलीज।
गीतकार: विशाल ददलानी और अनुभव सिन्हा।
संगीतकार: विशाल शेखर।
निर्देशक: अनुभव सिन्हा। रा.वन नए दौर की नई फिल्म है। कथानक का सामाजिक वास्तविकताओं से कुछ भी लेना-देना नहीं है। एक अति काल्पनिक फैंटेसी के कलात्मक ढांचे में रा.वन बनाई गई है। इस फैंटेसी में स्क्रीन पर जो घटनाएं घटती हैं, उनमें तर्क काम नहीं करता। आप उन्हें देखते जाइए और चमत्कृत होते जाइए। फिल्म का इतना ही उद्देश्य है। जो लोग चमत्कार में मनोरंजन ढूंढ़ते हैं, उन्हें इस फिल्म में मजा आएगा। जो सिनेमा में जिंदगी की तलाश करते हैं, उन्हें यह फिल्म निराश करेगी। आधुनिक तकनीक और विशेष प्रभाव की बदौलत दर्शकों को चौंकाना ही फिल्म का मकसद है। इसके लिए फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा ने एक निहायत बनावटी कहानी लिखी है। हालांकि उसका प्रभावी फिल्मांकन किया है। शाहरुख खान एक गेम डिजाइनर हैं। वह कंप्यूटर पर खेले जाने वाले नए-नए गेम बनाते हैं। उनका बेटा भी कंप्यूटर गेम का प्रेमी है। वह पिता से एक ऐसा गेम बनाने के लिए कहता है, जिसमें खलनायक सुपर हीरो जैसा हो। उसे खत्म करना नामुमकिन हो। शाहरुख प्रयास करके रा.वन नामक ऐसा खलनायक बनाते हैं, लेकिन ‘कंप्यूटर जी’ के चमत्कार से खलनायक स्क्रीन से बाहर निकल कर धरती पर आ जाता है। खलनायक रा.वन बने अर्जुन रामपाल अपनी चमत्कारिक गतिविधियां शुरु करते हैं। दूसरी ओर इस रा.वन को मारने के लिए शाहरुख खान जी.वन के रूप में अवतार लेते हैं। कहानी आगे बढ़ती है। अंतत: खलनायक पराजित होता है। यहां तक पहुंचने के लिए कहानी में अनेक मोड़ आते हैं, जो अंधेरे में बैठे दर्शकों को थका देते हैं। गेम डिजाइनर शेखर और जी-वन के रूप में शाहरुख खान ने दिलचस्प रोल किया है। एक संवेदनशील पिता और विराट सुपरहीरो की भूमिकाओं को उन्होंने बेहतर ढंग से निभाया है। उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी में आकर्षण है। उनकी पत्नी बनी करीना कपूर ने भी महज ग्लैमर नहीं परोसा है, बल्कि अभिनय भी किया है। उनका डांस उत्तेजक है, हालांकि वह अब टाइप्ड हो गया है। बेटे प्रतीक के रूप में अमन वर्मा के अभिनय में सहजता है। रा.वन बने अर्जुन रामपाल के चरित्र को दिलचस्प ढंग से रचा गया है। उनकी खासियत यह है कि वह अपना खलनायकत्व असहज हो कर साबित नहीं करते। बेहद सहजता के साथ वह अपनी क्रूरता को अंजाम देते हैं।
फिल्म में शहाना गोस्वामी, सतीश शाह और दिलीप ताहिल का काम भी उल्लेखनीय है। लेकिन गीत और संगीत बेहद सामान्य है। गीत, धुनों के बीच शब्दों की खाना पूर्ति लगते हैं।
बैनर: इरोज इंटरनेशनल और रेड चिलीज।
गीतकार: विशाल ददलानी और अनुभव सिन्हा।
संगीतकार: विशाल शेखर।
निर्देशक: अनुभव सिन्हा। रा.वन नए दौर की नई फिल्म है। कथानक का सामाजिक वास्तविकताओं से कुछ भी लेना-देना नहीं है। एक अति काल्पनिक फैंटेसी के कलात्मक ढांचे में रा.वन बनाई गई है। इस फैंटेसी में स्क्रीन पर जो घटनाएं घटती हैं, उनमें तर्क काम नहीं करता। आप उन्हें देखते जाइए और चमत्कृत होते जाइए। फिल्म का इतना ही उद्देश्य है। जो लोग चमत्कार में मनोरंजन ढूंढ़ते हैं, उन्हें इस फिल्म में मजा आएगा। जो सिनेमा में जिंदगी की तलाश करते हैं, उन्हें यह फिल्म निराश करेगी। आधुनिक तकनीक और विशेष प्रभाव की बदौलत दर्शकों को चौंकाना ही फिल्म का मकसद है। इसके लिए फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा ने एक निहायत बनावटी कहानी लिखी है। हालांकि उसका प्रभावी फिल्मांकन किया है। शाहरुख खान एक गेम डिजाइनर हैं। वह कंप्यूटर पर खेले जाने वाले नए-नए गेम बनाते हैं। उनका बेटा भी कंप्यूटर गेम का प्रेमी है। वह पिता से एक ऐसा गेम बनाने के लिए कहता है, जिसमें खलनायक सुपर हीरो जैसा हो। उसे खत्म करना नामुमकिन हो। शाहरुख प्रयास करके रा.वन नामक ऐसा खलनायक बनाते हैं, लेकिन ‘कंप्यूटर जी’ के चमत्कार से खलनायक स्क्रीन से बाहर निकल कर धरती पर आ जाता है। खलनायक रा.वन बने अर्जुन रामपाल अपनी चमत्कारिक गतिविधियां शुरु करते हैं। दूसरी ओर इस रा.वन को मारने के लिए शाहरुख खान जी.वन के रूप में अवतार लेते हैं। कहानी आगे बढ़ती है। अंतत: खलनायक पराजित होता है। यहां तक पहुंचने के लिए कहानी में अनेक मोड़ आते हैं, जो अंधेरे में बैठे दर्शकों को थका देते हैं। गेम डिजाइनर शेखर और जी-वन के रूप में शाहरुख खान ने दिलचस्प रोल किया है। एक संवेदनशील पिता और विराट सुपरहीरो की भूमिकाओं को उन्होंने बेहतर ढंग से निभाया है। उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी में आकर्षण है। उनकी पत्नी बनी करीना कपूर ने भी महज ग्लैमर नहीं परोसा है, बल्कि अभिनय भी किया है। उनका डांस उत्तेजक है, हालांकि वह अब टाइप्ड हो गया है। बेटे प्रतीक के रूप में अमन वर्मा के अभिनय में सहजता है। रा.वन बने अर्जुन रामपाल के चरित्र को दिलचस्प ढंग से रचा गया है। उनकी खासियत यह है कि वह अपना खलनायकत्व असहज हो कर साबित नहीं करते। बेहद सहजता के साथ वह अपनी क्रूरता को अंजाम देते हैं।
फिल्म में शहाना गोस्वामी, सतीश शाह और दिलीप ताहिल का काम भी उल्लेखनीय है। लेकिन गीत और संगीत बेहद सामान्य है। गीत, धुनों के बीच शब्दों की खाना पूर्ति लगते हैं।
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टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(2)
इ ऍम अ फेन ऑफ़ srk like मूवी वेट फॉर
By binod kumar (1st-November-2011 11:04:AM)
अची मूवी थी सिम्प्ले नहीं कही जा सकती और म्यूजिक तो काफ्फी ही अच्छा था
By DIPESH KUMAR (30th-October-2011 03:48:PM)
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