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जब भी कर बचाने की बात होती है, तो सबसे पहले धारा 80 सी के तहत मिलने वाली एक लाख रुपये की छूट जेहन में आती है, लेकिन यदि आप सही तरह से अध्ययन करें तो पाएंगे कि इसी धारा की छह अन्य उपधाराएं (80 डी, 80 डीडी, 80 ई, 80 जी, 80 जीजी, 80 यू) हैं, जो आपके कर की राशि को कम करने में उपयोगी साबित हो सकती हैं। मसलन, होम लोन कर में छूट पाने का कारगर विकल्प है। होम लोन पर छूट पाने के संबंध में 80 सी और 24 बी दोनों की जानकारी होना उपयोगी होगा।
यह छूट उस राशि पर मिलती है, जो होम लोन पर कुल ब्याज के तौर पर भुगतान की जाती है, फिर चाहे यह घर के क्रय या फिर उसके निर्माण से संबंधित हो। होम लोन पर डेढ़ लाख रुपये तक की ब्याज राशि छूट के तहत शामिल कर सकते हैं। यानी होम लोन के रीपेमेंट की पूरी की पूरी ऋण राशि का उपयोग 80 सी के तहत मिलने वाली छूट के लिए कर सकते हैं। इस संबंध में बैंक विशेष के नियम भी ध्यान रखने होंगे।
लोन के समय से पूर्व भुगतान पर किसी तरह के जुर्माने का प्रावधान तो नहीं है। यदि आपकी पत्नी भी होम लोन में आपके साथ भागीदार हैं, तो वह भी छूट पाने का दावा कर सकती हैं। यह छूट उस रकम पर निर्भर करेगी, जिस सीमा तक दूसरा पार्टनर होम लोन में भागीदार है। वैसे भी संयुक्त लोन और संपत्ति में, छूट की सीमा पांच लाख रुपये तक की ही दी गई है। यदि घर किराए पर चढ़ाया हुआ है तो आप ब्याज की पूरी की पूरी राशि पर छूट पा सकते हैं। यह राशि किराए से होने वाली आय से कम कर ली जाएगी। इस तरह यह आपके और पार्टनर के लिए छूट योग्य खर्च होगा।

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