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निवेशक को किसी एक देश के बाजार में होने वाली अस्थिरता से बचाने के लिए लोगों में इंटरनेशनल फंड में निवेश करने का चलन बढ़ा है। बाजार में इंटरनेशनल फंड कई पैकेज में उपलब्ध है। ऐसे में उन्हें चुनते वक्त एहतियात बरतने की जरूरत है।
क्या है : इंटरनेशनल फंड ऐसे फंड होते हैं जो कि अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में निवेश करते हैं। मोटे तौर पर ये दो प्रकार के होते हैं। पहली तरह के फंड में आंशिक रूप से भारतीय और आंशिक रूप से विदेशी बाजार में निवेश किया जाता है। दूसरी कैटेगरी के फंड पूरी तरह से अंतर्राष्ट्रीय होते हैं जो कि पूरा निवेश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करते हैं। कुछ फंड ऐसे भी होते हैं जो भारत के अतिरिक्त सिर्फ एक देश में निवेश करते हैं। इन फंड की सफलता काफी हद तक घरेलू म्यूचुअल फंड की तरह ही होती है।
कम नहीं जोखिम : इसका सबसे बड़ा जोखिम करेंसी का होता है क्योंकि जब आप पैसा निकाल रहे होते हैं या निवेश कर रहे होते हैं, उस दौरान मुद्राओं के मूल्य में अंतर आ सकता है। ऐसे में संभव है कि आप फायदा कमाने के बावजूद भी ज्यादा पैसा न कमा पाएं। हालांकि इंटरनेशनल फंड डायवर्सिफिकेशन प्रदान करते हैं पर इसके लिए आपको काफी मगजमारी करनी पड़ेगी कि किसी विशेष देश के हिसाब से पोर्टफोलियो कैसे बनाया जाए। और हां, पोर्टफोलियो बनाने में थोड़ी सी चूक भी आपके निवेश को गड़बड़ा सकती है। जानकारों का कहना है कि अगर भारतीय बाजार में निवेश करने से आप इंटरनेशनल फंड में निवेश करने के करीब-करीब पैसा कमा लेते हैं तो ऐसे में भारतीय बाजार में ही निवेश करना बेहतर है।

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