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अगर आप छोटी गलतियों पर लगातार गौर नहीं करेंगे तो आपको म्यूचुअल फंड फॉर्म जमा करने में महीने लग सकते हैं। ध्यान रखें कि मामूली सी गलती आपको बड़ी परेशानी में डाल सकती है। न सिर्फ फॉर्म को बार-बार भरना थका देने वाला काम है बल्कि आप बाजार में होने वाले चढ़ाव से फायदा उठा पाएंगे। यहां कुछ आम गलतियां दी जा रही हैं जो सामान्यत: लोग फॉर्म भरते समय करते हैं।
चुनाव : अगर आप ऐसे फंड हाउस की स्कीम में निवेश कर रहे हैं जो कि आपके फोलियो में पहले से ही है तो ऐसे में अपने मौजूदा पोर्टफोलियो का ही इस्तेमाल करें। फोलियो फंड हाउस के आपके किए गए सभी निवेशों का कांबिनेशन होता है। सेबी के नियमानुसार वर्ष में एक बार आपको सेबी को कंसॉलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट की जानकारी भेजनी चाहिए। इसमें आपकी होल्डिंग की सारी जानकारी होनी चाहिए।
कंसॉलिडेटेड स्टेटमेंट आपका पेपरवर्क कम करता है। इससे आपका निवेश पर निगाह रखना भी आसान हो जाता है। ज्यादातर स्कीमों के कई प्लान और विकल्प होते हैं। सामान्यत: प्लान निवेशक की कैटेगरी के बारे में भी बताते हैं। मतलब कि वह इंस्टीट्यूशनल है या रिटेल। विभिन्न प्लानों के न्यूनतम निवेश के बारे में विभिन्न तरह के निर्देश और बंदिशें होती हैं।
वहीं इंस्टीटय़ूशनल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेशक 25 लाख रुपए से एक करोड़ रुपए होने चाहिए। यह फंड हाउस और रिटेल प्लान पर निर्भर करता है। इंस्टीटय़ूशनल प्लान को कम पैसे से चुनेंगे तो आपके आवेदन को रद्द कर दिया जाएगा। इसके अलावा ये भी फैसला करें कि आपको डिविडेंड और ग्रोथ ऑप्शन में क्या चाहिए। जारी..

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