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नौकरी नहीं है तो न हों हताश

First Published:20-04-2017 12:53:46 AMLast Updated:20-04-2017 12:53:46 AM

कई बार हमें किसी वजह से अपनी नौकरी गंवानी या छोड़नी पड़ती है। ऐसी किसी भी परिस्थिति में डिप्रेशन होना एक आम बात है। लेकिन घबराने की जगह डटकर मुकाबले की तैयारी में जुट जाना चाहिए। इस बारे में दिशा दिखाता एक लेख...

करी छूट जाए या छोड़नी पड़े, दोनों ही सूरतें बहुत दुखदायी होती हैं। और नौकरी तलाशना भी कुछ कम कष्टकारी नहीं होता। पर अपनी किस्मत और व्यवस्था को दोष देने की बजाय कारणों को समझने के साथ उनसे ढंग से निपटने की जरूरत है। आला अधिकारियों के अनुसार कभी-कभी कम्पनियों को बिजनेस कारणों, बाजार की उठा-पटक या फिर कॉस्ट र्कंटग की वजह से न चाहते हुए भी कर्मचारियों को निकलना पड़ता है।

आंकड़े क्या कहते हैं
हाल में बाजार की उठा-पटक और कई कम्पनियों की खस्ता हालत के चलते साल की पहली तिमाही में ही बहुत सारे कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। बाजार की उठा-पटक के चलते विभिन्न कंपनियों को 200-800 करोड़ से लेकर 1000-2000 करोड़ तक का घटा उठाना पड़ा है।
विभिन्न मनोचिकित्सकों के अनुसार नौकरी छूट जाने की वजह से अवसाद से घिरे लोगों की संख्या हर साल 30 से 40 फीसदी तक बढ़ रही है।
घबराएं नहीं, सामना करें
ऐसे में पहली दिक्कत परिवार के पालन-पोषण की आती है। इसलिये यह बहुत जरूरी है कि आप बचत करने की आदत डालें। अपने दिमाग को बंद न होने दें और संयम से काम लें व घबराएं नहीं। अपना नेटवर्क मजबूत बनाएं, ताकि आपको काम के नये अवसर पता चलते रहें। साथ ही किसी सामाजिक कार्य से जुड़ें। इससे मन को एक शांति मिलती है कि आप व्यर्थ नहीं जा रहे हैं।
जब निकाल दिया जाए नौकरी से
निश्चित रूप से यह एक बहुत बड़ा झटका होता है। सालों-साल एक कम्पनी में काम करने पर वह जगह दूसरे घर जैसी हो जाती है। लगता है मानो जीवन में कुछ बचा ही नहीं। ऐसे में निराश और दुखी होना बिल्कुल स्वाभाविक है, पर इस समय भी संयम और आत्मविश्वास बनाये रखने की जरूरत होती है। माना कि आपके दिल में अपनी कम्पनी और बॉस के लिये बहुत नाराजगी भरी होती है, पर ऐसे में शान्ति और समझदारी से ही
काम लेने की जरूरत है। कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें-
’ कभी भी सोशल साइट्स पर अपने बॉस या कम्पनी के बारे में गलत न लिखें। यह बात आपकी छवि पर उल्टा असर डालती है। हो सकता है कि दूसरी किसी जगह आवेदन के समय जब आपको रेफरेंस की जरूरत होगी, तब आपको निराश होना पड़े।
’ अपने पुराने सहकर्मियों के सामने भी कम्पनी के खिलाफ बयानबाजी से बचें, क्योंकि तब अपनी नौकरी को खतरे में डालकर भी वे आपकी मदद नहीं कर पाएंगे।
’ नौकरी से निकाला जाना बेशक बहुत अटपटी बात होती है, पर फिर भी जरूरी है कि आत्मविश्वास को बनाए रखें, क्योंकि सुस्त और अवसाद से घिरे हुए कर्मचारी को कोई कम्पनी नहीं रखना चाहती।
’ जब किसी नयी जगह आवेदन करें तो झूठ न बोलें, बल्कि सच बताएं, क्योंकि किसी भी कम्पनी को आपकी कार्य-कुशलता में ही दिलचस्पी होती है, न कि आपके अपने पुराने बॉस के साथ कड़वे संबंधों में।
’ अपने पिछले अनुभवों को ही अपनी सफलता का आधार बनाएं। जिन गलतियों की वजह से आपकी पिछली नौकरी चली गयी है, उन्हें सुधारने का प्रयास करें। अपने अंदर यह विश्वास जगाएं कि आप हर लिहाज से सक्षम हैं और चुनौतियों का पूरी तरह से सामना कर सकते हैं।

अगर तलाश रहे हैं नौकरी
अकसर यह भी देखा गया है कि कई युवा नौकरी की तलाश करते-करते भी तनाव में आ जाते हैं। हर बार रिज्यूमे नए ढंग से तैयार करने या फिर इंटरव्यू की उसी प्रक्रिया से बार-बार गुजरने पर भी तनाव होने लगता है। ऐसे में आत्मविश्वास को बनाए रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि ये मानकर चलिए कि आपकी अर्जी कई जगह रद्द भी होगी। हो सकता है कि आपको मन मुताबिक नौकरी न मिले। संभव है कि काफी लम्बा समय आपको बिना काम के रहना पड़े। ऐसे में इन बातों का ध्यान रखें-
अपने लक्ष्य से ध्यान न भटकने दें। हो सकता है प्रयास ज्यादा करने पड़ें, पर हताशा में आप कोई भी काम करना शुरू न करें।
विपरीत परिस्थितियों में भी अगर आपमें सामान्य रहने का हुनर है तो मान लेना कि आपने आधी जंग वैसे ही जीत ली, क्योंकि शांत दिमाग ही सही फैसले ले सकता है।
लोगों से मिलना-जुलना जारी रखें। संगी-साथियों को रोज काम पर जाता देखना आपके लिए थोड़ा असहज हो सकता है, इसलिए सामाजिक गतिविधियों से न कटें। हो सकता है कि ऐसी ही किसी गतिविधि में कोई नया मौका छिपा बैठा हो।
स्थितियों से शिकायत ही न करते रहें।
माना कि अभी कुछ अच्छा नहीं है, पर जो भी अच्छा है उसे खुले दिल से स्वीकार कर उसका आनंद लें। इससे प्रेरित होंगे।


जब खुद ही नौकरी छोड़नी पड़े
क्या आपका भी सुबह बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता? क्या आपको आज का काम कल पर टालने की आदत सी बनती जा रही है? तो फिर यह चेतावनी के संकेत हैं। हो सकता है कि आपकी सेहत इतना तनाव लेने की इजाजत न दे रही हो या फिर आप अपनी मौजूदा नौकरी से खुश नहीं हैं। दोनों ही सूरतों में रचनात्मकता खराब होती है।
ऐसा इसलिए है, क्योंकि जीवन कभी एक सा नहीं रहता। कभी-कभी हमें अपने जीवन को गति देने के लिये अपने सुरक्षा खोल से बाहर निकलना पड़ता है या फिर कभी किसी मजबूरी से नौकरी छोड़नी पड़ती है। शुरुआती स्तर पर दोनों ही परिस्थितियां बहुत कठिन होती हैं, जो आपको डिप्रेशन की ओर धकेल देती हैं। माना, मौजूदा वक्त खराब है, पर यहां एकाग्रचित्त रहना जरूरी है और साथ ही यह विश्वास बनाये रखना भी कि आज नहीं तो कल समय सुधर ही जायेगा। सिर्फ आपकी मेहनत और लगन में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें-


अपना हर दिन का रुटीन न बदलें। फिलहाल काम पर न जाने का मतलब यह नहीं है कि आप कभी दोबारा काम करेंगे ही नहीं। इसलिए बेशक घर पर ही सही, पर हर दिन का रुटीन अपने ऑफिस वाला ही रखें।
आप जो भी अनुभव कर रहें हैं, वह अपने खास दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें। अगर फिर भी अच्छा न महसूस हो तो सलाहकार की मदद लें।
अपनी सेहत की तरफ ध्यान बनाये रखें। पार्क में टहलने जरूर जाएं और ध्यान लगायें। योगाभ्यास भी आपको बहुत फायदा देगा।
काम पर न जाना आपको उदास और निराश बना देता है। यह बिल्कुल स्वाभाविक है, इसलिए इसे छिपाएं नहीं। सच्चाई को स्वीकारें, पर साथ ही मन में यह विश्वास भी बनाए रखना जरूरी है कि आप फिर से सब ठीक कर देंगे।
अगर इसके बाद भी डिप्रेशन कम न हो तो डॉक्टर की सलाह लें।

हमारे विशेषज्ञ : मनोचिकित्सक डॉक्टर अमिता पुरी, ट्राईटोन हॉस्पिटल, नई दिल्ली व मनु शर्मा, डीजीएम-एचआर, हीरो इलेक्ट्रिक से बातचीत पर आधारित स्वाति गौड़

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