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चीरुडीह गोलीकांड की जांच को रांची से पहुंची तीन सदस्यीय टीम

हज़ारीबाग वरीय संवाददाता First Published:19-10-2016 06:27:49 PMLast Updated:19-10-2016 06:30:23 PM

राज्य सरकार के घोषित पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चीरुडीह गोलीकांड की जांच के लिये बुधवार को जिले के बड़कागांव प्रखंड मुख्यालय में जनसुनवाई की खातिर जांच टीम पहुंची। राज्य मुख्यालय से अधिकारियों की इस टीम के एक सदस्य स्टेट कैबिनेट कोर्डिनेशन सेक्रेटरी एसएस मीणा ने पहले पहुंचकर स्थिति को सामान्य बनाने में पहल की।

उन्हें विश्वास कायम करने में एक घंटे से भी अधिक का वक्त लग गया। 12 बजे वे पहुंचे और एक बजे उनके प्रयास से ग्रामीणों की गवाही शुरू हुई। लेकिन इसके लिये उन्हें स्थानीय अधिकारियों को बाहर जाने को कहना पड़ गया। डीआइजी उपेन्द्र कुमार, प्रशिक्षु आइएएस आर यादव, डीडीसी राजेश पाठक तथा बीडीओ- सीओ को उठकर हॉल से बाहर जाना पड़ा। उसके बाद प्रभावित इलाकों से आये ग्रामीण, जो गांव चलने और बैठक स्थगित करने की बात कह रहे थे, तैयार हुए। उसके बाद वन टू वन बयान लेने की शर्त पर सभी ने फायरिंग और उसके बाद की स्थिति पर अपनी बातें रखी। गौरतलब है कि श्री मीणा हजारीबाग में कमिश्नर रह चुके हैं। साथ ही विभावि कुलपति के रूप में भी काम किया है। अपने काम के कारण उनकी अच्छी पहचान रही है और इस कारण उन्हें इसका फायदा मिला। जनसुनवायी शुरू होने के बाद जांच दल में शामिल एक अन्य सदस्य एडीजी अजय कुमार सिंह पंहुचे। उन्होंने भी अन्य पहलू पर घटना के बाबत जानकारी हासिल की। जनसुनवायी कक्ष में जिला परिषद अध्यक्ष सुशीला देवी, बड़कागांव के पूर्व विधायक लोकनाथ महतो, प्रभावित गांवों के मुखिया, रैयत और पंचायत प्रतिनिधि मौजूद थे।

अब भी जख्म हरे, मृतक के परिजनों ने भी पहुंचकर दी जानकारी

चीरुडीह गोलीकांड में पुलिस की गोली से मरे अपने बेटों को निर्दोष बताते हुए उनके परिजन अपने उद्गार व्यक्त करने के लिये पहुंचे थे। इनमें काशीनाथ राम पहुंचे थे। वे अपने बेटे रंजन कुमार दास की मौत पर कुछ बताने आये थे। कहा कि उनका बेटा तो उसी सड़क से पढ़ने की खातिर आता-जाता था। घटनावाले दिन वह बड़कागांव आ रहा था कि गोलीकांड का शिकार बन गया। बताया कि वह इंदिरा गांधी मेमोरियल कॉलेज का छात्र था। भखीरन साव सोनबरसा के बेटे पवन कुमार की भी मौत गोलीकांड में हुई थी। उन्होंने भी अपनी बातें रखीं। वहीं एक और मृतक अंसारी के पिता और भाई ने भी रुंधे गले यही सबकुछ बताया। जबकि चेपाखुर्द से अंसारी की मौत से दुखी उनके पिता मोजिब अंसारी और भाई मो. आफताब आलम पहुंचे। इन्होंने बयान दिया कि उनका बेटा मजदूरी करता था। रात में काम के बाद लौटा। सुबह शौच के लिये निकला था, इसी में गोलीकांड का शिकार हो गया।

अधिकारी के समक्ष इन लोगों ने भी दिया बयान

अधिकारी के समक्ष बयान देनेवालों में किशोर यादव, राजेश कुमार रजक, कौलेश्वर महतो, कैलाश साव, शंकर राम, प्रेम कुमार, शिबू महतो, सुखदेव साव, ब्रजेश सिंह, भोला साव भी शामिल थे। अधिकांश ने पुलिस फायरिंग पर नाराजगी जतायी। गिरफ्तारी और पुलिस की चूक तथा टाइमिंग पर भी सवाल उठाएं। बंद कमरे में और किसने क्या कहा, इसपर अधिकारी ने कुछ भी बताने से इंकार किया। लेकिन कुछ ने आंदोलन के खिलाफ भी अपनी भावना व्यक्त की।

फोटोअंटू 1- विश्वास बहाली के लिये अकेले प्रयास करते अधिकारी एसएस मीणा

अंटू 2 - हॉल के बाहर से नजर रखते कुछ लोग

अंटू 3- अपनी बारी का इंतजार करते मृतक रंजन कुमार दास के पिता काशीनाथ राम

अंटू 4 -मृतक पवन के पिता महावीर साव

अंटू 5- मृतक अंसारी के पिता मोजिब अंसारी और भाई

प्वाइंटर :

जनसुनवाई में जनप्रतिनिधियों ने रखा पक्ष

विश्वास बहाली में लगे वक्त

स्थानीय अधिकारियों को हटाने के बाद खुले ग्रामीण

प्रशिक्षु आइएएस, डीआईजी, डीडीसी, बीडीओ- सीओ कमरे से हटे

वन टू वन पूछताछ के एलान के बाद कुछ कहने को तैयार हुए ग्रामीण

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